चिकित्सा पेशे से राजनीति में आए भाजपा के एनके यादव ने कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से लगातार तीसरी बार जीत दर्ज कर हैट्रिक लगाई है। 2014 में पहली और 2020 में दूसरी बार जीतने के बाद 2026 में भी उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी। उनकी जीत के बाद समर्थकों में उत्साह है और जश्न मनाया जा रहा है। हालांकि, विधान परिषद तक पहुंचने का उनका सफर सीधे जीत से शुरू नहीं हुआ था। शुरुआती चुनावों में हार के बाद उन्होंने राजनीति में अपनी पहचान बनाई और धीरे-धीरे कोसी स्नातक क्षेत्र में मजबूत पकड़ बनाई। जश्न की 2 तस्वीर… 2009 में लोकसभा, 2010 में विधानसभा चुनाव लड़ा एनके यादव ने 2009 के लोकसभा चुनाव में भागलपुर सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में उन्हें 8,828 वोट मिले, जो कुल मतों का करीब 1.40% था। वह जीत हासिल नहीं कर सके और उनकी जमानत भी जब्त हो गई। इसके अगले साल 2010 में उन्होंने भागलपुर सदर विधानसभा सीट से लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के टिकट पर चुनाव लड़ा। इस बार उन्हें 19,479 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे। उन्हें कुल मतों का 16.65% मिला। लगातार दो चुनावों में जीत नहीं मिलने के बावजूद भी राजनीति में अपनी सक्रियता जारी रखी। भाजपा से जुड़ने के बाद विधान परिषद तक पहुंचे एनके यादव 2014 में भाजपा से जुड़े और उसी साल कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद का चुनाव लड़ा और जीतकर पहली बार एमएलसी बने। इसके बाद 2020 के चुनाव में उन्होंने दूसरी बार जीत दर्ज की। उस चुनाव में उन्हें 20,841 वोट मिले थे, जबकि राजद प्रत्याशी डॉ. नितेश कुमार को 13,940 वोट मिले थे। इस तरह एनके यादव ने 6,901 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। प्राथमिकता के आधार पर काम करेंगे- एनके यादव जीत के बाद भास्कर से बातचीत में एनके यादव ने कहा कि ये जीत स्नातक युवाओं की है। जो प्यार और भरोसा जताया है, उसके लिए आभार। सरकार का भी आभार है। बचे हुए काम को प्राथमिकताके आधार पर पूरा करेंगे। पहले भी काम कियाहै, आगे भी करते रहेंगे। चिकित्सा पेशे से राजनीति तक का सफर राजनीति में आने से पहले एनके यादव चिकित्सा पेशे से जुड़े रहे हैं। वह स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के रूप में भी जाने जाते हैं। उनका मूल संबंध झारखंड के गोड्डा जिले से बताया जाता है, जबकि भागलपुर उनकी कर्मभूमि रहा है। चिकित्सा पेशे के साथ सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। परिवार भी चिकित्सा और सामाजिक जीवन से जुड़ा एनके यादव का परिवार भी चिकित्सा और सार्वजनिक जीवन से जुड़ा रहा है। उनकी पत्नी डॉ. वीणा यादव भागलपुर की मेयर रह चुकी हैं। उन्होंने 2007 से 2012 तक महापौर की जिम्मेदारी संभाली। उनकी बेटी डॉ. श्रेया यादव स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ हैं, जबकि बेटे डॉ. निलय कृष्ण सर्जन हैं। इस तरह परिवार की पहचान चिकित्सा पेशे के साथ सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में भी रही है। स्कूलों में शनिवार को आधे दिन की पढ़ाई के मुद्दे पर भी चर्चा बिहार के सरकारी स्कूलों में शनिवार को आधे दिन की पढ़ाई के मुद्दे पर भी एनके यादव का नाम चर्चा में आया। बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने एक वीडियो में इस व्यवस्था को एनके यादव के आग्रह से जोड़ते हुए बयान दिया था। इस मुद्दे पर मंत्री के बयान और संबंधित सरकारी आदेश के आधार पर ही यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि व्यवस्था लागू कराने में एनके यादव की क्या भूमिका रही। तीसरी जीत के साथ लगाई हैट्रिक कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से 2014, 2020 और 2026 में लगातार जीत दर्ज कर डॉ. एनके यादव ने एमएलसी चुनाव में हैट्रिक लगाई है। 2009 के लोकसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में शुरुआत करने और 2010 के विधानसभा चुनाव में तीसरे स्थान पर रहने के बाद उनका राजनीतिक सफर विधान परिषद तक पहुंचा। लगातार तीन जीत उनके राजनीतिक जीवन की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल हैं। चिकित्सा पेशे से राजनीति में आए भाजपा के एनके यादव ने कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से लगातार तीसरी बार जीत दर्ज कर हैट्रिक लगाई है। 