कटिहार के अमदाबाद प्रखंड के बबला बन्ना गांव पर गंगा का खतरा एक बार फिर मंडराने लगा है। कभी बड़ी आबादी वाला यह गांव पिछले 10 सालों में अपना तीन-चौथाई हिस्सा गंगा कटाव में खो चुका है। अब आलम यह है कि कई घरों से महज 200 फीट की दूरी पर गंगा बह रही है। ग्रामीणों को रात में नींद नहीं आती, उन्हें डर है कि कहीं सुबह उठने से पहले उनका आशियाना ही नदी में समा जाए। बोल्डर पिचिंग से मिली थी दो साल राहत भवानीपुर खट्टी पंचायत के बबला बन्ना में कटाव का यह दर्द नया नहीं, बल्कि वर्षों पुराना है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव के कुछ हिस्सों में करीब एक हजार मीटर तक बोल्डर पिचिंग का काम कराया गया था। इस काम के बाद पिछले दो वर्षों तक लोगों ने राहत की सांस ली थी और लगा था कि अब कटाव थम जाएगा। लेकिन यह राहत अस्थायी निकली। पारदियारा से बबला बन्ना के बदन टोला तक का इलाका आज भी सबसे ज्यादा संवेदनशील बना हुआ है। जहां बोल्डर पिचिंग हुई है, वहां फिलहाल कटाव रुका है, लेकिन उसके आगे गंगा लगातार जमीन को निगल रही है। कई जगहों पर आंशिक कटाव जारी है। बांस की रोलिंग नहीं है स्थायी समाधान प्रशासन की ओर से कटाव रोकने के लिए कुछ स्थानों पर बांस की रोलिंग की गई है, लेकिन ग्रामीण इसे महज खानापूर्ति मान रहे हैं। उनका कहना है कि गंगा के तेज बहाव के सामने बांस की रोलिंग टिक नहीं पाएगी। उन्हें एक पक्के और स्थायी समाधान की जरूरत है। घरों के इतने करीब नदी पहुंचने से महिलाओं और बच्चों में सबसे ज्यादा दहशत है। प्रशासन से लगाई गुहार गांव के लोगों ने स्थानीय विधायक और जिला प्रशासन से मांग की है कि कटाव प्रभावित इलाकों का जल्द निरीक्षण कराया जाए और स्थायी बचाव कार्य शुरू किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि गांव का बड़ा हिस्सा पहले ही गंगा में विलीन हो चुका है, खेत-खलिहान खत्म हो चुके हैं। अब कम से कम बचे हुए घरों और जमीन को बचाने के लिए समय रहते पहल जरूरी है। सवाल यही है कि घरों से महज 200 फीट दूर पहुंच चुकी गंगा को रोकने के लिए प्रशासन कब ठोस कदम उठाएगा, या फिर बबला बन्ना के लोगों को एक बार फिर अपना आशियाना उजड़ते देखने की मजबूरी झेलनी पड़ेगी। कटिहार के अमदाबाद प्रखंड के बबला बन्ना गांव पर गंगा का खतरा एक बार फिर मंडराने लगा है। कभी बड़ी आबादी वाला यह गांव पिछले 10 सालों में अपना तीन-चौथाई हिस्सा गंगा कटाव में खो चुका है। अब आलम यह है कि कई घरों से महज 200 फीट की दूरी पर गंगा बह रही है। ग्रामीणों को रात में नींद नहीं आती, उन्हें डर है कि कहीं सुबह उठने से पहले उनका आशियाना ही नदी में समा जाए। बोल्डर पिचिंग से मिली थी दो साल राहत भवानीपुर खट्टी पंचायत के बबला बन्ना में कटाव का यह दर्द नया नहीं, बल्कि वर्षों पुराना है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव के कुछ हिस्सों में करीब एक हजार मीटर तक बोल्डर पिचिंग का काम कराया गया था। इस काम के बाद पिछले दो वर्षों तक लोगों ने राहत की सांस ली थी और लगा था कि अब कटाव थम जाएगा। लेकिन यह राहत अस्थायी निकली। पारदियारा से बबला बन्ना के बदन टोला तक का इलाका आज भी सबसे ज्यादा संवेदनशील बना हुआ है। जहां बोल्डर पिचिंग हुई है, वहां फिलहाल कटाव रुका है, लेकिन उसके आगे गंगा लगातार जमीन को निगल रही है। कई जगहों पर आंशिक कटाव जारी है। बांस की रोलिंग नहीं है स्थायी समाधान प्रशासन की ओर से कटाव रोकने के लिए कुछ स्थानों पर बांस की रोलिंग की गई है, लेकिन ग्रामीण इसे महज खानापूर्ति मान रहे हैं। उनका कहना है कि गंगा के तेज बहाव के सामने बांस की रोलिंग टिक नहीं पाएगी। उन्हें एक पक्के और स्थायी समाधान की जरूरत है। घरों के इतने करीब नदी पहुंचने से महिलाओं और बच्चों में सबसे ज्यादा दहशत है। प्रशासन से लगाई गुहार गांव के लोगों ने स्थानीय विधायक और जिला प्रशासन से मांग की है कि कटाव प्रभावित इलाकों का जल्द निरीक्षण कराया जाए और स्थायी बचाव कार्य शुरू किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि गांव का बड़ा हिस्सा पहले ही गंगा में विलीन हो चुका है, खेत-खलिहान खत्म हो चुके हैं। अब कम से कम बचे हुए घरों और जमीन को बचाने के लिए समय रहते पहल जरूरी है। सवाल यही है कि घरों से महज 200 फीट दूर पहुंच चुकी गंगा को रोकने के लिए प्रशासन कब ठोस कदम उठाएगा, या फिर बबला बन्ना के लोगों को एक बार फिर अपना आशियाना उजड़ते देखने की मजबूरी झेलनी पड़ेगी।

