डेडबॉडी को प्रिजर्व करने वाले केमिकल से बन रहा मशरूम:बिहार में एजेंट बोले-लंबे समय तक चमक रहेगी; केमिकल वाले मशरूम से कैंसर तक हो सकता है

डेडबॉडी को प्रिजर्व करने वाले केमिकल से बन रहा मशरूम:बिहार में एजेंट बोले-लंबे समय तक चमक रहेगी; केमिकल वाले मशरूम से कैंसर तक हो सकता है

जिस मशरूम को मांस और पनीर के प्रोटीन का विकल्प मानकर सेहत बनाने के लिए खाने में लिया जा रहा है। उस मशरूम को डेड बॉडी को सुरक्षित करने वाले केमिकल से तैयार किया जा रहा है। मशरूम को सफेद और लंबे समय तक ताजा दिखाने के लिए इन घातक केमिकल्स फार्मोलिन और पोटैशियम मेटाबाइसल्फाइट का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन्हें लगाने के बाद मशरूम लंबे समय तक ताजा रहता है। यह खेल बिहार की सबसे बड़ी मंडी गया में चल रहा है। सवाल है कि जिस मशरूम को लोग सेहत बनाने के लिए खा रहे हैं, क्या वह उनके लिए सुरक्षित है? इस नकली खेल की सच्चाई क्या है और कैसे पहचानें अपनी थाली का सही और सुरक्षित मशरूम? देखिए और पढ़िए, कैसे केमिकल से तैयार हो रहे मशरूम सेहत के लिए खतरा बन रहे हैं। दैनिक भास्कर इन्वेस्टिगेशन में। बिहार के बाजार में दो तरह के मशरूम बिक रहे हैं। एकदम सफेद और दूसरा गंदा दिखने वाला। इसी अंतर ने हमारी पड़ताल शुरू की। पता चला कि मशरूम को ज्यादा सफेद और लंबे समय तक ताजा दिखाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसकी पड़ताल के लिए हम बिहार की गया मंडी में व्यपारी बनकर पहुंचे, जहां से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों तक मशरूम की सप्लाई होती है। यहां हमारी मुलाकात गुलशन से हुई। एकदम सफेद मशरूम चाहिए, तो केमिकल वाला ले जाइए। केमिकल लगाने के बाद मशरूम दो से तीन दिन तक खराब नहीं होगा। हम दो तरह के केमिकल फार्मोलिन और पोटैशियम मेटाबाइसल्फाइट का इस्तेमाल करते हैं। आप बेफिक्र होकर ले जाइए। रिपोर्टर – मुझे मशरूम चाहिए, कहां मिलेगा? गुलशन – सबसे बड़ा सप्लायर तो मैं ही हूं। आपको कितना चाहिए, बताइए? रिपोर्टर – मुझे रोज चाहिए। गुलशन – कितना? रिपोर्टर – तीन क्विंटल रोज। गुलशन – मिल जाएगा। रिपोर्टर – रेट क्या होगा? गुलशन – 200 रुपये किलो लगेगा। लेकिन मैं आपको दिल्ली के सप्लायर से संपर्क करा देता हूं। वहां आपको सस्ता मिल जाएगा। मैं आपको ऐसा मशरूम दूंगा, जो बिल्कुल ताजा दिखेगा। मेरे पास दो तरह का मशरूम है। एक थोड़ा कम सफेद और दूसरा एकदम सफेद। आपको कौन-सा चाहिए, बताइए? रिपोर्टर – दोनों में क्या अंतर है? गुलशन – एकदम उजला वाला ले जाइए आप। वो केमिकल वाला होता है। लंबे समय तक चलेगा वह। आप बिंदास होकर ले जाइए। केमिकल लगाने के बाद बिना किसी दिक्कत के कई दिनों तक रह जाएगा। बिना केमिकल वाला टिकता नहीं है। वह थोड़ा उदास हो जाता है। रिपोर्टर – आप लोग जो केमिकल देते हैं, वह पकड़ा नहीं जाएगा ना? गुलशन – नहीं, नहीं, पकड़ में आएगा। मैं पैकेट बनाकर दूंगा। आप आराम से ले जाइए। 