नयी दिल्ली, दो नवंबर दिल्ली की वायु गुणवत्ता के इस मौसम में पहली बार ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंचने के बाद कांग्रेस ने सोमवार को मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पीएम 2.5 देश की राजधानी का दम घोंट रहा है और ‘पीएम 3.0 सरकार’ को इस समस्या को अब तक की तुलना में कहीं अधिक गंभीरता से लेना चाहिए। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) में पीएम 10 पर अधिक ध्यान दिया जाता है, जबकि जन स्वास्थ्य के लिहाज से पीएम 2.5 अधिक खतरनाक है। रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘पीएम 2.5 देश की राजधानी और विशेषकर उत्तर भारत के अन्य हिस्सों का दम घोंट रहा है।’’
उन्होंने कहा कि काफी समय से यह स्पष्ट है कि पीएम 2.5 यानी 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम व्यास वाले कणों के लिए निर्धारित सुरक्षा मानक, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के 24 घंटे के औसत मानकों से चार गुना और सालाना औसत के लिहाज से आठ गुना अधिक हैं।
रमेश ने कहा, ‘‘राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम में पीएम 10 पर अधिक ध्यान दिया जाता है, लेकिन पीएम 2.5 जैसे छोटे कण जन स्वास्थ्य के लिए वास्तव में अधिक घातक हैं। पीएम 2.5 के मानकों में तत्काल संशोधन किया जाना चाहिए और उन्हें सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि खुद गंभीर मुश्किलों में घिरी ‘‘तथाकथित पीएम 3.0 सरकार’’ को इस समस्या को अब तक की तुलना में अधिक गंभीरता से लेना चाहिए। उनकी यह टिप्पणी ऐसे दिन आई है, जब दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) सोमवार सुबह नौ बजे 312 दर्ज किया गया और इस मौसम में पहली बार ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंच गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, शून्य से 50 के बीच एक्यूआई को ‘अच्छा’, 51 से 100 को ‘संतोषजनक’, 101 से 200 को ‘मध्यम’, 201 से 300 को ‘खराब’, 301 से 400 को ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 को ‘गंभीर’ माना जाता है। दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक के 301 से 400 के बीच पहुंचने पर चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्ययोजना (ग्रैप) का दूसरा चरण लागू किया जाता है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की ग्रैप के संचालन संबंधी उप-समिति वायु गुणवत्ता और मौसम संबंधी पूर्वानुमानों के आधार पर दूसरे चरण को लागू करने का फैसला करती है।
इसके तहत वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए सख्त उपाय किए जाते हैं।

