रायपुर, दो नवंबर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोमवार को महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप घोटाले के कथित सरगना सौरभ चंद्राकर के प्रत्यर्पण को एक बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा कि उससे पूछताछ करने पर उन लोगों की पहचान सामने आएगी, जिन्हें इस अवैध सट्टा सिंडिकेट से प्रोटेक्शन मनी मिलता था। दिल्ली रवाना होने से पहले रायपुर के स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए, साय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और अन्य केंद्रीय एजेंसियों को धन्यवाद दिया।
उन्होंने राज्य के दुर्ग जिले के रहने वाले चंद्राकर को ओमान से भारत वापस लाने के लिए इन एजेंसियों की तारीफ की। साय ने कहा, ‘‘सीबीआई लगातार कोशिश कर रही थी कि महादेव बेटिंग ऐप मामले के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को विदेश से भारत वापस लाया जाए, ताकि इस मामले से जुड़ी जानकारी उससे मिल सके। उससे पूछताछ करने पर पता चलेगा कि किसे प्रोटेक्शन मनी मिल रहा था।’’
उन्होंने आरोपी को पकड़ने और उसका प्रत्यर्पण कराने के लिए सीबीआई और अन्य केंद्रीय एजेंसियों का आभार जताते हुए इसे एक बड़ी सफलता बताया।
अधिकारियों ने रविवार को बताया कि सीबीआई ने छह हजार करोड़ रुपये के कथित महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप घोटाले के सिलसिले में चंद्राकर को ओमान से प्रत्यर्पित कराया है। सीबीआई की एक टीम उसे ओमान से भारत लेकर आई। अधिकारियों के अनुसार, सोमवार को उसे रायपुर की एक विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।
सीबीआई ने बताया कि चंद्राकर दो सीबीआई मामलों और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के एक मामले में वांछित था। इन सभी मामलों में आरोपपत्र पहले ही दाखिल किया जा चुका है। एजेंसी के मुताबिक, उसके खिलाफ जारी रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने चंद्राकर को खोजा और हिरासत में ले लिया।
इसके बाद, सीबीआई और ईडी ने उसके खिलाफ जुटाए गए सबूतों के साथ ओमान को औपचारिक प्रत्यर्पण अनुरोध भेजा था। एजेंसी के अनुसार, जांच से पता चला है कि महादेव ऑनलाइन बुक देश के सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन बेटिंग सिंडिकेट में से एक था। कथित तौर पर इसे भारत के बाहर से, फ्रेंचाइजी पैनलों और शाखाओं के एक नेटवर्क के जरिए चलाया जा रहा था।
आरोप है कि यह प्लेटफॉर्म क्रिकेट, फुटबॉल, ताश के खेलों और अन्य इवेंट्स पर सट्टेबाजी की सुविधा देता था। इसके लिए पूरे देश में अपना नेटवर्क फैलाकर यूजर्स को जोड़ा जाता था और उनसे दांव की रकम जमा कराई जाती थी। सीबीआई का आरोप है कि अवैध सट्टेबाजी से कमाई गई रकम को कई म्यूल बैंक खातों के जरिए घुमाया गया, कई लेन-देन करके उसे छिपाया गया और फिर हवाला चैनलों के जरिए विदेश भेज दिया गया।
सीबीआई ने बताया, ‘‘जांच में यह भी पता चला है कि इस कमाई का एक हिस्सा सरकारी अधिकारियों को प्रोटेक्शन मनी के रूप में दिया जाता था, ताकि यह सिंडिकेट बिना किसी रुकावट के अपना काम चला सके।’’
छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान सामने आए महादेव ऐप मामले में, ईडी कथित धन शोधन की जांच कर रही है। ईडी ने पहले ही दावा किया था कि उसकी जांच में छत्तीसगढ़ के कई बड़े राजनेताओं और नौकरशाहों की मिलीभगत सामने आई है। राज्य में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद, ईडी की रिपोर्ट के आधार पर राज्य की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) ने मार्च 2024 में एक प्राथमिकी दर्ज की।
इसमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। ईओडब्ल्यू की इस प्राथमिकी में पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल, ऐप प्रमोटर रवि उप्पल, सौरभ चंद्राकर, शुभम सोनी और अनिल कुमार अग्रवाल समेत 14 अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है। अगस्त 2024 में, राज्य सरकार ने इस कथित सट्टेबाजी ऐप घोटाले से जुड़े 70 मामलों (जो अलग-अलग पुलिस थानों में दर्ज थे) और ईओडब्ल्यू के एक मामले को सीबीआई को सौंप दिया।