150 ग्राम का पैकेट मिलेगा। मशरूम को धोने के लिए थोड़ा-सा केमिकल लगता है। पता ही नहीं चल पाएगा। अब हम लोग दिल्ली से मंगाते हैं। इसके बाद बंगाल और रांची भेजते हैं। थोड़ा समय लगता है। ऐसे में केमिकल लगने के बाद मशरूम कई दिनों तक ताजा रहता है। आप विश्वास कीजिए, केमिकल का पता किसी को नहीं चल पाएगा। लोकल में हम लोग पहले दिन बिना केमिकल वाले देते हैं। जो बच जाता है, उसमें केमिकल डाल देते हैं। उसके बाद मशरूम एकदम वाइट हो जाता है। आपको कहां ले जाना है? रिपोर्टर – आप कितना दे सकते हैं? गुलशन – आप जितना बोलिए, उतना दे दूंगा। आपको दिल्ली वाले का नंबर दे रहा हूं, मुझे कमीशन मिल जाएगा। आपके पास सामान डायरेक्ट चला जाएगा। रिपोर्टर – केमिकल कहां मिलेगा, कौन-कौन से केमिकल होते हैं? गुलशन – दो तरह के केमिकल होते हैं। पहला 250 से 600 का है, दूसरा 150 के आस पास आता है। दोनों को मिलाकर लगा दिया जाएगा। मशरूम ताजा भी होगा और लंबे समय तक चलेगा भी। आप बस डील फाइनल करें, बाकी आपको सब कुछ मैं दे दूंगा। गुलशन – चलिए, पहले सामान देख लीजिए। उसके बाद जितना चाहिए, ले लीजिएगा। रिपोर्टर – केमिकल मशरूम में कैसे मिलाया जाता है, यह करके दिखा दीजिए। गुलशन – चलिए, मैं आपको काम के आदमी से मिलवा देता हूं। रिपोर्टर – केमिकल दो तरह का होता है न? गुलशन – हां, मैं आपको खरीदकर दे दूंगा। इसके बाद गुलशन ने एक खुला हुआ केमिकल दिखाया। वहीं, दूसरे केमिकल को खरीदकर लाया और हमें दे दिया। गुलशन ने बताया कि आप खुद से कर सकते हैं। चलिए, एक जगह ले चल रहा हूं, जहां केमिकल डालने का तरीका दिखा दूंगा। बंगाल में आपको कहां-कहां माल चाहिए, बताइए। रिपोर्टर – कोलकाता और सिलीगुड़ी। गुलशन – ठीक है। रिपोर्टर – चलिए, हमें मशरूम दिखा दीजिए। गुलशन – ठीक है, चलिए। मैं आपको उस दुकान पर ले चलता हूं, जहां हम लोग मशरूम की सप्लाई करते हैं। गुलशन ने बिक्रम का भी जिक्र किया । उसने बताया कि एक बार बिक्रम से भी बात कर लीजिए। विक्रम सबसे अच्छा कारोबारी है। वह केमिकल से लेकर मशरूम तक, सब कुछ आपको दे देगा। दिल्ली में बैठकर वह पूरे नेटवर्क को चलाता है। आप उस पर भरोसा करके उसका माल ले जाइए। हमें अपना कमीशन मिल जाएगा। रिपोर्टर – ठीक है। गुलशन हमें होलसेलर के पास ले गया। हम रोमी के पास पहुंचे, तो वह हमें अपनी एक दुकान पर ले गया। वहां पहले से दो टब रखे हुए थे। उनमें दो तरह के मशरूम थे। एक बिल्कुल सफेद और दूसरा काला-काला दिख रहा था। रोमी ने बताया कि सफेद वाला मशरूम केमिकल से धोया हुआ है, जबकि काले धब्बों वाला मशरूम सीधे फार्म से आता है। हमने रोमी से मशरूम साफ करने का तरीका दिखाने को कहा। पहले तो उसने मना कर दिया और कहा कि सारे मशरूम साफ हो चुके हैं। लेकिन जब हमने दोबारा रिक्वेस्ट की, तो उसने बताया कि देखिए, यही केमिकल है। इसमें से थोड़ा-सा डालने के बाद मशरूम बिल्कुल सफेद हो जाएगा। उसने दावा किया कि एक और केमिकल होता है, जिसे उसने हमें दूसरी दुकान पर दिखाया था। उसका भी इस्तेमाल किया जाता है, जिससे मशरूम ताजा और चमकीले दिखने लगते हैं। इतना बताने के बाद रोमी ने मशरूम को केमिकल से भरे टब में डाल दिया। कुछ देर तक उसमें छोड़ने के बाद उसने मशरूम निकाले और दूसरे केमिकल वाले टब में डाल दिया। उसने हमें करीब दो मिनट इंतजार करने को कहा। इसके बाद जब मशरूम टब से निकाले गए, तो वे पहले की तुलना में बिल्कुल साफ और सफेद दिखाई देने लगे। रोमी से हमें बाजार के एक फुटकर विक्रेता शंकर प्रसाद के बारे में पता चला। हम शंकर की दुकान पर पहुंचे और मशरूम खरीदने की बात कही। शंकर ने बताया कि मेरे पास दो तरह के मशरूम हैं। एक धुला हुआ और दूसरा बिना धुला हुआ। धुला