2014 में पहली और 2020 में दूसरी बार जीतने के बाद 2026 में भी उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी। उनकी जीत के बाद समर्थकों में उत्साह है और जश्न मनाया जा रहा है। हालांकि, विधान परिषद तक पहुंचने का उनका सफर सीधे जीत से शुरू नहीं हुआ था। शुरुआती चुनावों में हार के बाद उन्होंने राजनीति में अपनी पहचान बनाई और धीरे-धीरे कोसी स्नातक क्षेत्र में मजबूत पकड़ बनाई। जश्न की 2 तस्वीर… 2009 में लोकसभा, 2010 में विधानसभा चुनाव लड़ा एनके यादव ने 2009 के लोकसभा चुनाव में भागलपुर सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में उन्हें 8,828 वोट मिले, जो कुल मतों का करीब 1.40% था। वह जीत हासिल नहीं कर सके और उनकी जमानत भी जब्त हो गई। इसके अगले साल 2010 में उन्होंने भागलपुर सदर विधानसभा सीट से लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के टिकट पर चुनाव लड़ा। इस बार उन्हें 19,479 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे। उन्हें कुल मतों का 16.65% मिला। लगातार दो चुनावों में जीत नहीं मिलने के बावजूद भी राजनीति में अपनी सक्रियता जारी रखी। भाजपा से जुड़ने के बाद विधान परिषद तक पहुंचे एनके यादव 2014 में भाजपा से जुड़े और उसी साल कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद का चुनाव लड़ा और जीतकर पहली बार एमएलसी बने। इसके बाद 2020 के चुनाव में उन्होंने दूसरी बार जीत दर्ज की। उस चुनाव में उन्हें 20,841 वोट मिले थे, जबकि राजद प्रत्याशी डॉ. नितेश कुमार को 13,940 वोट मिले थे। इस तरह एनके यादव ने 6,901 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। प्राथमिकता के आधार पर काम करेंगे- एनके यादव जीत के बाद भास्कर से बातचीत में एनके यादव ने कहा कि ये जीत स्नातक युवाओं की है। जो प्यार और भरोसा जताया है, उसके लिए आभार। सरकार का भी आभार है। बचे हुए काम को प्राथमिकताके आधार पर पूरा करेंगे। पहले भी काम कियाहै, आगे भी करते रहेंगे। चिकित्सा पेशे से राजनीति तक का सफर राजनीति में आने से पहले एनके यादव चिकित्सा पेशे से जुड़े रहे हैं। वह स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के रूप में भी जाने जाते हैं। उनका मूल संबंध झारखंड के गोड्डा जिले से बताया जाता है, जबकि भागलपुर उनकी कर्मभूमि रहा है। चिकित्सा पेशे के साथ सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। परिवार भी चिकित्सा और सामाजिक जीवन से जुड़ा एनके यादव का परिवार भी चिकित्सा और सार्वजनिक जीवन से जुड़ा रहा है। उनकी पत्नी डॉ. वीणा यादव भागलपुर की मेयर रह चुकी हैं। उन्होंने 2007 से 2012 तक महापौर की जिम्मेदारी संभाली। उनकी बेटी डॉ. श्रेया यादव स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ हैं, जबकि बेटे डॉ. निलय कृष्ण सर्जन हैं। इस तरह परिवार की पहचान चिकित्सा पेशे के साथ सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में भी रही है। स्कूलों में शनिवार को आधे दिन की पढ़ाई के मुद्दे पर भी चर्चा बिहार के सरकारी स्कूलों में शनिवार को आधे दिन की पढ़ाई के मुद्दे पर भी एनके यादव का नाम चर्चा में आया। बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने एक वीडियो में इस व्यवस्था को एनके यादव के आग्रह से जोड़ते हुए बयान दिया था। इस मुद्दे पर मंत्री के बयान और संबंधित सरकारी आदेश के आधार पर ही यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि व्यवस्था लागू कराने में एनके यादव की क्या भूमिका रही। तीसरी जीत के साथ लगाई हैट्रिक कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से 2014, 2020 और 2026 में लगातार जीत दर्ज कर डॉ. एनके यादव ने एमएलसी चुनाव में हैट्रिक लगाई है। 2009 के लोकसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में शुरुआत करने और 2010 के विधानसभा चुनाव में तीसरे स्थान पर रहने के बाद उनका राजनीतिक सफर विधान परिषद तक पहुंचा। लगातार तीन जीत उनके राजनीतिक जीवन की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल हैं।

