CID में ACP प्रद्युम्न का किरदार निभाने वाले एक्टर शिवाजी साटम ने शो के निर्माता बीपी सिंह के निधन पर दुख जताया। बीपी सिंह का मंगलवार को हार्ट अटैक के बाद निधन हो गया। शिवाजी साटम ने उन्हें अपना मेंटर, दोस्त और शिक्षक बताया। उन्होंने कहा कि बीपी सिंह के निधन के बाद उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा चैप्टर खत्म हो गया। CID में दया का किरदार निभाने वाले दयानंद शेट्टी और फिल्ममेकर अशोक पंडित ने भी बीपी सिंह को श्रद्धांजलि दी। शिवाजी साटम ने वैरायटी इंडिया को दिए इंटरव्यू में कहा, आज मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा चैप्टर खत्म हो गया। वह महान इंसान और अच्छे दोस्त थे। मैंने उनसे सब कुछ सीखा। मैं थिएटर से आया था और स्टेज पर एक्टिंग करना जानता था। लेकिन बीपी सिंह ने मुझे कैमरे के सामने एक्टिंग करना सिखाया। साटम ने बताया कि CID की टीम ने एक ही टेक में 111 मिनट लंबा एपिसोड शूट कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था। उन्होंने कहा कि गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद सिंह लगातार काम करते रहे। हार्ट सर्जरी के सिर्फ तीन महीने बाद वह जंगल में कैमरा लेकर चेज सीक्वेंस शूट कर रहे थे। साटम ने बताया कि दूसरी सर्जरी के छह-सात महीने बाद सिंह ने 111 मिनट का सिंगल-शॉट एपिसोड तैयार किया। उन्होंने कैमरामैन नितिन राव को पूरे शूट के दौरान मार्गदर्शन दिया था। बता दें कि इस उपलब्धि को ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ और ‘लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में दर्ज किया गया था। शिवाजी साटम ने भारतीय टेलीविजन में बीपी सिंह के योगदान को याद करते हुए कहा, “उन जैसे इंसान को पद्मश्री मिलना चाहिए था, लेकिन उन्हें इसकी कभी परवाह नहीं रही। वह कहते थे, ‘छोड़ो, इससे क्या फर्क पड़ता है? हमारे दर्शक हमारे साथ हैं, है ना?’ आज भी दर्शक हमारे साथ हैं। यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।” दयानंद शेट्टी ने भी दी श्रद्धांजलि दयानंद शेट्टी ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में बीपी सिंह को याद किया। शेट्टी ने कहा, “बीपी सिंह जी की जिंदगी में कंटेंट बनाने के अलावा कुछ और नहीं था। वह अपने काम के लिए समर्पित थे और उनमें बहुत जुनून था।” उन्होंने कहा, “वह हमारे सबसे अच्छे कैमरामैन में से एक थे। वह काफी समय से बीमार थे और मंगलवार सुबह नहीं उठे।” देहरादून में हुआ था जन्म, 1998 में शुरू किया था ‘सीआईडी’ बीपी सिंह का जन्म 1949 में देहरादून में हुआ था। उन्होंने पुणे स्थित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) से पढ़ाई की। साल 1973 में उन्होंने दूरदर्शन में न्यूज कैमरामैन के तौर पर करियर शुरू किया। करीब 10 साल तक कैमरे के पीछे काम करने के बाद वह मुंबई आ गए। उन्होंने दूरदर्शन के लिए मर्डर मिस्ट्री फिल्म ‘सिर्फ चार दिन’ बनाई। इस दौरान पुलिस की क्राइम ब्रांच में उनकी दिलचस्पी बढ़ी। बाद में उन्होंने ‘एक शून्य शून्य’ और कई मराठी सीरियल भी बनाए। साल 1995 में उनका हॉरर शो ‘आहट’ प्रसारित होना शुरू हुआ। शुरुआत में यह सस्पेंस पर आधारित था, लेकिन बाद में इसमें भूत-प्रेत की कहानियां भी दिखाई जाने लगीं।