हुआ मशरूम थोड़ा महंगा है, जबकि बिना धुला हुआ मशरूम सस्ता है। रिपोर्टर – मशरूम को क्यों धोते हैं? शंकर – थोड़ा चमक आ जाती है और मशरूम लंबे समय तक चलता है। इसके साथ ही वजन भी बढ़ जाता है। रिपोर्टर – किस चीज से धोते हैं? शंकर – पानी से धोते हैं। रिपोर्टर – इसमें कौन-सा केमिकल डालते हैं? शंकर – इसमें कोई केमिकल नहीं पड़ता है। रिपोर्टर – मुझे पता है कि केमिकल के बिना ऐसी चमक नहीं आएगी। मैं थोक व्यापारी हूं। मुझे रोज एक क्विंटल मशरूम चाहिए। शंकर – ठीक है, जब आप सब कुछ जानते हैं तो आपको मिल जाएगा। मैं आपको धुला हुआ मशरूम दे दूंगा। रिपोर्टर – आपका यह मशरूम पुराना हो चुका है और इसकी चमक भी जा चुकी है। शंकर – हां, यह दो दिन पुराना है। मैं आपको ताजा और चमकता हुआ मशरूम दे दूंगा। रिपोर्टर – धोकर दिखा दीजिए। शंकर – जितना धोना था, धोकर रख दिया है। अभी मेरे पास पानी और केमिकल नहीं है। कल आप आइए, मैं केमिकल लाकर आपके सामने मशरूम धोकर दे दूंगा। रिपोर्टर – किस केमिकल से धोते हैं? शंकर – अरे, उस बात को छोड़िए। किस केमिकल से धोते हैं… रिपोर्टर – कितने रुपये का मिलता है केमिकल? शंकर – 168 रुपये का 500 ml मिलता है। शंकर के पास ही हमें एसएन मशरूम सेंटर के बारे में पता चला। इसके बाद हम एसएन मशरूम सेंटर पहुंचे। वहां मशरूम का भाव 200 रुपये किलो बताया गया। हम थोक व्यापारी बनकर दुकानदार से मिले। इसके बाद काउंटर पर बैठे व्यक्ति ने बताया कि वह हमें 170 रुपये किलो में धुला हुआ मशरूम दे देगा। हमने मशरूम धोकर दिखाने की बात कही, तो दुकानदार एसएन प्रसाद ने बताया कि अभी उसके पास दो टब नहीं हैं। एक ही टब है, इसलिए वह एक ही केमिकल से मशरूम धोकर देगा। रिपोर्टर – चमक जाएगा न? एसएन प्रसाद – हां, बिल्कुल चमाचम हो जाएगा। इसकी लाइफ भी बढ़ जाती है। (इसके बाद दुकानदार ने दुकान से एक केमिकल निकाला और उसका एक ढक्कन पानी में डाल दिया। एसएन प्रसाद ने बताया कि मशरूम को दो टब के पानी में धोया जाता है, लेकिन अभी उसके पास एक ही टब है। इसलिए वह एक ही पानी से धो रहा है। उसने बताया कि एक टब पानी में एक ढक्कन केमिकल डालना होता है। इसके बाद मशरूम सफेद हो जाएगा। उसने कहा, आप सामने देखिए, कैसे मशरूम सफेद हो जाता है।) एसएन प्रसाद ने टब में केमिकल डाला इसके बाद मशरूम को करीब दो मिनट तक केमिकल मिले पानी में रखा । फिर उसे बाहर निकाला । बाहर निकलते ही मशरूम पहले की तुलना में ज्यादा सफेद और चमकदार दिखाई देने लगा। दुकानदार ने उसे हमारे हाथों में दे दिया। जब हमने दुकानदार से इस्तेमाल किए जा रहे केमिकल के बारे में जानकारी लेनी चाही, तो उसे हम पर शक होने लगा। एसएन प्रसाद – मुझे आप पर शक हो रहा है। कहीं आप तहकीकात तो नहीं कर रहे हैं? हम लोग ज्यादा धोकर मशरूम नहीं भेजते हैं। जैसी डिमांड आती है, उसी हिसाब से धोकर देते हैं। आप बहुत ज्यादा तहकीकात कर रहे हैं। अब मुझे डर लग रहा है। गुलशन से ही हमें दिल्ली में बैठे बड़े व्यापारी बिक्रम के बारे में पता चला। जिसके बाद हमारी बात बिक्रम से हुई। बिक्रम बिहार में कहीं भी मशरूम की सप्लाई करने के लिए तैयार हो गया। उसने भरोसा दिलाया कि जितनी मात्रा में मशरूम चाहिए, बिहार के किसी भी कोने में दूध जैसे साफ और चमकदार मशरूम पहुंचा देगा। बिक्रम – जितना चाहिए, उतना दे दूंगा। आपको बिहार, झारखंड