तीतरड़ी स्थित अंबामाता घाटी की पहाड़ियों पर चल रही अवैध कटाई को लेकर दैनिक भास्कर में खबर प्रकाशित होने के बाद बुधवार को उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) का प्रशासनिक अमला आखिरकार नींद से जाग तो गया, लेकिन मौके पर महज खानापूर्ति और दिखावटी कार्रवाई कर लौट गया। बुधवार को यूडीए पटवारी रोहित अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और जेसीबी मशीनों से लगातार की जा रही पहाड़ियों की अवैध कटाई को रुकवाया। टीम ने मौके का मुआयना कर मौका रिपोर्ट तैयार की और लौट गई। अब यूडीए के अधिकारी यह नहीं बता पा रहे कि आखिरकार कौन रसूखदार इन पहाड़ियों का सीना छलनी कर रहे हैं। यूडीए सचिव राजपाल सिंह का कहना है कि वे फिलहाल चुनाव ड्यूटी में व्यस्त हैं, जिसके कारण इस मामले को बारीकी से नहीं देख पाए हैं। तहसीलदार को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दे दिए गए। तहसीलदार जब्बरदान चारण ने कहा कि वे कोटड़ा में चुनाव ड्यूटी पर तैनात हैं, इसलिए उन्हें अभी तक इस पूरे मामले की कोई जानकारी ही नहीं है। अधिकारियों के इस टालमटोल रवैये और मशीनों को रुकवाने जैसी आधी-अधूरी कार्रवाई से स्थानीय निवासियों और पर्यावरणविदों में भारी रोष है। पूर्व सीएम ने भी उठाया मुद्दा, क्षेत्रवासी बोले- सख्त कार्रवाई हो दैनिक भास्कर में खबर प्रकाशित होने के बाद प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसे लेकर प्रदेश की भाजपा सरकार पर सियासी हमला बोला। गहलोत ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए राज्य सरकार व यूडीए की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने लिखा कि यह सीधे तौर पर यह अरावली पर हमला है, जहां अवैध अवैध पेड़ कटाई से अरावली को खोखला किया जा रहा है और यूडीए के अफसर पूरी तरह चुप बैठे हैं। प्रदेश में अवैध खनन अपनी पराकाष्ठा पर पहुंच चुका है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि अगर समय रहते पहाड़ियों की अवैध कटाई करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम नहीं उठाए गए तो शहर की प्राकृतिक धरोहर और पारिस्थितिक संतुलन को क्षति पहुंचेगी, जिसका जिम्मेदार कौन होगा?

