प्रतिमा विसर्जन में जमुई छेड़खानी कांड की झांकी:सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर बनी झांकियां, 20 प्रतिमाओं का शांतिपूर्ण विसर्जन

प्रतिमा विसर्जन में जमुई छेड़खानी कांड की झांकी:सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर बनी झांकियां, 20 प्रतिमाओं का शांतिपूर्ण विसर्जन

मुंगेर में दुर्गा और काली प्रतिमाओं के विसर्जन का दौर शुक्रवार की देर शाम शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो गया। शुक्रवार दोपहर तक मुंगेर की दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। इसके बाद शाम 4 बजे से जमालपुर की 10 काली प्रतिमाओं की विसर्जन शोभायात्रा शुरू हुई। इनके बाद जमालपुर की 10 दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन कराया गया। जमालपुर से आई सभी 20 प्रतिमाओं का विसर्जन मुंगेर के सोझी घाट पर किया गया। दो दिनों तक चली विसर्जन शोभायात्रा के दौरान कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। शांतिपूर्ण विसर्जन संपन्न होने पर शहरवासियों ने जिला प्रशासन के कार्यों की सराहना की। जमुई लड़की कांड से लेकर बेरोजगारी और पलायन तक जमालपुर से मुंगेर पहुंचीं काली और दुर्गा प्रतिमाओं की विसर्जन शोभायात्रा में इस बार सामाजिक और राजनीतिक मुद्दे छाए रहे। विभिन्न पूजा समितियों ने रंगीन बल्बों से सजी आकर्षक झांकियों के माध्यम से समाज की समस्याओं को सामने रखा। जमालपुर के टिपटॉप गली की बड़ी काली प्रतिमा की झांकी में जमुई में लड़की के साथ हुए कथित अभद्र व्यवहार की घटना को दर्शाया गया। इसके माध्यम से महिलाओं और बेटियों के साथ हो रहे अत्याचार पर चोट की गई। चित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया वहीं, झांकियों में मुंगेर में आई भीषण बाढ़, बिहार से पलायन, बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से दिखाया गया। शिक्षा व्यवस्था की खामियों, नीट परीक्षा में पेपर लीक के मुद्दे और डिग्री हासिल करने के बाद भी युवाओं को नौकरी नहीं मिलने की समस्या को भी झांकियों में जगह दी गई। इसके अलावा बिहार में बड़े उद्योगों की कमी और स्थायी समाधान की जरूरत को चित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। कुछ पूजा समितियों ने नमामि गंगे अभियान और गंगा की साफ-सफाई का संदेश दिया। वहीं, भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने और सामाजिक एकता बनाए रखने का संदेश भी झांकियों के माध्यम से दिया गया। दूसरी ओर, कुछ समितियों ने केंद्र और बिहार सरकार की योजनाओं को प्रदर्शित किया। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, मुफ्त राशन, आयुष्मान कार्ड और विकास कार्यों को दर्शाया गया। कंट्रोल रूम से हर प्रतिमा की निगरानी विसर्जन के दौरान जिला प्रशासन और केंद्रीय विसर्जन समिति ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। मुंगेर शहर के भगत सिंह चौक स्थित कंट्रोल रूम में मौजूद अधिकारियों और समिति के सदस्यों ने विसर्जन के लिए जा रही प्रतिमाओं की बारी-बारी से जांच की। जांच के बाद ही प्रतिमाओं को गंगा घाट की ओर जाने की अनुमति दी जा रही थी। शोभायात्रा के दौरान धारदार हथियार, लाठी-डंडे जैसी वस्तुओं को घाट तक ले जाने से रोकने की व्यवस्था की गई थी। घाट पर तैनात रहे गोताखोर और एसडीआरएफ सोझी घाट पर बनाए गए कंट्रोल रूम से सीसीटीवी कैमरों के जरिए भीड़ की निगरानी की गई। प्रतिमा विसर्जन के दौरान किसी तरह की अनहोनी से निपटने के लिए गोताखोर, आपदा