अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालयों में एडमिशन प्रक्रिया शुरू:9वीं और 11वीं में नामांकन के लिए ऑनलाइन आवेदन; 17 मई को एंट्रेंस एग्जाम

अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालयों में एडमिशन प्रक्रिया शुरू:9वीं और 11वीं में नामांकन के लिए ऑनलाइन आवेदन; 17 मई को एंट्रेंस एग्जाम

बिहार में अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नामांकन की शुरूआत हो गई है। बिहारशरीफ के चकरसलपुर स्थित विद्यालय समेत कैमूर, कटिहार, जमुई और मुजफ्फरपुर के उच्च स्तरीय विद्यालयों में क्लास 9वीं और 11वीं में दाखिले के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इन विद्यालयों में अल्पसंख्यक समुदाय के अंतर्गत आने वाले मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी समाज के मेधावी छात्र-छात्राओं का चयन राज्य स्तर पर किया जाएगा। आगामी एक मई तक अपना ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं, जिसके बाद 17 मई को प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। परिवार की वार्षिक आय छह लाख से ज्यादा नहीं होनी चाहिए जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी मनीष कुमार ने बताया कि प्रवेश परीक्षा पूरी तरह ऑब्जेक्टिव प्रश्न पर आधारित होगी, जिसमें कुल 100 अंकों के प्रश्न पूछे जाएंगे। परीक्षार्थियों को इन प्रश्नों को हल करने के लिए दो घंटे का समय दिया जाएगा। परीक्षा के सफल आयोजन के बाद 28 मई को परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे, ताकि एक से छह जून के बीच नामांकन की सभी औपचारिकताएं पूरी की जा सके। नए शैक्षणिक सत्र की विधिवत शुरुआत आठ जून से निर्धारित की गई है। आयु सीमा का निर्धारण करते हुए विभाग ने कक्षा नौवीं के लिए अधिकतम 16 वर्ष और 11वीं के लिए 18 वर्ष की आयु तय की है। साथ ही, आवेदन के लिए परिवार की वार्षिक आय छह लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए। 75 प्रतिशत सीट ग्रामीण क्षेत्र के मेधावी छात्रों के लिए सुरक्षित नवोदय विद्यालयों की तर्ज पर संचालित इन स्कूलों की सबसे खास बात यह है कि यहां छात्रों के रहने से लेकर पढ़ाई तक का सारा बोझ राज्य सरकार उठाती है। चयनित बच्चों को निशुल्क भोजन, वस्त्र, दवाइयां, पाठ्य पुस्तकें और आधुनिक प्रयोगशालाओं जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। सामाजिक संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से इन विद्यालयों में 75 प्रतिशत सीटें ग्रामीण क्षेत्र के मेधावी छात्रों के लिए सुरक्षित की गई हैं, जबकि कुल क्षमता की 50 प्रतिशत सीटें बालिकाओं के लिए आरक्षित हैं। 11वीं कक्षा के छात्रों के लिए यहां विज्ञान और कला दोनों ही संकायों में शिक्षा की उत्कृष्ट व्यवस्था उपलब्ध है। आवेदन की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट किया गया है कि अभ्यर्थियों को ऑनलाइन फॉर्म भरते समय अंचलाधिकारी द्वारा निर्गत जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र के साथ अपने शैक्षणिक दस्तावेज, फोटो और हस्ताक्षर अपलोड करना अनिवार्य होगा। केवल ऑनलाइन आवेदन से प्रक्रिया पूरी नहीं होगी। अभ्यर्थियों को अपने भरे हुए आवेदन का प्रिंटआउट जिला अल्पसंख्यक कल्याण कार्यालय में स्वयं जाकर या पंजीकृत डाक के माध्यम से अनिवार्य रूप से जमा करना होगा। सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदाय के गरीब लेकिन प्रतिभावान बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़कर उनके भविष्य को उज्ज्वल बनाना है। बिहार में अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नामांकन की शुरूआत हो गई है। बिहारशरीफ के चकरसलपुर स्थित विद्यालय समेत कैमूर, कटिहार, जमुई और मुजफ्फरपुर के उच्च स्तरीय विद्यालयों में क्लास 9वीं और 11वीं में दाखिले के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इन विद्यालयों में अल्पसंख्यक समुदाय के अंतर्गत आने वाले मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी समाज के मेधावी छात्र-छात्राओं का चयन राज्य स्तर पर किया जाएगा। आगामी एक मई तक अपना ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं, जिसके बाद 17 मई को प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। परिवार की वार्षिक आय छह लाख से ज्यादा नहीं होनी चाहिए जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी मनीष कुमार ने बताया कि प्रवेश परीक्षा पूरी तरह ऑब्जेक्टिव प्रश्न पर आधारित होगी, जिसमें कुल 100 अंकों के प्रश्न पूछे जाएंगे। परीक्षार्थियों को इन प्रश्नों को हल करने के लिए दो घंटे का समय दिया जाएगा। परीक्षा के सफल आयोजन के बाद 28 मई को परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे, ताकि एक से छह जून के बीच नामांकन की सभी औपचारिकताएं पूरी की जा सके। नए शैक्षणिक सत्र की विधिवत शुरुआत आठ जून से निर्धारित की गई है। आयु सीमा का निर्धारण करते हुए विभाग ने कक्षा नौवीं के लिए अधिकतम 16 वर्ष और 11वीं के लिए 18 वर्ष की आयु तय की है। साथ ही, आवेदन के लिए परिवार की वार्षिक आय छह लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए। 75 प्रतिशत सीट ग्रामीण क्षेत्र के मेधावी छात्रों के लिए सुरक्षित नवोदय विद्यालयों की तर्ज पर संचालित इन स्कूलों की सबसे खास बात यह है कि यहां छात्रों के रहने से लेकर पढ़ाई तक का सारा बोझ राज्य सरकार उठाती है। चयनित बच्चों को निशुल्क भोजन, वस्त्र, दवाइयां, पाठ्य पुस्तकें और आधुनिक प्रयोगशालाओं जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। सामाजिक संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से इन विद्यालयों में 75 प्रतिशत सीटें ग्रामीण क्षेत्र के मेधावी छात्रों के लिए सुरक्षित की गई हैं, जबकि कुल क्षमता की 50 प्रतिशत सीटें बालिकाओं के लिए आरक्षित हैं। 11वीं कक्षा के छात्रों के लिए यहां विज्ञान और कला दोनों ही संकायों में शिक्षा की उत्कृष्ट व्यवस्था उपलब्ध है। आवेदन की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट किया गया है कि अभ्यर्थियों को ऑनलाइन फॉर्म भरते समय अंचलाधिकारी द्वारा निर्गत जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र के साथ अपने शैक्षणिक दस्तावेज, फोटो और हस्ताक्षर अपलोड करना अनिवार्य होगा। केवल ऑनलाइन आवेदन से प्रक्रिया पूरी नहीं होगी। अभ्यर्थियों को अपने भरे हुए आवेदन का प्रिंटआउट जिला अल्पसंख्यक कल्याण कार्यालय में स्वयं जाकर या पंजीकृत डाक के माध्यम से अनिवार्य रूप से जमा करना होगा। सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदाय के गरीब लेकिन प्रतिभावान बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़कर उनके भविष्य को उज्ज्वल बनाना है।  

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