इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सम्राट अशोक की जयंती पर पूरे देश में सार्वजनिक अवकाश घोषित करने और उसे ‘राष्ट्रीय मानववाद दिवस’ के रूप में मनाने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी है। मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ ने कहा कि इस उद्देश्य से दायर जनहित याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। याचिका में क्या कहा जानिये याचिका सुरेश मिलन ने दायर की थी, जिसमें केंद्र सरकार सहित अन्य को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वे महान सम्राट अशोक की जयंती के अवसर पर पूरे भारत में सार्वजनिक अवकाश तय करें और इसे ‘राष्ट्रीय मानववाद दिवस’ नाम दें। पीठ ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के ऑल इंडिया शिरोमणि सिंह सभा बनाम भारत संघ व अन्य के फैसले का उल्लेख किया। उसके अनुसार, नीतिगत निर्णय, विशेषकर प्रशासनिक, आर्थिक और शासन से जुड़े मामले, कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। सार्वजनिक अवकाश की घोषणा ऐसा ही एक नीतिगत फैसला है, जिसमें प्रशासनिक दक्षता, आवश्यक सेवाओं की निरंतरता, आर्थिक प्रभाव और देश की विविध सामाजिक-सांस्कृतिक परंपराओं के बीच संतुलन जरूरी होता है। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने माना कि याचिका वर्तमान स्वरूप में पोषणीय नहीं है और उसे खारिज कर दिया।

