चतरा जिले के कुंदा प्रखंड के सिंदरी गांव में एंबुलेंस के गांव तक नहीं पहुंचने के कारण एक गर्भवती महिला को परिजनों ने चारपाई पर लादकर करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल ढोया। इसके बाद मुख्य सड़क पर पहुंचकर महिला को एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया। मामला नवादा पंचायत का है। यहां की रहने वाली रिंकू देवी को प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों ने एंबुलेंस बुलाई थी। एंबुलेंस गांव की ओर पहुंची, लेकिन चालक ने तराई की खड़ी घाटी में अधिक चढ़ाई होने का हवाला देकर आगे जाने से इनकार कर दिया। उसने सबानो के पास ही गाड़ी खड़ी कर दी। रिंकू देवी के पिता राजदेव गंझू ने चालक से एंबुलेंस को गांव तक ले जाने की गुजारिश की, लेकिन चालक नहीं माना। इसके बाद परिजनों के पास महिला को चारपाई पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। वे करीब डेढ़ किलोमीटर तक पैदल चलकर सड़क पर पहुंचे। ग्रामीणों का दावा- गांव तक पहुंचती हैं चारपहिया गाड़ियां ग्रामीणों का कहना है कि सिंदरी गांव तक पक्की सड़क बनी हुई है। इस रास्ते से चारपहिया वाहन और बोरिंग वाहन भी आसानी से गांव तक पहुंचते हैं। इसके बावजूद एंबुलेंस के गांव तक नहीं पहुंचने से लोगों में नाराजगी है। कुंदा प्रखंड में गर्भवती महिला को खाट या डोली पर ढोकर अस्पताल पहुंचाने की यह तीसरी घटना बताई जा रही है। लगातार ऐसी घटनाएं सामने आने के बाद ग्रामीणों ने स्वास्थ्य सुविधाओं और एंबुलेंस की पहुंच को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रसव जैसी आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए इस तरह पैदल ले जाना जोखिम भरा है। खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना जरूरी है। बीडीओ बोले- वैकल्पिक रास्ते की तलाश करेंगे मामले पर कुंदा के बीडीओ साकेत कुमार सिन्हा ने बताया कि तराई की घाटी में काफी अधिक चढ़ाई है, जिसके कारण एंबुलेंस वहां नहीं चढ़ पाई। उन्होंने कहा कि दूसरे रास्ते से जाने पर भी एक ही सड़क पर पांच बार नदी पार करनी पड़ती है। बीडीओ के अनुसार, डीसी रवि आनंद से निर्देश मिलने के बाद वे आज खुद गांव और संबंधित रास्ते का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद वैकल्पिक समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस मामले में चिकित्सा प्रभारी को भी बुलाकर बातचीत की जा रही है। चतरा जिले के कुंदा प्रखंड के सिंदरी गांव में एंबुलेंस के गांव तक नहीं पहुंचने के कारण एक गर्भवती महिला को परिजनों ने चारपाई पर लादकर करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल ढोया। इसके बाद मुख्य सड़क पर पहुंचकर महिला को एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया। मामला नवादा पंचायत का है। यहां की रहने वाली रिंकू देवी को प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों ने एंबुलेंस बुलाई थी। एंबुलेंस गांव की ओर पहुंची, लेकिन चालक ने तराई की खड़ी घाटी में अधिक चढ़ाई होने का हवाला देकर आगे जाने से इनकार कर दिया। उसने सबानो के पास ही गाड़ी खड़ी कर दी। रिंकू देवी के पिता राजदेव गंझू ने चालक से एंबुलेंस को गांव तक ले जाने की गुजारिश की, लेकिन चालक नहीं माना। इसके बाद परिजनों के पास महिला को चारपाई पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। वे करीब डेढ़ किलोमीटर तक पैदल चलकर सड़क पर पहुंचे। ग्रामीणों का दावा- गांव तक पहुंचती हैं चारपहिया गाड़ियां ग्रामीणों का कहना है कि सिंदरी गांव तक पक्की सड़क बनी हुई है। इस रास्ते से चारपहिया वाहन और बोरिंग वाहन भी आसानी से गांव तक पहुंचते हैं। इसके बावजूद एंबुलेंस के गांव तक नहीं पहुंचने से लोगों में नाराजगी है। कुंदा प्रखंड में गर्भवती महिला को खाट या डोली पर ढोकर अस्पताल पहुंचाने की यह तीसरी घटना बताई जा रही है। लगातार ऐसी घटनाएं सामने आने के बाद ग्रामीणों ने स्वास्थ्य सुविधाओं और एंबुलेंस की पहुंच को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रसव जैसी आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए इस तरह पैदल ले जाना जोखिम भरा है। खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना जरूरी है। बीडीओ बोले- वैकल्पिक रास्ते की तलाश करेंगे मामले पर कुंदा के बीडीओ साकेत कुमार सिन्हा ने बताया कि तराई की घाटी में काफी अधिक चढ़ाई है, जिसके कारण एंबुलेंस वहां नहीं चढ़ पाई। उन्होंने कहा कि दूसरे रास्ते से जाने पर भी एक ही सड़क पर पांच बार नदी पार करनी पड़ती है। बीडीओ के अनुसार, डीसी रवि आनंद से निर्देश मिलने के बाद वे आज खुद गांव और संबंधित रास्ते का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद वैकल्पिक समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस मामले में चिकित्सा प्रभारी को भी बुलाकर बातचीत की जा रही है।