और बंगाल में जहां भी चाहिए, वहां माल तैयार मिलेगा। एकदम उजला वाला मशरूम दूंगा। रिपोर्टर – हमें रोज तीन क्विंटल तक मशरूम चाहिए। इतनी मात्रा रोज दे पाएंगे? बिक्रम – हां, मिल जाएगा। आप बस बताइए, कहां देना है। रिपोर्टर – लेकिन हमें ऐसा मशरूम चाहिए, जो देखने में एकदम सफेद हो और दो-तीन दिन तक खराब भी न हो। बिक्रम – वैसा ही माल मिलेगा। एकदम सफेद और लंबे समय तक चलने वाला। रिपोर्टर – इसके लिए कुछ मिलाना तो नहीं पड़ेगा? बाजार में बिना केमिकल वाला मशरूम भी मिलता है। बिक्रम – आप बार-बार केमिकल के बारे में क्यों पूछ रहे हैं? आपको सब तैयार मिलेगा, एकदम केमिकल से धुला हुआ। इससे मशरूम ज्यादा उजला दिखेगा और लंबे समय तक रहेगा। रिपोर्टर – यानी मशरूम को केमिकल से धोकर ही देंगे? रिपोर्टर – गया में हमने देखा कि लोग मशरूम को फॉर्मेलिन और दूसरे केमिकल से धो रहे थे। क्या आप भी ऐसा ही माल देंगे? बिक्रम – हां, आपको जैसा माल चाहिए, वैसा मिल जाएगा। रिपोर्टर – हमें धुला हुआ माल ही चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि मशरूम आने के बाद हमें खुद केमिकल ढूंढना पड़े और उसे धोना पड़े। बिक्रम – आप बताइए कि आपको किस तरह की पैकिंग चाहिए। पैनेट में चाहिए तो पैनेट में मिल जाएगा। 200-200 ग्राम के पैकेट चाहिए, तो वो भी मिल जाएंगे। रिपोर्टर – पैकिंग की बात अलग है। हमें धुला हुआ मशरूम चाहिए। आप फॉर्मेलिन से धोकर ही देंगे न? बिक्रम – प्लांट से जो माल उठता है, उसी के हिसाब से मिलेगा। आप चाहें तो प्लांट पर जाकर देख भी सकते हैं। रिपोर्टर – हमें खेती या फसल से मतलब नहीं है। हमें एकदम सफेद, चमकदार और धुला हुआ माल चाहिए। बिक्रम – माल देने से पहले आपको उसकी फोटो भेज दी जाएगी। आप फोटो देखकर ऑर्डर कर सकते हैं। आपको जैसा माल चाहिए, वैसा मिल जाएगा। अगर आपको फॉर्मेलिन से धुला हुआ माल चाहिए, तो उसी हिसाब से बात कर लेंगे। रिपोर्टर – ठीक है। लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए कि माल आने के बाद हमें खुद उसे धोना पड़े या केमिकल की व्यवस्था करनी पड़े। आप केमिकल की फोटो भी भेज दीजिएगा। बिक्रम – केमिकल की फोटो मिल जाएगी। जो फोटो भेजी जाएगी, उसी हिसाब से माल रहेगा। रिपोर्टर – एक बात बताइए। केमिकल से धुले हुए मशरूम खाने से नुकसान तो नहीं होगा? बिक्रम – ज्यादा केमिकल हो जाए, तो नुकसान हो सकता है। लेकिन हमारे यहां माल में हल्का केमिकल रहेगा। माल साफ भी रहेगा। रिपोर्टर – हमें यही समझना है कि मशरूम फॉर्मेलिन से साफ किया हुआ मिलेगा न? बिक्रम – हां, आपको साफ माल मिलेगा। अगर माल को लेकर कोई शिकायत होगी, तो हम बात करेंगे। रिपोर्टर – अच्छा, एक और बात। अगर हम इस तरह के केमिकल से मशरूम धुलवाते हैं, तो FSSAI की तरफ से कोई परेशानी तो नहीं होगी? बिक्रम – नहीं, नहीं। ऐसा पूरे देश में होता है। आप आराम से मेरे साथ काम किजिए । 15 साल से कर रहा हूु अभी तक कोई परेशानी नहीं हुई । गया में प्रतिदिन 500 टन मशरूम का उत्पादन होता है। जिले के वजीरगंज, कोंच, मानपुर, बोधगया और इमामगंज में सबसे ज्यादा मशरूम का उत्पादन होता है। गया में बटन, ऑयस्टर और पिंक ऑयस्टर मशरूम की खेती की जाती है। यहां उत्पादित मशरूम की सप्लाई झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के बाजारों में भी की जाती है। इसके अलावा, दिल्ली से भी बड़े पैमाने पर मशरूम का निर्यात होता है।