सतलुज किनारे अवैध खनन के आरोपों पर प्रशासन अलर्ट:हाईकोर्ट की सख्ती के बाद, 24 घंटे चेकपोस्ट, SHO और इंजीनियरों की जवाबदेही तय

सतलुज किनारे अवैध खनन के आरोपों पर प्रशासन अलर्ट:हाईकोर्ट की सख्ती के बाद, 24 घंटे चेकपोस्ट, SHO और इंजीनियरों की जवाबदेही तय

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा “डी-सिल्टिंग” के दावों को खारिज कर गतिविधियों को शुरूआती दौर में अवैध खनन करार दिए जाने के बाद लुधियाना प्रशासन ने जिले में खनन और खनिज परिवहन पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन ने पुलिस और खनन विभाग के अधिकारियों को सीधे जिम्मेदार ठहराते हुए सख्त आदेश जारी किए हैं। यह कार्रवाई बूथगढ़, गडापुर, गौंसगढ़ और गढ़ी टोगर समेत कई गांवों के निवासियों और ग्राम पंचायतों की शिकायतों के बाद की गई है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि अवैध खनन और भारी टिपरों की आवाजाही से गांवों की सड़कें और सार्वजनिक ढांचा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो रहा है। हाईकोर्ट ने जताई थी सख्त नाराजगी
सतलुज नदी क्षेत्र में कथित अवैध खनन को लेकर दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा था कि जिस पैमाने पर खुदाई हो रही है, वह केवल डी-सिल्टिंग नहीं बल्कि अवैध खनन प्रतीत होती है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में अवैध खनन की शिकायत मिलने पर डिप्टी कमिश्नर और जिला खनन अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। बुरज टेहल दास साइट से खनिज परिवहन पर पूरी रोक 2 जून को जारी आदेशों में डीसी ने विवादित बुरज टेहल दास डी-सिल्टिंग साइट से रेत, मिट्टी या अन्य खनिजों के परिवहन, भंडारण और आवाजाही पर अगले आदेश तक पूरी तरह रोक लगा दी है। साइट से जुड़े किसी भी ट्रक, टिपर, डंपर, ट्रैक्टर-ट्रॉली या अर्थमूविंग मशीन को सतलुज के 3एल बांध, गढ़ी टोगर और आसपास के गांवों की सड़कों तथा राहों-मत्तेवाड़ा-लुधियाना रोड का उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी। आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। NHAI परियोजना के वाहनों पर भी प्रतिबंध लुधियाना-रोपड़ नेशनल हाईवे परियोजना के लिए एनएचएआई को आवंटित डी-सिल्टिंग साइटों से जुड़े वाहनों को भी केवल निर्धारित हाईवे कॉरिडोर और अधिकृत मार्गों तक सीमित रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ऐसे वाहन गांवों की आंतरिक सड़कों या आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। अधिकृत मार्ग से बाहर किसी भी वाहन की आवाजाही को अवैध खनिज परिवहन माना जाएगा। मेहरबान थाने के बाहर 24 घंटे चेकपोस्ट खनिज परिवहन पर निगरानी के लिए राहों रोड स्थित थाना मेहरबान के बाहर 24 घंटे संचालित होने वाली स्थायी चेकपोस्ट स्थापित की गई है। जिले से गुजरने वाले हर खनिज वाहन की जांच होगी। खनन विभाग के अधिकारी प्रत्येक वाहन और उसके माल की वैधता प्रमाणित करेंगे। चेकपोस्ट पर लगातार वीडियो रिकॉर्डिंग होगी और टाइम-स्टैम्प फुटेज हर सप्ताह डीसी कार्यालय को भेजी जाएगी। SHO और इंजीनियर होंगे जिम्मेदार डीसी के आदेश में पुलिस और ड्रेनेज विभाग के अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी गई है। सतलुज नदी क्षेत्र में तैनात थाना प्रभारियों और ड्रेनेज विभाग के इंजीनियरों को लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। यदि अवैध खनन या खनिज परिवहन जारी रहता है तो संबंधित SHO और कार्यकारी अभियंता के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस कमिश्नर को संवेदनशील मार्गों पर पुलिस पिकेट लगाने, वाहनों को जब्त करने और एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। टूटी सड़कों और इंफ्रास्ट्रक्चर का होगा सर्वे ग्रामीणों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) को भारी वाहनों से क्षतिग्रस्त हुई सड़कों का विस्तृत सर्वे करने और 10 जून तक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। वहीं अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (विकास) सीवरेज, ड्रेनेज, पेयजल लाइनों और अन्य सार्वजनिक ढांचे को हुए नुकसान का आकलन करेंगे। रिपोर्ट के आधार पर कानूनी प्रावधानों के तहत खनन संचालकों और लीज धारकों से मरम्मत खर्च की वसूली की जा सकती है। सरपंचों को भी दी गई जिम्मेदारी प्रभावित गांवों के सरपंचों को भी निगरानी व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है। उन्हें किसी भी प्रतिबंधित खनन गतिविधि या खनिज परिवहन की जानकारी तुरंत पुलिस और खनन विभाग को देने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन के ये आदेश पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अगले निर्देश तक प्रभावी रहेंगे।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *