कोडीन कफ सिरप में महिला दवा कारोबारी को अग्रिम जमानत:हाईकोर्ट ने कहा नवजात शिशु का मामला, आपराधिक इतिहास भी नही

कोडीन कफ सिरप में महिला दवा कारोबारी को अग्रिम जमानत:हाईकोर्ट ने कहा नवजात शिशु का मामला, आपराधिक इतिहास भी नही

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नवजात शिशु की मां और दवा कारोबारी अंजली रानी कसेरा को कोडीन आधारित कफ सिरप (फेंसिडिल) से जुड़े मामले में अंतरिम अग्रिम जमानत दे दी है।
न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ला की एकल पीठ ने यह आदेश पारित किया। क्या है मामला जानिये थाना मुगलसराय, जिला चंदौली में एफआईआर दर्ज कराई गई है। सत्र न्यायाधीश, चंदौली से अग्रिम जमानत अर्जी खारिज होने के बाद आवेदिका ने हाईकोर्ट का रुख किया था। वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील शुक्ला ने रविंद्र प्रताप सिंह चंदेल और शुभम सिंह के साथ पैरवी करते हुए कहा किआवेदिका के पास औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत दवा बिक्री का वैध लाइसेंस है।उनकी फर्म “मेसर्स समृद्धि एंटरप्राइजेज” जीएसटी विभाग में पंजीकृत है। कोडीन आधारित कफ सिरप वैध रूप से खरीदे और कानून के अनुसार बेचे गए। ई-वे बिल सहित अन्य दस्तावेज अर्जी के साथ दाखिल किए गए हैं। वैध कारोबारी लेन-देन को सूचनाकर्ता द्वारा तस्करी बताया जा रहा है। आवेदिका ने 18 सितंबर 2026 को एक बच्चे को जन्म दिया है और वही उसकी प्राथमिक देखभाल करती है। संरक्षण न मिलने पर शिशु के जीवन और स्वास्थ्य पर खतरा हो सकता है।आवेदिका का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। कोर्ट में दी गईं दलीलें अपर शासकीय अधिवक्ता परितोष मालवीय ने अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि आवेदिका फरार है और विवेचना में सहयोग नहीं कर रही। उन्होंने यह भी कहा कि आवेदिका को कथित रूप से बेची गई कुछ दवाएं नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, अगरतला ने त्रिपुरा में बरामद कीं, जिससे तस्करी के लिए फर्जी बिल बनाने की साजिश स्पष्ट होती है। नवराज शिशु की देखभाल का मामला उठा न्यायालय ने कहा कि आवेदिका नवजात शिशु की देखभाल कर रही महिला है और उसका कोई अन्य आपराधिक इतिहास नहीं है। कफ सिरप की वैध खरीद-बिक्री के दस्तावेज संलग्न हैं, जबकि दस्तावेजों के कूटरचित होने का आरोप विवेचनाधीन है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि आवेदिका की चिकित्सीय स्थिति और आपराधिक इतिहास न होने को देखते हुए अंतरिम अग्रिम जमानत का मामला बनता है। कहा आवेदिका दो सप्ताह के भीतर विवेचक के समक्ष उपस्थित होकर बयान दर्ज कराए और जांच में पूरा सहयोग करे।सरकारी वकील को जवाबी हलफनामे के लिए दो सप्ताह, और उसके एक सप्ताह बाद आवेदिका को प्रत्युत्तर हलफनामे के लिए समय मिला।मामला 16 नवंबर 2026 को नए सिरे से सुनवाई के लिए लगेगा।

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