इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपराधिक मामले की विवेचना में अधिकारी की लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताते हुए बलिया के पुलिस अधीक्षक को मामले की जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति समीर जैन ने प्रिंस कुमार की जमानत अर्जी पर यह आदेश दिया। जानिये क्या है मामला शिकायतकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि विवेचना के दौरान जांच अधिकारी ने घटना की फुटेज तो हासिल की, लेकिन उसका सार केस डायरी में दर्ज नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि वीडियो से स्पष्ट है कि मृतक ने मरने से पहले आवेदक और अन्य आरोपियों के नाम बताए थे, मगर उसके वीडियो बयान, जो मृत्युकालिक कथन की श्रेणी में आता है, का ब्योरा भी केस डायरी में नहीं लिखा गया। कोर्ट ने जारी किए निर्देश हाईकोर्ट ने माना कि जांच अधिकारी ने विवेचना सही ढंग से नहीं की। अदालत ने निर्देश दिया कि बलिया के एस पी मामले में जांच करें और दोषी पाए जाने पर जांच अधिकारी के विरुद्ध उचित कार्रवाई करें और अगली तारीख पर व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल कर यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो। यह भी बताएं कि जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई हुई या नहीं, और यदि नहीं हुई तो क्यों नहीं। अर्जी की अगली सुनवाई 19 नवंबर 2026 को होगी।

