राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने कहा है कि सरफेसी अधिनियम की धारा-14 के तहत कर्जदार की संपत्ति का भौतिक कब्जा दिलाने के लिए तैनात पुलिस का शुल्क बैंक या वित्तीय संस्थानों से नहीं लिया जाएगा। जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की खंडपीठ ने एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक लिमिटेड की अपीलें स्वीकार कीं। कोर्ट ने एकलपीठ का वह आदेश रद्द कर दिया, जिसमें राजस्थान पुलिस नियम, 2008 के नियम 10 के तहत पुलिस शुल्क लेने की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि संपत्ति का कब्जा दिलाना निजी सेवा नहीं, बल्कि वैधानिक आदेश लागू करना है। यह राज्य के संप्रभु कर्तव्यों का हिस्सा है। राजस्थान पुलिस अधिनियम, 2007 की धारा 46 के तहत व्यावसायिक आयोजनों या निजी कार्यक्रमों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने पर शुल्क लिया जा सकता है। लेकिन किसी विशेष कानून के तहत वैधानिक आदेश लागू करने पर यह नियम लागू नहीं होगा। इस फैसले से बैंकों को एनपीए वसूली और संपत्तियों का कब्जा लेने में राहत मिलेगी।

