नालंदा विश्वविद्यालय के 55 भूटानी छात्रों का एक विशेष प्रतिनिधिमंडल आगामी 1 नवंबर को भूटान स्थित ‘गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी’ में आयोजित होने वाले ऐतिहासिक ‘प्रोजेक्ट 108’ में भाग लेगा। इस दल का नेतृत्व छात्र प्रतिनिधि शेरिंग फुंतशो कर रहे हैं। यह पहल वैश्विक शांति, सद्भाव और मानवता के समग्र कल्याण को समर्पित 108 जांगछुब चोरतेन (स्तूपों) के निर्माण का एक पावन और सामूहिक प्रयास है। कुलपति ने दिया मार्गदर्शन, प्रगाढ़ होंगे सांस्कृतिक संबंध इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और आध्यात्मिक उपक्रम में रवाना होने से पूर्व नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने छात्रों के साथ संवाद किया। कुलपति ने छात्रों को उनके दायित्वों और इस आध्यात्मिक यात्रा के महत्व पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि यह भागीदारी केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारत और भूटान के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और बौद्धिक संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ करने का माध्यम है। प्रो. चतुर्वेदी ने छात्रों को सफल और सार्थक सहभागिता के लिए विश्वविद्यालय परिवार की ओर से शुभकामनाएं दीं। नालंदा की सेवा और सद्भावना की भावना को करेंगे साकार विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, छात्र इस वृहद परियोजना में नालंदा की मूल भावना सेवा, एकता और सद्भावना का प्रतिनिधित्व करेंगे। प्राचीन काल से ही नालंदा ज्ञान और आध्यात्मिक मूल्यों का वैश्विक केंद्र रहा है, और यह दल आधुनिक संदर्भ में उसी समृद्ध विरासत को गेलेफू के मंच पर साकार करेगा। आधुनिकता और आध्यात्मिकता का संगम: माइंडफुलनेस सिटी ‘गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी’ भूटान नरेश की एक दूरदर्शी परियोजना है, जिसका उद्देश्य आधुनिक विकास को आध्यात्मिक मूल्यों और पर्यावरण संतुलन के साथ जोड़ना है। इसमें ‘प्रोजेक्ट 108’ के तहत 108 स्तूपों की स्थापना बौद्ध परंपरा और विश्व शांति की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। छात्र प्रतिनिधि शेरिंग फुंतशो ने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करते हुए अपने ही देश के इस ऐतिहासिक और पवित्र कार्य में योगदान देना पूरे दल के लिए गर्व की बात है। आयोजन को लेकर दोनों देशों के कूटनीतिक और सामाजिक हलकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। नालंदा विश्वविद्यालय के 55 भूटानी छात्रों का एक विशेष प्रतिनिधिमंडल आगामी 1 नवंबर को भूटान स्थित ‘गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी’ में आयोजित होने वाले ऐतिहासिक ‘प्रोजेक्ट 108’ में भाग लेगा। इस दल का नेतृत्व छात्र प्रतिनिधि शेरिंग फुंतशो कर रहे हैं। यह पहल वैश्विक शांति, सद्भाव और मानवता के समग्र कल्याण को समर्पित 108 जांगछुब चोरतेन (स्तूपों) के निर्माण का एक पावन और सामूहिक प्रयास है। कुलपति ने दिया मार्गदर्शन, प्रगाढ़ होंगे सांस्कृतिक संबंध इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और आध्यात्मिक उपक्रम में रवाना होने से पूर्व नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने छात्रों के साथ संवाद किया। कुलपति ने छात्रों को उनके दायित्वों और इस आध्यात्मिक यात्रा के महत्व पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि यह भागीदारी केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारत और भूटान के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और बौद्धिक संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ करने का माध्यम है। प्रो. चतुर्वेदी ने छात्रों को सफल और सार्थक सहभागिता के लिए विश्वविद्यालय परिवार की ओर से शुभकामनाएं दीं। नालंदा की सेवा और सद्भावना की भावना को करेंगे साकार विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, छात्र इस वृहद परियोजना में नालंदा की मूल भावना सेवा, एकता और सद्भावना का प्रतिनिधित्व करेंगे। प्राचीन काल से ही नालंदा ज्ञान और आध्यात्मिक मूल्यों का वैश्विक केंद्र रहा है, और यह दल आधुनिक संदर्भ में उसी समृद्ध विरासत को गेलेफू के मंच पर साकार करेगा। आधुनिकता और आध्यात्मिकता का संगम: माइंडफुलनेस सिटी ‘गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी’ भूटान नरेश की एक दूरदर्शी परियोजना है, जिसका उद्देश्य आधुनिक विकास को आध्यात्मिक मूल्यों और पर्यावरण संतुलन के साथ जोड़ना है। इसमें ‘प्रोजेक्ट 108’ के तहत 108 स्तूपों की स्थापना बौद्ध परंपरा और विश्व शांति की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। छात्र प्रतिनिधि शेरिंग फुंतशो ने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करते हुए अपने ही देश के इस ऐतिहासिक और पवित्र कार्य में योगदान देना पूरे दल के लिए गर्व की बात है। आयोजन को लेकर दोनों देशों के कूटनीतिक और सामाजिक हलकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।