मित्र और एसडीआरएफ की टीम को तैनात किया गया था। प्रशासनिक सतर्कता और सुरक्षा व्यवस्था के बीच सभी प्रतिमाओं का विसर्जन संपन्न हुआ। मुंगेर में दुर्गा और काली प्रतिमाओं के विसर्जन का दौर शुक्रवार की देर शाम शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो गया। शुक्रवार दोपहर तक मुंगेर की दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। इसके बाद शाम 4 बजे से जमालपुर की 10 काली प्रतिमाओं की विसर्जन शोभायात्रा शुरू हुई। इनके बाद जमालपुर की 10 दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन कराया गया। जमालपुर से आई सभी 20 प्रतिमाओं का विसर्जन मुंगेर के सोझी घाट पर किया गया। दो दिनों तक चली विसर्जन शोभायात्रा के दौरान कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। शांतिपूर्ण विसर्जन संपन्न होने पर शहरवासियों ने जिला प्रशासन के कार्यों की सराहना की। जमुई लड़की कांड से लेकर बेरोजगारी और पलायन तक जमालपुर से मुंगेर पहुंचीं काली और दुर्गा प्रतिमाओं की विसर्जन शोभायात्रा में इस बार सामाजिक और राजनीतिक मुद्दे छाए रहे। विभिन्न पूजा समितियों ने रंगीन बल्बों से सजी आकर्षक झांकियों के माध्यम से समाज की समस्याओं को सामने रखा। जमालपुर के टिपटॉप गली की बड़ी काली प्रतिमा की झांकी में जमुई में लड़की के साथ हुए कथित अभद्र व्यवहार की घटना को दर्शाया गया। इसके माध्यम से महिलाओं और बेटियों के साथ हो रहे अत्याचार पर चोट की गई। चित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया वहीं, झांकियों में मुंगेर में आई भीषण बाढ़, बिहार से पलायन, बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से दिखाया गया। शिक्षा व्यवस्था की खामियों, नीट परीक्षा में पेपर लीक के मुद्दे और डिग्री हासिल करने के बाद भी युवाओं को नौकरी नहीं मिलने की समस्या को भी झांकियों में जगह दी गई। इसके अलावा बिहार में बड़े उद्योगों की कमी और स्थायी समाधान की जरूरत को चित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। कुछ पूजा समितियों ने नमामि गंगे अभियान और गंगा की साफ-सफाई का संदेश दिया। वहीं, भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने और सामाजिक एकता बनाए रखने का संदेश भी झांकियों के माध्यम से दिया गया। दूसरी ओर, कुछ समितियों ने केंद्र और बिहार सरकार की योजनाओं को प्रदर्शित किया। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, मुफ्त राशन, आयुष्मान कार्ड और विकास कार्यों को दर्शाया गया। कंट्रोल रूम से हर प्रतिमा की निगरानी विसर्जन के दौरान जिला प्रशासन और केंद्रीय विसर्जन समिति ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। मुंगेर शहर के भगत सिंह चौक स्थित कंट्रोल रूम में मौजूद अधिकारियों और समिति के सदस्यों ने विसर्जन के लिए जा रही प्रतिमाओं की बारी-बारी से जांच की। जांच के बाद ही प्रतिमाओं को गंगा घाट की ओर जाने की अनुमति दी जा रही थी। शोभायात्रा के दौरान धारदार हथियार, लाठी-डंडे जैसी वस्तुओं को घाट तक ले जाने से रोकने की व्यवस्था की गई थी। घाट पर तैनात रहे गोताखोर और एसडीआरएफ सोझी घाट पर बनाए गए कंट्रोल रूम से सीसीटीवी कैमरों के जरिए भीड़ की निगरानी की गई। प्रतिमा विसर्जन के दौरान किसी तरह की अनहोनी से निपटने के लिए गोताखोर, आपदा मित्र और एसडीआरएफ की टीम को तैनात किया गया था। प्रशासनिक सतर्कता और सुरक्षा व्यवस्था के बीच सभी प्रतिमाओं का विसर्जन संपन्न हुआ।  

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