रबी की फसलों की बिजाई शुरू होते ही खेतों में किसानों की व्यस्तता बढ़ गई है। केवीएसएस, जीएसएस और प्राइवेट डीलरों की दुकानों पर उर्वरक लेने के लिए किसानों की लंबी कतारें लग रही हैं। प्रशासन द्वारा टैगिंग और कालाबाजारी रोकने के तमाम दावों के बावजूद जमीनी हकीकत कुछ अलग ही बयान कर रही है। जिले की अधिकांश केवीएसएस और जीएसएस से उर्वरकों की डिमांड ही नहीं ली जा रही है, वहीं दूसरी ओर खाद के साथ जबरन सामान थमाने (टैगिंग) के वीडियो वायरल हो रहे हैं। जिले की करीब 54 सोसायटियों के लिए 23 अक्टूबर को 3168.540 मीट्रिक टन (70,412 बैग) यूरिया का आवंटन हुआ था। इसमें से केवल 35 केवीएसएस-जीएसएस को 2387.340 मीट्रिक टन (53,052 बैग) यूरिया दिया गया, जबकि शेष 781.200 मीट्रिक टन यूरिया 18 प्राइवेट सोसायटियों को बेच दिया गया। दरअसल, यह पूरा स्टॉक सरकारी सोसायटियों को मिलना था। कृषि विभाग के स्पष्ट आदेश हैं कि उर्वरकों की बिक्री अनिवार्य रूप से केवीएसएस और जीएसएस के जरिए की जाए। इसके बावजूद सहकारिता विभाग ने 120 लाइसेंसधारक समितियों में से केवल 35 से ही डिमांड ली। अखिल भारतीय किसान सभा के अध्यक्ष शंभू सिंह राठौड़ का कहना है कि जब इफको से वितरण व्यवस्था नहीं संभली तो सरकार ने सहकारिता व कृषि विभाग को संयुक्त जिम्मेदारी सौंपी थी, लेकिन दोनों ही विभाग महज खानापूर्ति में लगे हैं। दुलचासर जीएसएस का वीडियो संज्ञान में आया है। सहायक निदेशक रामदयाल सुथार को मामले की जांच सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट आते ही संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उर्वरक वितरण पर निगरानी रखी जा रही है, टैगिंग की शिकायत पर किसी को बख्शा नहीं जाएगा। मदनलाल, संयुक्त निदेशक, कृषि विस्तार वायरल वीडियो से दावों की खुली पोल दुलचासर ग्राम सेवा सहकारी समिति का एक वीडियो किसानों ने सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया है, जिसने विभाग की नींद उड़ा दी है। वीडियो में आरोप है कि यूरिया के साथ जैविक खाद नहीं खरीदने पर व्यवस्थापक ने दुकान ही बंद कर दी। उधर, व्यवस्थापक मनोज कुमार ने टैगिंग के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि किसान 5-5 बैग की मांग कर रहे थे, जिन्हें बाद में दे दिया गया। दुकान में 700 बैग का स्टॉक मौजूद है। कागजों में सिमटा आदेश, न चेकिंग, न औचक निरीक्षण सहकारिता विभाग ने पैक्स और क्रय-विक्रय सहकारी समितियों के गोदामों में अमानक खाद की बिक्री रोकने और पारदर्शिता लाने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। अतिरिक्त रजिस्ट्रार (मार्केटिंग) केदारमल मीणा द्वारा जारी इस आदेश के अनुसार समितियों में अब केवल इफको, कृभको, आईपीएल, आरसीएफ, एनएफएल, एचयूआरएफ और जीएनएफसी जैसी प्रमुख कंपनियों के यूरिया, डीएपी व एनपीके खाद ही बेचे जा सकेंगे, वहीं निम्न गुणवत्ता वाले प्रोम खाद की बिक्री पर पूरी तरह बैन लगा दिया गया है। साथ ही निरीक्षकों को गोदामों का औचक भौतिक सत्यापन कर फोटो सहित रिपोर्ट भेजने और समितियों का पुराना बकाया भुगतान जल्द निपटाने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, धरातल पर इस आदेश का कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है; जिले में कहीं भी गोदामों की वास्तविक चेकिंग नहीं की जा रही है और अधिकारी केवल कागजी खानापूर्ति करने में जुटे हुए हैं, जिससे किसानों को जमीनी स्तर पर राहत नहीं मिल पा रही है। यूरिया के साथ जैविक खाद लेने का दबाव डाल रहे दुलचासर निवासी तोलाराम महिया का कहना है कि 10 कट्टे यूरिया के लेने थे, लेकिन व्यवस्थापक दो कट्टों के साथ एक कट्टा जैविक खाद लेने का दबाव बना रहा है। उसके 300 रुपए अलग से मांग रहा है, जबकि उसकी जरूरत ही नहीं है। बकाौल तोलाराम मैं तीन साल से सोसायटी से खाद ले रहा हूं। हर बार जरूरी बताकर गोबर वाली खाद देता रहा। अब पता चला कि हमें मूर्ख बनाया जा रहा है। कृषि विभाग से व्यवस्थापक की शिकायत की है।

