रामपुर में जेल के फांसीघर की सरकारी जमीन की खरीद-फरोख्त के मामले में सपा के राष्ट्रीय महासचिव मोहम्मद आजम खां बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए। वह जिला जेल से दोपहर करीब 3 बजे पेश हुए। सुनवाई के बाद अदालत ने अगली तारीख 2 नवंबर 2026 तय की है। इस मामले में आजम खां समेत 37 आरोपियों पर आरोप तय किए जाने हैं। मामले की सुनवाई एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (मजिस्ट्रेट ट्रायल) में चल रही है। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान आरोप तय करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। अब अदालत में 2 नवंबर को सुनवाई होगी। 2019 में दर्ज हुआ था मुकदमा गंज कोतवाली में 20 सितंबर 2019 को तत्कालीन नायब तहसीलदार कृष्ण गोपाल मिश्रा की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसमें 37 लोगों को नामजद किया गया था। आरोप है कि जेल के फांसीघर की सरकारी जमीन की खरीद-फरोख्त की गई, जबकि नियमानुसार इस जमीन को बेचा नहीं जा सकता था। नायब तहसीलदार की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी जमीन के दस्तावेजों में हेराफेरी करके उसे बेचने का आरोप है। जमीन खरीदने के बाद कुछ लोगों ने वहां मकान भी बना लिए थे। पुलिस ने जमीन बेचने और खरीदने वालों को मुकदमे में नामजद किया था। आजम खां पर आपराधिक षड्यंत्र का आरोप विवेचना के दौरान पुलिस ने आजम खां की भूमिका सामने आने का दावा किया था। पुलिस के मुताबिक, जमीन खरीदने वाले कुछ लोगों ने पूछताछ में बताया था कि उन्होंने आजम खां के कहने पर जमीन खरीदी थी। इसके आधार पर आरोपपत्र में आजम खां का नाम भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी यानी आपराधिक षड्यंत्र के तहत शामिल किया गया। मामले में आजम खां के परिवार के सदस्य भी नामजद किए गए थे। उनकी मां का निधन होने के बाद उनका नाम मुकदमे से हटा दिया गया। वहीं, आजम खां और उनके बेटे के नाम आरोपपत्र में शामिल किए गए हैं। अब अदालत में सभी आरोपियों पर आरोप तय किए जाने की प्रक्रिया लंबित है। अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी।

