जमुई में छठ घाटों की 2 दिन से सफाई शुरू:वार्ड 1 से 30 तक मरम्मत और प्लेटफार्म का निर्माण

जमुई में छठ घाटों की 2 दिन से सफाई शुरू:वार्ड 1 से 30 तक मरम्मत और प्लेटफार्म का निर्माण

जमुई में लोक आस्था के महापर्व छठ को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। नगर परिषद की ओर से वार्ड नंबर एक से लेकर 30 तक सभी छठ घाटों पर सफाई, मरम्मत और निर्माण कार्य कराया जा रहा है। घाटों पर जमा गंदगी और घास-फूस हटाने के लिए मजदूरों के साथ जेसीबी मशीन भी लगाई गई है। वहीं, छठ व्रतियों की सुविधा के लिए डलिया और सूप रखने के लिए प्लेटफार्म बनाए जा रहे हैं। हालांकि, तैयारियों के बीच नदियों में बालू खनन से बने गड्ढे और शहर व ग्रामीण इलाकों के नालों का गंदा पानी नदी में गिरने का मुद्दा भी लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। 2 दिन पहले से घाटों की सफाई शुरू नगर परिषद के सुपरवाइजर मंटू राम ने बताया कि दो दिन पहले से ही घाटों की सफाई और मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है। नदी किनारे जहां बालू की कमी के कारण घाट खराब हो गए हैं, वहां उन्हें दुरुस्त किया जा रहा है। जरूरत के अनुसार नए घाट भी बनाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह काम लगातार जारी रहेगा और 10-11 नवंबर तक सभी घाटों को तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि छठ व्रतियों को पूजा के दौरान किसी तरह की परेशानी नहीं हो। हालांकि, घाटों की साफ-सफाई के बीच नदी में बालू खनन से बने गड्ढे भी चिंता का विषय हैं। नदी के किनारे और पानी के भीतर बने ये गड्ढे छठ के दौरान व्रतियों और उनके साथ आने वाले बच्चों के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से निकलने वाले नालों का गंदा पानी लगातार नदियों में बहाए जाने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। मौके से आई तस्वीरें…
नदी में प्रदूषण रोकने के लिए करना चाहिए काम छठ जैसे पवित्र पर्व पर श्रद्धालु इसी पानी में उतरकर अर्घ्य देते हैं। ऐसे में नदी में गंदा पानी गिरना स्वच्छता और स्वास्थ्य, दोनों के लिहाज से गंभीर सवाल खड़े करता है। लोगों का कहना है कि नगर परिषद को घाटों की ऊपरी सफाई के साथ नदी में प्रदूषण रोकने की दिशा में भी ठोस कदम उठाने चाहिए। केवल पर्व के समय सफाई कराने के बजाय नालों के पानी की उचित निकासी और उसके उपचार की स्थायी व्यवस्था होनी चाहिए। पानी की गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी छठ महापर्व बिहार के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण त्योहारों में शामिल है। अब यह पर्व देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदायों के बीच भी श्रद्धा और उत्साह से मनाया जाता है। ऐसे में घाटों की स्वच्छता, सुरक्षा और नदी के पानी की गुणवत्ता बनाए रखना बेहद जरूरी है। नगर परिषद की तैयारियां श्रद्धालुओं के लिए राहत की बात हैं, लेकिन साफ-सुथरे घाटों के साथ सुरक्षित और प्रदूषणमुक्त जल की व्यवस्था ही छठ की आस्था के अनुरूप बेहतर इंतजाम सुनिश्चित कर सकती है। जमुई में लोक आस्था के महापर्व छठ को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। नगर परिषद की ओर से वार्ड नंबर एक से लेकर 30 तक सभी छठ घाटों पर सफाई, मरम्मत और निर्माण कार्य कराया जा रहा है। घाटों पर जमा गंदगी और घास-फूस हटाने के लिए मजदूरों के साथ जेसीबी मशीन भी लगाई गई है। वहीं, छठ व्रतियों की सुविधा के लिए डलिया और सूप रखने के लिए प्लेटफार्म बनाए जा रहे हैं। हालांकि, तैयारियों के बीच नदियों में बालू खनन से बने गड्ढे और शहर व ग्रामीण इलाकों के नालों का गंदा पानी नदी में गिरने का मुद्दा भी लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। 2 दिन पहले से घाटों की सफाई शुरू नगर परिषद के सुपरवाइजर मंटू राम ने बताया कि दो दिन पहले से ही घाटों की सफाई और मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है। नदी किनारे जहां बालू की कमी के कारण घाट खराब हो गए हैं, वहां उन्हें दुरुस्त किया जा रहा है। जरूरत के अनुसार नए घाट भी बनाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह काम लगातार जारी रहेगा और 10-11 नवंबर तक सभी घाटों को तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि छठ व्रतियों को पूजा के दौरान किसी तरह की परेशानी नहीं हो। हालांकि, घाटों की साफ-सफाई के बीच नदी में बालू खनन से बने गड्ढे भी चिंता का विषय हैं। नदी के किनारे और पानी के भीतर बने ये गड्ढे छठ के दौरान व्रतियों और उनके साथ आने वाले बच्चों के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से निकलने वाले नालों का गंदा पानी लगातार नदियों में बहाए जाने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। मौके से आई तस्वीरें…
नदी में प्रदूषण रोकने के लिए करना चाहिए काम छठ जैसे पवित्र पर्व पर श्रद्धालु इसी पानी में उतरकर अर्घ्य देते हैं। ऐसे में नदी में गंदा पानी गिरना स्वच्छता और स्वास्थ्य, दोनों के लिहाज से गंभीर सवाल खड़े करता है। लोगों का कहना है कि नगर परिषद को घाटों की ऊपरी सफाई के साथ नदी में प्रदूषण रोकने की दिशा में भी ठोस कदम उठाने चाहिए। केवल पर्व के समय सफाई कराने के बजाय नालों के पानी की उचित निकासी और उसके उपचार की स्थायी व्यवस्था होनी चाहिए। पानी की गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी छठ महापर्व बिहार के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण त्योहारों में शामिल है। अब यह पर्व देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदायों के बीच भी श्रद्धा और उत्साह से मनाया जाता है। ऐसे में घाटों की स्वच्छता, सुरक्षा और नदी के पानी की गुणवत्ता बनाए रखना बेहद जरूरी है। नगर परिषद की तैयारियां श्रद्धालुओं के लिए राहत की बात हैं, लेकिन साफ-सुथरे घाटों के साथ सुरक्षित और प्रदूषणमुक्त जल की व्यवस्था ही छठ की आस्था के अनुरूप बेहतर इंतजाम सुनिश्चित कर सकती है।  

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