प्रयागराज उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के परिसर में चल रहे दीपावली शिल्प मेले में बुधवार की शाम देश की सतरंगी सांस्कृतिक विरासत के नाम रही। मंच पर एक ओर जहां गुजरात के गरबा और डांडिया की लयबद्ध खनक गूंजी, वहीं दूसरी ओर पूर्वांचल के ठेठ बिरहा और शास्त्रीय कथक की भावपूर्ण मुद्राओं ने दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा। समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रख्यात लोक गायिका संगीता राय, महिला सेवा सदन इंटर कॉलेज की पूर्व प्रधानाचार्य अंजना सिंह, केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा और सलाहकार कल्पना सहाय ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। गरबा-डांडिया से बंधी उत्सवी छटा
सांस्कृतिक संध्या का आगाज प्रयागराज की नृत्यांगना सोनाली चक्रवर्ती और उनके साथी कलाकारों की गुजराती गरबा व डांडिया प्रस्तुति से हुआ। पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों ने केंद्र की ग्रीष्मकालीन कार्यशाला में सीखे हुनर का शानदार प्रदर्शन किया। डांडिया की लयबद्ध थाप और तालियों की गूंज ने पूरे परिसर में उल्लास भर दिया। इसके बाद उत्तराखंड से आईं गीता सिराड़ी और उनके दल ने पर्वतीय लोकनृत्य ‘छपेली’ पेश कर देवभूमि की समृद्ध परंपराओं से रूबरू कराया। कथक की भाव-भंगिमाएं और लोकगीतों का जादू
शास्त्रीय विधा में केंद्र की ‘ब्रह्मनाद’ प्रतियोगिता की विजेता परिधि घोष ने मंच संभाला। उनके सधे हुए पद-संचालन और भावपूर्ण मुद्राओं ने दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। इसके उपरांत मध्य प्रदेश के लोकगायक अजय गंगोलिया ने सुरों की महफिल सजाई। उन्होंने ‘गौरी का नंद गणेश के मानवा’, ‘अईजा महाराज कंठ में बैठी जा भवानी’, और ‘रेशमी रुमाल बालम पल्लू वारु रे’ जैसे लोकप्रिय लोकगीतों से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। बिरहा के सुरों ने मोहा संगम तटवासियों का मन
कार्यक्रम का समापन जंगबली यादव और उनके साथियों के जोरदार बिरहा गायन के साथ हुआ। ‘राजा हो चला संगम नहाई आई’ और ‘बेचारी सुगिया बालम से कहे, पूर्व प्रयागराज में लागल बा करारी’ के जरिए कलाकारों ने लोकजीवन के यथार्थ और प्रयागराज की सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत कर दिया। मंच संचालन अभिजीत मिश्रा ने किया। इस दौरान संस्कार भारती (काशी प्रांत) के संगठन मंत्री दीपक शर्मा सहित बड़ी संख्या में कला व साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।

