मुजफ्फरपुर जिले में शारदीय नवरात्रि के समापन के साथ मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन शुरू हो गया है। विजयादशमी और एकादशी के मौके पर भक्तों ने ‘अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयकारों के साथ मां को विदाई दी। इस दौरान कई लोगों की आंखें नम थीं। शहर के सरैयागंज टावर चौक, मोतीझील, अघोरिया बाजार, रामदयालु चौक, भगवानपुर और कच्ची पक्की जैसे पूजा पंडालों में सुबह से विशेष पूजा और हवन हुआ। बंगाली समुदाय की महिलाओं ने ‘सिंदूर खेला’ की रस्म निभाई। उन्होंने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर मां को विदा किया। विसर्जन की तीन तस्वीरें देखिए जिला प्रशासन, नगर निगम ने नदियों में विसर्जन पर लगाई है रोक पर्यावरण संरक्षण और NGT के नियमों को मानते हुए जिला प्रशासन और नगर निगम ने नदियों में विसर्जन पर रोक लगाई है। इसके लिए शहर में आरडीएस कॉलेज के पीछे, चंदवारा पुल और लकड़ीढ़ाई घाट पर तीन कृत्रिम तालाब बनाए गए हैं। प्रतिमाओं का विसर्जन इन्हीं तालाबों में किया जा रहा है। नगर निगम ने 24 घंटे के भीतर अवशेष हटाकर सफाई के निर्देश दिए हैं। विसर्जन मार्गों, घाटों पर पुलिस बल मुस्तैद सुरक्षा और विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिलाधिकारी कुमार गौरव और एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा खुद विभिन्न घाटों का निरीक्षण कर रहे हैं। सभी प्रमुख विसर्जन मार्गों और कृत्रिम घाटों पर दंडाधिकारियों के साथ भारी संख्या में पुलिस बल मुस्तैद किया गया है। असामाजिक तत्वों पर पैनी नजर रखने के लिए ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। विसर्जन स्थलों पर बैरिकेडिंग, पर्याप्त रोशनी और गोताखोरों की विशेष व्यवस्था की गई है। ट्रैफिक सुचारू रखने के लिए शहर में कड़ा रूट डायवर्जन लागू किया गया है और जुलूसों में डीजे बजाने पर पूरी तरह पाबंदी है। ग्रामीण इलाकों जैसे कुढ़नी और मुशहरी और पारू इलाके में भी शांति समितियों के सहयोग से विसर्जन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो रहा है। बंगाली समुदाय की महिलाओं ने भव्य ‘सिंदूर खेला’ उत्सव मनाया वहीं, मुजफ्फरपुर के ऐतिहासिक हरिसभा बंगाली दुर्गा पूजा समिति प्रांगण में बंगाली समुदाय की महिलाओं द्वारा पारंपरिक और भव्य ‘सिंदूर खेला’ उत्सव मनाया गया। मां दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन से ठीक पहले आयोजित इस ‘सिंदूर की होली’ में पूरा माहौल भक्ति, उल्लास और भावुकता के रंगों में सराबोर हो उठा। बेटी की तरह मां को दी गई विदाई: बंगाली संस्कृति और मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा को अपने मायके आई हुई बेटी माना जाता है, जो नौ दिनों तक रहने के बाद दशमी तिथि को अपने ससुराल (कैलाश पर्वत) लौटती हैं। इसी भाव के साथ, प्रतिमा विसर्जन से पहले सुहागिन महिलाओं ने मां दुर्गा की विशेष विदाई रस्म ‘देवी वरण’ पूरी की। पारंपरिक लाल पाड़ की सफेद बनारसी साड़ियों में सजी महिलाओं ने सबसे पहले मां के चेहरे को पान के पत्तों से स्पर्श किया, उन्हें मिठाई-पान अर्पित किया और माता के चरणों व मस्तक पर सिंदूर लगाकर अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मांगा। अखंड सौभाग्य और सामाजिक एकता का प्रतीक इस रस्म के पीछे मान्यता है कि एक-दूसरे को सिंदूर लगाने से पति की लंबी आयु, वैवाहिक जीवन में खुशहाली और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। समय के साथ यह उत्सव अब केवल बंगाली समुदाय तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि मुजफ्फरपुर की स्थानीय अन्य समुदायों की सुहागिन महिलाएं भी इस सिंदूर खेला में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं। यह आयोजन शहर में सांस्कृतिक एकता और सामाजिक सद्भाव की एक खूबसूरत मिसाल पेश करता है। सिंदूर खेला के इस भव्य अनुष्ठान के बाद, मां दुर्गा की प्रतिमाओं को ढोल-नगाड़ों के साथ नम आंखों से विसर्जन घाटों की ओर ले जाया