साल 1998 में उन्होंने ‘सीआईडी’ की शुरुआत की। इस शो में बीपी सिंह ने केवल निर्माण और निर्देशन ही नहीं किया, बल्कि समय-समय पर डीसीपी शमशेर सिंह चित्रोले का किरदार भी निभाया। साल 2010 में उनके शो की ओर से ‘सीआईडी गैलेंट्री अवॉर्ड्स’ की शुरुआत भी की गई थी। उन्होंने ‘गुटुर गू’, ‘रात होने को है’, ‘सूर्या द सुपर कॉप’ और ‘सुपरकॉप्स वर्सेज सुपरविलेन्स’ जैसे शो भी बनाए। साथ ही, वेब सीरीज ‘अभय’ को भी प्रोड्यूस किया था।
बैंक से लोन मिला, उसी पैसे से बनाया CID का पायलट एपिसोड शो CID बनाने वाले बीपी सिंह का सफर आसान नहीं था। एक समय ऐसा भी आया, जब उन्हें कई साल तक काम नहीं मिला। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। देवांग भट्ट को दिए इंटरव्यू में बीपी सिंह ने अपने संघर्ष, CID की शुरुआत और शो के कलाकारों से जुड़े कई दिलचस्प किस्से सुनाए थे। बीपी सिंह ने बताया था कि उनके करियर में सफलता और मुश्किलें, दोनों आईं। उनका एक मराठी सीरियल काफी हिट हुआ था, लेकिन 31 एपिसोड के बाद वह बंद हो गया। इसके बाद करीब चार-पांच साल तक उनके पास कोई काम नहीं था। जब बैंक से मिला 40 लाख रुपए का लोन बीपी सिंह ने इंटरव्यू में एक दिलचस्प किस्सा सुनाया था। उन्होंने बताया था कि एक दिन उनके घर पर सिटी बैंक का एक कर्मचारी आया। उसने कहा कि बैंक उन्हें लोन देना चाहता है। दरअसल, बीपी सिंह ने पहले कार लोन लिया था और उसकी सभी किस्तें समय पर चुकाई थीं। इसी वजह से बैंक ने उन्हें पर्सनल लोन देने का प्रस्ताव दिया। शुरुआत में बीपी सिंह को भरोसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि उस समय उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, लेकिन बैंक कर्मचारी ने उन्हें सोचने का समय दिया और दोबारा घर आया। आखिरकार, उन्हें करीब 40 लाख रुपए का लोन मिला। उन्होंने अपनी बचत के करीब पांच लाख रुपए भी इसमें जोड़ दिए। इस तरह लगभग 45 लाख रुपए जुटाकर उन्होंने CID का पायलट एपिसोड बनाया। बीपी सिंह ने इस मदद को अपने मुश्किल समय में मिली बड़ी राहत बताया था। एक डॉक्टर की बात से आया CID का आइडिया बीपी सिंह ने बताया कि CID का विचार उन्हें फॉरेंसिक साइंस से जुड़ी एक बातचीत के दौरान आया था। उनकी मुलाकात एक फॉरेंसिक डॉक्टर फतनानी से हुई थी। डॉक्टर ने उन्हें बताया था कि मुर्दा कभी झूठ नहीं बोलेगा, जिनसे अपराध का पता लगाया जा सकता है। यह बात बीपी सिंह को बेहद दिलचस्प लगी। उन्होंने सोचा कि अगर इन वैज्ञानिक तरीकों को कहानियों के जरिए दिखाया जाए, तो दर्शकों को कुछ नया देखने को मिलेगा। इसके बाद उन्होंने फॉरेंसिक साइंस से जुड़ी किताबें पढ़ीं। उन्होंने अपने लेखकों को भी इस बारे में जानकारी दी। इसी सोच ने CID की कहानियों को एक अलग पहचान दी। शिवाजी साटम और दया की कास्टिंग कैसी हुई थी बीपी सिंह ने बताया कि ACP प्रद्युम्न के किरदार के लिए शिवाजी साटम उनकी पहली पसंद थे। दोनों की दोस्ती काफी पुरानी थी। शिवाजी साटम बैंक में काम करते थे, तब से वे एक-दूसरे को जानते थे। इंस्पेक्टर दया की कास्टिंग का किस्सा भी दिलचस्प था। बीपी सिंह ने बताया कि एक दिन उनकी टीम के एक सदस्य ने दया के किरदार के लिए एक्टर दयानंद शेट्टी को बुलाने की सलाह दी। करीब दो घंटे बाद दयानंद शेट्टी ऑडिशन देने पहुंचे। बीपी सिंह ने उन्हें दो पन्नों का डायलॉग दिया। दयानंद शेट्टी ने उसे याद करके भाव के साथ सुनाया। बीपी सिंह को लगा कि उन्हें अपने किरदार के लिए सही कलाकार मिल गया है। बीपी सिंह के निधन के बाद लोगों ने उनके बारे में जानने के लिए गूगल पर सर्च किया, जिसके बाद वह ट्रेंड करने लगे

