नागौर में RTE समेत सरकारी योजनाओं के तहत निजी स्कूलों का करोड़ों रुपए का भुगतान लंबे समय से अटका होने से स्कूल संचालकों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। सोमवार को नागौर में निजी स्कूल संगठनों ने शिक्षा विभाग के कार्यालय का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया। सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक चले प्रदर्शन के दौरान स्कूल संचालक मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गए और जमकर नारेबाजी की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों को कार्यालय में प्रवेश करने से भी रोका। संचालकों ने चेतावनी दी कि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो आंदोलन को प्रदेश स्तर पर तेज किया जाएगा। बोले- 60 करोड़ की पेमेंट बाकी जिला स्कूल एसोसिएशन के सचिव विनेश कुमार ने बताया कि नागौर जिले की निजी स्कूलों का विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत करीब 60 करोड़ रुपए का भुगतान बकाया है। इसमें वर्ष 2023-24 का 30 प्रतिशत भुगतान लंबित है, जबकि वर्ष 2024-25 और 2025-26 का 100 प्रतिशत भुगतान अभी तक नहीं हुआ है। लंबे समय से राशि नहीं मिलने के कारण निजी स्कूल संचालकों को स्कूलों के संचालन और शिक्षण व्यवस्थाओं को बनाए रखने में आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बालिका फॉउंडेशन का भुगतान भी अटका विनेश कुमार ने बताया कि बालिका शिक्षा फाउंडेशन के तहत वर्ष 2023 से 2026 तक का भुगतान बकाया चल रहा है। वहीं मुख्यमंत्री बालक प्रोत्साहन योजना के तहत वर्ष 2024 से 2026 तक का 100 प्रतिशत भुगतान लंबित है। इन योजनाओं के तहत सरकार की ओर से विद्यार्थियों के अभिभावकों के खातों में राशि जमा करवाई जाती है, लेकिन समय पर भुगतान नहीं होने से निजी स्कूलों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। नर्सरी से RTE का भुगतान शुरू करने की मांग प्रदर्शन के दौरान निजी स्कूल संचालकों ने RTE की भुगतान व्यवस्था में बदलाव की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि सरकार की ओर से बच्चों को नर्सरी कक्षा से ही RTE के तहत प्रवेश दिया जाता है, लेकिन स्कूलों को भुगतान पहली से आठवीं कक्षा तक का ही मिलता है। ऐसे में नर्सरी से पहली कक्षा तक बच्चों को पढ़ाने का खर्च स्कूल संचालकों को स्वयं उठाना पड़ता है। उन्होंने मांग की कि RTE के तहत भुगतान नर्सरी कक्षा से ही शुरू किया जाए। बोले- समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन करेंगे प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से सभी लंबित भुगतानों का जल्द निस्तारण करने और सरकारी योजनाओं की भुगतान प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की। संचालकों का कहना है कि स्कूलों को समय पर भुगतान नहीं मिलने से शैक्षणिक व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार और विभाग ने जल्द उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की तो निजी स्कूल संचालक प्रदेशव्यापी आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