- तबस्सुम परवीन, जिला उद्यान पदाधिकारी, गया जिस मशरूम को मांस और पनीर के प्रोटीन का विकल्प मानकर सेहत बनाने के लिए खाने में लिया जा रहा है। उस मशरूम को डेड बॉडी को सुरक्षित करने वाले केमिकल से तैयार किया जा रहा है। मशरूम को सफेद और लंबे समय तक ताजा दिखाने के लिए इन घातक केमिकल्स फार्मोलिन और पोटैशियम मेटाबाइसल्फाइट का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन्हें लगाने के बाद मशरूम लंबे समय तक ताजा रहता है। यह खेल बिहार की सबसे बड़ी मंडी गया में चल रहा है। सवाल है कि जिस मशरूम को लोग सेहत बनाने के लिए खा रहे हैं, क्या वह उनके लिए सुरक्षित है? इस नकली खेल की सच्चाई क्या है और कैसे पहचानें अपनी थाली का सही और सुरक्षित मशरूम? देखिए और पढ़िए, कैसे केमिकल से तैयार हो रहे मशरूम सेहत के लिए खतरा बन रहे हैं। दैनिक भास्कर इन्वेस्टिगेशन में। बिहार के बाजार में दो तरह के मशरूम बिक रहे हैं। एकदम सफेद और दूसरा गंदा दिखने वाला। इसी अंतर ने हमारी पड़ताल शुरू की। पता चला कि मशरूम को ज्यादा सफेद और लंबे समय तक ताजा दिखाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसकी पड़ताल के लिए हम बिहार की गया मंडी में व्यपारी बनकर पहुंचे, जहां से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों तक मशरूम की सप्लाई होती है। यहां हमारी मुलाकात गुलशन से हुई। एकदम सफेद मशरूम चाहिए, तो केमिकल वाला ले जाइए। केमिकल लगाने के बाद मशरूम दो से तीन दिन तक खराब नहीं होगा। हम दो तरह के केमिकल फार्मोलिन और पोटैशियम मेटाबाइसल्फाइट का इस्तेमाल करते हैं। आप बेफिक्र होकर ले जाइए। रिपोर्टर – मुझे मशरूम चाहिए, कहां मिलेगा? गुलशन – सबसे बड़ा सप्लायर तो मैं ही हूं। आपको कितना चाहिए, बताइए? रिपोर्टर – मुझे रोज चाहिए। गुलशन – कितना? रिपोर्टर – तीन क्विंटल रोज। गुलशन – मिल जाएगा। रिपोर्टर – रेट क्या होगा? गुलशन – 200 रुपये किलो लगेगा। लेकिन मैं आपको दिल्ली के सप्लायर से संपर्क करा देता हूं। वहां आपको सस्ता मिल जाएगा। मैं आपको ऐसा मशरूम दूंगा, जो बिल्कुल ताजा दिखेगा। मेरे पास दो तरह का मशरूम है। एक थोड़ा कम सफेद और दूसरा एकदम सफेद। आपको कौन-सा चाहिए, बताइए? रिपोर्टर – दोनों में क्या अंतर है? गुलशन – एकदम उजला वाला ले जाइए आप। वो केमिकल वाला होता है। लंबे समय तक चलेगा वह। आप बिंदास होकर ले जाइए। केमिकल लगाने के बाद बिना किसी दिक्कत के कई दिनों तक रह जाएगा। बिना केमिकल वाला टिकता नहीं है। वह थोड़ा उदास हो जाता है। रिपोर्टर – आप लोग जो केमिकल देते हैं, वह पकड़ा नहीं जाएगा ना? गुलशन – नहीं, नहीं, पकड़ में आएगा। मैं पैकेट बनाकर दूंगा। आप आराम से ले जाइए। 150 ग्राम का पैकेट मिलेगा। मशरूम को धोने के लिए थोड़ा-सा केमिकल लगता है। पता ही नहीं चल पाएगा। अब हम लोग दिल्ली से मंगाते हैं। इसके बाद बंगाल और रांची भेजते हैं। थोड़ा समय लगता है। ऐसे में केमिकल लगने के बाद मशरूम कई दिनों तक ताजा रहता है। आप विश्वास कीजिए, केमिकल का पता किसी को नहीं चल पाएगा। लोकल में हम लोग पहले दिन बिना केमिकल वाले देते हैं। जो बच जाता है, उसमें केमिकल डाल देते हैं। उसके बाद मशरूम एकदम वाइट हो जाता है। आपको कहां ले जाना है? रिपोर्टर – आप कितना दे