गया। मुजफ्फरपुर जिले में शारदीय नवरात्रि के समापन के साथ मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन शुरू हो गया है। विजयादशमी और एकादशी के मौके पर भक्तों ने ‘अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयकारों के साथ मां को विदाई दी। इस दौरान कई लोगों की आंखें नम थीं। शहर के सरैयागंज टावर चौक, मोतीझील, अघोरिया बाजार, रामदयालु चौक, भगवानपुर और कच्ची पक्की जैसे पूजा पंडालों में सुबह से विशेष पूजा और हवन हुआ। बंगाली समुदाय की महिलाओं ने ‘सिंदूर खेला’ की रस्म निभाई। उन्होंने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर मां को विदा किया। विसर्जन की तीन तस्वीरें देखिए जिला प्रशासन, नगर निगम ने नदियों में विसर्जन पर लगाई है रोक पर्यावरण संरक्षण और NGT के नियमों को मानते हुए जिला प्रशासन और नगर निगम ने नदियों में विसर्जन पर रोक लगाई है। इसके लिए शहर में आरडीएस कॉलेज के पीछे, चंदवारा पुल और लकड़ीढ़ाई घाट पर तीन कृत्रिम तालाब बनाए गए हैं। प्रतिमाओं का विसर्जन इन्हीं तालाबों में किया जा रहा है। नगर निगम ने 24 घंटे के भीतर अवशेष हटाकर सफाई के निर्देश दिए हैं। विसर्जन मार्गों, घाटों पर पुलिस बल मुस्तैद सुरक्षा और विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिलाधिकारी कुमार गौरव और एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा खुद विभिन्न घाटों का निरीक्षण कर रहे हैं। सभी प्रमुख विसर्जन मार्गों और कृत्रिम घाटों पर दंडाधिकारियों के साथ भारी संख्या में पुलिस बल मुस्तैद किया गया है। असामाजिक तत्वों पर पैनी नजर रखने के लिए ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। विसर्जन स्थलों पर बैरिकेडिंग, पर्याप्त रोशनी और गोताखोरों की विशेष व्यवस्था की गई है। ट्रैफिक सुचारू रखने के लिए शहर में कड़ा रूट डायवर्जन लागू किया गया है और जुलूसों में डीजे बजाने पर पूरी तरह पाबंदी है। ग्रामीण इलाकों जैसे कुढ़नी और मुशहरी और पारू इलाके में भी शांति समितियों के सहयोग से विसर्जन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो रहा है। बंगाली समुदाय की महिलाओं ने भव्य ‘सिंदूर खेला’ उत्सव मनाया वहीं, मुजफ्फरपुर के ऐतिहासिक हरिसभा बंगाली दुर्गा पूजा समिति प्रांगण में बंगाली समुदाय की महिलाओं द्वारा पारंपरिक और भव्य ‘सिंदूर खेला’ उत्सव मनाया गया। मां दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन से ठीक पहले आयोजित इस ‘सिंदूर की होली’ में पूरा माहौल भक्ति, उल्लास और भावुकता के रंगों में सराबोर हो उठा। बेटी की तरह मां को दी गई विदाई: बंगाली संस्कृति और मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा को अपने मायके आई हुई बेटी माना जाता है, जो नौ दिनों तक रहने के बाद दशमी तिथि को अपने ससुराल (कैलाश पर्वत) लौटती हैं। इसी भाव के साथ, प्रतिमा विसर्जन से पहले सुहागिन महिलाओं ने मां दुर्गा की विशेष विदाई रस्म ‘देवी वरण’ पूरी की। पारंपरिक लाल पाड़ की सफेद बनारसी साड़ियों में सजी महिलाओं ने सबसे पहले मां के चेहरे को पान के पत्तों से स्पर्श किया, उन्हें मिठाई-पान अर्पित किया और माता के चरणों व मस्तक पर सिंदूर लगाकर अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मांगा। अखंड सौभाग्य और सामाजिक एकता का प्रतीक इस रस्म के पीछे मान्यता है कि एक-दूसरे को सिंदूर लगाने से पति की लंबी आयु, वैवाहिक जीवन में खुशहाली और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। समय के साथ यह उत्सव अब केवल बंगाली समुदाय तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि मुजफ्फरपुर की स्थानीय अन्य समुदायों की सुहागिन महिलाएं भी इस सिंदूर खेला में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं। यह आयोजन शहर में सांस्कृतिक एकता और सामाजिक सद्भाव की एक खूबसूरत मिसाल पेश करता है। सिंदूर खेला के इस भव्य अनुष्ठान के बाद, मां दुर्गा की प्रतिमाओं को ढोल-नगाड़ों के साथ नम आंखों से विसर्जन घाटों की ओर ले जाया गया।