सकते हैं? गुलशन – आप जितना बोलिए, उतना दे दूंगा। आपको दिल्ली वाले का नंबर दे रहा हूं, मुझे कमीशन मिल जाएगा। आपके पास सामान डायरेक्ट चला जाएगा। रिपोर्टर – केमिकल कहां मिलेगा, कौन-कौन से केमिकल होते हैं? गुलशन – दो तरह के केमिकल होते हैं। पहला 250 से 600 का है, दूसरा 150 के आस पास आता है। दोनों को मिलाकर लगा दिया जाएगा। मशरूम ताजा भी होगा और लंबे समय तक चलेगा भी। आप बस डील फाइनल करें, बाकी आपको सब कुछ मैं दे दूंगा। गुलशन – चलिए, पहले सामान देख लीजिए। उसके बाद जितना चाहिए, ले लीजिएगा। रिपोर्टर – केमिकल मशरूम में कैसे मिलाया जाता है, यह करके दिखा दीजिए। गुलशन – चलिए, मैं आपको काम के आदमी से मिलवा देता हूं। रिपोर्टर – केमिकल दो तरह का होता है न? गुलशन – हां, मैं आपको खरीदकर दे दूंगा। इसके बाद गुलशन ने एक खुला हुआ केमिकल दिखाया। वहीं, दूसरे केमिकल को खरीदकर लाया और हमें दे दिया। गुलशन ने बताया कि आप खुद से कर सकते हैं। चलिए, एक जगह ले चल रहा हूं, जहां केमिकल डालने का तरीका दिखा दूंगा। बंगाल में आपको कहां-कहां माल चाहिए, बताइए। रिपोर्टर – कोलकाता और सिलीगुड़ी। गुलशन – ठीक है। रिपोर्टर – चलिए, हमें मशरूम दिखा दीजिए। गुलशन – ठीक है, चलिए। मैं आपको उस दुकान पर ले चलता हूं, जहां हम लोग मशरूम की सप्लाई करते हैं। गुलशन ने बिक्रम का भी जिक्र किया । उसने बताया कि एक बार बिक्रम से भी बात कर लीजिए। विक्रम सबसे अच्छा कारोबारी है। वह केमिकल से लेकर मशरूम तक, सब कुछ आपको दे देगा। दिल्ली में बैठकर वह पूरे नेटवर्क को चलाता है। आप उस पर भरोसा करके उसका माल ले जाइए। हमें अपना कमीशन मिल जाएगा। रिपोर्टर – ठीक है। गुलशन हमें होलसेलर के पास ले गया। हम रोमी के पास पहुंचे, तो वह हमें अपनी एक दुकान पर ले गया। वहां पहले से दो टब रखे हुए थे। उनमें दो तरह के मशरूम थे। एक बिल्कुल सफेद और दूसरा काला-काला दिख रहा था। रोमी ने बताया कि सफेद वाला मशरूम केमिकल से धोया हुआ है, जबकि काले धब्बों वाला मशरूम सीधे फार्म से आता है। हमने रोमी से मशरूम साफ करने का तरीका दिखाने को कहा। पहले तो उसने मना कर दिया और कहा कि सारे मशरूम साफ हो चुके हैं। लेकिन जब हमने दोबारा रिक्वेस्ट की, तो उसने बताया कि देखिए, यही केमिकल है। इसमें से थोड़ा-सा डालने के बाद मशरूम बिल्कुल सफेद हो जाएगा। उसने दावा किया कि एक और केमिकल होता है, जिसे उसने हमें दूसरी दुकान पर दिखाया था। उसका भी इस्तेमाल किया जाता है, जिससे मशरूम ताजा और चमकीले दिखने लगते हैं। इतना बताने के बाद रोमी ने मशरूम को केमिकल से भरे टब में डाल दिया। कुछ देर तक उसमें छोड़ने के बाद उसने मशरूम निकाले और दूसरे केमिकल वाले टब में डाल दिया। उसने हमें करीब दो मिनट इंतजार करने को कहा। इसके बाद जब मशरूम टब से निकाले गए, तो वे पहले की तुलना में बिल्कुल साफ और सफेद दिखाई देने लगे। रोमी से हमें बाजार के एक फुटकर विक्रेता शंकर प्रसाद के बारे में पता चला। हम शंकर की दुकान पर पहुंचे और मशरूम खरीदने की बात कही। शंकर ने बताया कि मेरे पास दो तरह के मशरूम हैं। एक धुला हुआ और दूसरा बिना धुला हुआ। धुला हुआ मशरूम थोड़ा महंगा है, जबकि बिना धुला हुआ मशरूम सस्ता है। रिपोर्टर – मशरूम को क्यों धोते हैं? शंकर – थोड़ा चमक आ जाती है और मशरूम लंबे समय तक चलता है। इसके साथ ही वजन भी बढ़ जाता है। रिपोर्टर – किस चीज से धोते हैं? शंकर – पानी से धोते हैं। रिपोर्टर – इसमें कौन-सा केमिकल डालते हैं? शंकर – इसमें कोई केमिकल नहीं पड़ता है। रिपोर्टर – मुझे पता है कि केमिकल के बिना ऐसी चमक नहीं आएगी। मैं थोक व्यापारी हूं। मुझे रोज एक क्विंटल मशरूम चाहिए। शंकर – ठीक है, जब आप सब कुछ जानते हैं तो आपको मिल जाएगा। मैं आपको धुला हुआ मशरूम दे दूंगा। रिपोर्टर – आपका यह मशरूम पुराना हो चुका है और इसकी चमक भी जा चुकी है। शंकर – हां, यह दो दिन पुराना है। मैं आपको ताजा और चमकता हुआ मशरूम दे दूंगा। रिपोर्टर – धोकर दिखा दीजिए। शंकर – जितना धोना था, धोकर रख दिया है। अभी मेरे पास पानी और केमिकल नहीं है। कल आप आइए, मैं केमिकल लाकर आपके सामने मशरूम धोकर दे दूंगा। रिपोर्टर – किस केमिकल से धोते हैं? शंकर – अरे, उस बात को छोड़िए। किस केमिकल से धोते हैं… रिपोर्टर – कितने रुपये का मिलता है केमिकल? शंकर – 168 रुपये का 500 ml मिलता है। शंकर के पास ही हमें एसएन मशरूम सेंटर के बारे में पता चला। इसके बाद हम एसएन मशरूम सेंटर पहुंचे। वहां मशरूम का भाव 200 रुपये किलो बताया गया। हम थोक व्यापारी बनकर दुकानदार से मिले। इसके बाद काउंटर पर बैठे व्यक्ति ने बताया कि वह हमें 170 रुपये किलो में धुला हुआ मशरूम दे देगा। हमने मशरूम धोकर दिखाने की बात कही, तो दुकानदार एसएन प्रसाद ने बताया कि अभी उसके पास दो टब नहीं हैं। एक ही टब है, इसलिए वह एक ही केमिकल से मशरूम धोकर देगा। रिपोर्टर – चमक जाएगा न? एसएन प्रसाद – हां, बिल्कुल चमाचम हो जाएगा। इसकी लाइफ भी बढ़ जाती है। (इसके बाद दुकानदार ने दुकान से एक केमिकल निकाला और उसका एक ढक्कन पानी में डाल दिया। एसएन प्रसाद ने बताया कि मशरूम को दो टब के पानी में धोया जाता है, लेकिन अभी उसके पास एक ही टब है। इसलिए वह एक ही पानी से धो रहा है। उसने बताया कि एक टब पानी में एक ढक्कन केमिकल डालना होता है। इसके बाद मशरूम सफेद हो जाएगा। उसने कहा, आप सामने देखिए, कैसे मशरूम सफेद हो जाता है।) एसएन प्रसाद ने टब में केमिकल डाला इसके बाद मशरूम को करीब दो मिनट तक केमिकल मिले पानी में रखा । फिर उसे बाहर निकाला । बाहर निकलते ही मशरूम पहले की तुलना में ज्यादा सफेद और चमकदार दिखाई देने लगा। दुकानदार ने उसे हमारे हाथों में दे दिया। जब हमने दुकानदार से इस्तेमाल किए जा रहे केमिकल के बारे में जानकारी लेनी चाही, तो उसे हम पर शक होने लगा। एसएन प्रसाद – मुझे आप पर शक हो रहा है। कहीं आप तहकीकात तो नहीं कर रहे हैं? हम लोग ज्यादा धोकर मशरूम नहीं भेजते हैं। जैसी डिमांड आती है, उसी हिसाब से धोकर देते हैं। आप बहुत ज्यादा तहकीकात कर रहे हैं। अब मुझे डर लग रहा है। गुलशन से ही हमें दिल्ली में बैठे बड़े व्यापारी बिक्रम के बारे में पता चला। जिसके बाद हमारी बात बिक्रम से हुई। बिक्रम बिहार में कहीं भी मशरूम की सप्लाई करने के लिए तैयार हो गया। उसने भरोसा दिलाया कि जितनी मात्रा में मशरूम चाहिए, बिहार के किसी भी कोने में दूध जैसे साफ और चमकदार मशरूम पहुंचा देगा। बिक्रम – जितना चाहिए, उतना दे दूंगा। आपको बिहार, झारखंड और बंगाल में जहां भी चाहिए, वहां माल तैयार मिलेगा। एकदम उजला वाला मशरूम दूंगा। रिपोर्टर – हमें रोज तीन क्विंटल तक मशरूम चाहिए। इतनी मात्रा रोज दे पाएंगे? बिक्रम – हां, मिल जाएगा। आप बस बताइए, कहां देना है। रिपोर्टर – लेकिन हमें ऐसा मशरूम चाहिए, जो देखने में एकदम सफेद हो और दो-तीन दिन तक खराब भी न हो। बिक्रम – वैसा ही माल मिलेगा। एकदम सफेद और लंबे समय तक चलने वाला। रिपोर्टर – इसके लिए कुछ मिलाना तो नहीं पड़ेगा? बाजार में बिना केमिकल वाला मशरूम भी मिलता है। बिक्रम – आप बार-बार केमिकल के बारे में क्यों पूछ रहे हैं? आपको सब तैयार मिलेगा, एकदम केमिकल से धुला हुआ। इससे मशरूम ज्यादा उजला दिखेगा और लंबे समय तक रहेगा। रिपोर्टर – यानी मशरूम को केमिकल से धोकर ही देंगे? रिपोर्टर – गया में हमने देखा कि लोग मशरूम को फॉर्मेलिन और दूसरे केमिकल से धो रहे थे। क्या आप भी ऐसा ही माल देंगे? बिक्रम – हां, आपको जैसा माल चाहिए, वैसा मिल जाएगा। रिपोर्टर – हमें धुला हुआ माल ही चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि मशरूम आने के बाद हमें खुद केमिकल ढूंढना पड़े और उसे धोना पड़े। बिक्रम – आप बताइए कि आपको किस तरह की पैकिंग चाहिए। पैनेट में चाहिए तो पैनेट में मिल जाएगा। 200-200 ग्राम के पैकेट चाहिए, तो वो भी मिल जाएंगे। रिपोर्टर – पैकिंग की बात अलग है। हमें धुला हुआ मशरूम चाहिए। आप फॉर्मेलिन से धोकर ही देंगे न? बिक्रम – प्लांट से जो माल उठता है, उसी के हिसाब से मिलेगा। आप चाहें तो प्लांट पर जाकर देख भी सकते हैं। रिपोर्टर – हमें खेती या फसल से मतलब नहीं है। हमें एकदम सफेद, चमकदार और धुला हुआ माल चाहिए। बिक्रम – माल देने से पहले आपको उसकी फोटो भेज दी जाएगी। आप फोटो देखकर ऑर्डर कर सकते हैं। आपको जैसा माल चाहिए, वैसा मिल जाएगा। अगर आपको फॉर्मेलिन से धुला हुआ माल चाहिए, तो उसी हिसाब से बात कर लेंगे। रिपोर्टर – ठीक है। लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए कि माल आने के बाद हमें खुद उसे धोना पड़े या केमिकल की व्यवस्था करनी पड़े। आप केमिकल की फोटो भी भेज दीजिएगा। बिक्रम – केमिकल की फोटो मिल जाएगी। जो फोटो भेजी जाएगी, उसी हिसाब से माल रहेगा। रिपोर्टर – एक बात बताइए। केमिकल से धुले हुए मशरूम खाने से नुकसान तो नहीं होगा? बिक्रम – ज्यादा केमिकल हो जाए, तो नुकसान हो सकता है। लेकिन हमारे यहां माल में हल्का केमिकल रहेगा। माल साफ भी रहेगा। रिपोर्टर – हमें यही समझना है कि मशरूम फॉर्मेलिन से साफ किया हुआ मिलेगा न? बिक्रम – हां, आपको साफ माल मिलेगा। अगर माल को लेकर कोई शिकायत होगी, तो हम बात करेंगे। रिपोर्टर – अच्छा, एक और बात। अगर हम इस तरह के केमिकल से मशरूम धुलवाते हैं, तो FSSAI की तरफ से कोई परेशानी तो नहीं होगी? बिक्रम – नहीं, नहीं। ऐसा पूरे देश में होता है। आप आराम से मेरे साथ काम किजिए । 15 साल से कर रहा हूु अभी तक कोई परेशानी नहीं हुई । गया में प्रतिदिन 500 टन मशरूम का उत्पादन होता है। जिले के वजीरगंज, कोंच, मानपुर, बोधगया और इमामगंज में सबसे ज्यादा मशरूम का उत्पादन होता है। गया में बटन, ऑयस्टर और पिंक ऑयस्टर मशरूम की खेती की जाती है। यहां उत्पादित मशरूम की सप्लाई झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के बाजारों में भी की जाती है। इसके अलावा, दिल्ली से भी बड़े पैमाने पर मशरूम का निर्यात होता है।- तबस्सुम परवीन, जिला उद्यान पदाधिकारी, गया  

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