Kolkata Durga Puja Stampede: कोलकाता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल सरकार को छूट दी है कि वह चोरबगान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ की जांच के लिए एक आयोग का गठन करे और इसके अध्यक्ष के रूप में किसी सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश को नियुक्त करे। इस घटना में 19 लोगों की जान चली गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इस जांच की निगरानी नहीं करेगा।
Kolkata High Court on Chorebagan stampede: पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान चोरबागन सार्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ के मामले में कोलकाता हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार के पास एक जांच आयोग गठित करने का पूरा अधिकार है। इस आयोग की अध्यक्षता हाई कोर्ट के एक सेवानिवृत्त जज कर सकते हैं, जो पूरे मामले की जांच करेंगे। इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि वह इस जांच की निगरानी नहीं करेगा। आयोग द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट पर आगे क्या कार्रवाई करनी है, इसका फैसला पूरी तरह से राज्य सरकार पर निर्भर करेगा।
मौजूदा जजों की कमी का हवाला
मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विट्ठलराव घुगे और न्यायमूर्ति शब्बर रशीदी की खंडपीठ ने इस घटना से जुड़ी एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। राज्य के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने उच्च न्यायालय को पत्र लिखकर जांच आयोग का नेतृत्व करने के लिए एक मौजूदा जज की सेवाएं मांगी थीं। इसके जवाब में खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि जांच आयोग में किसी मौजूदा जज को नियुक्त करने का निर्णय मुख्य न्यायाधीश के अधिकार के अंतर्गत आता है।
कोर्ट में काम के मौजूदा बोझ और जजों की कमी का हवाला देते हुए खंडपीठ ने बताया कि स्वीकृत 72 पदों में से वर्तमान में केवल 50 जज ही कार्यरत हैं। यह संख्या और भी कम होने वाली है, क्योंकि अक्टूबर और नवंबर में दो जज सेवानिवृत्त होने वाले हैं। इसलिए यदि कोई मौजूदा जज उपलब्ध नहीं है, तो राज्य सरकार जांच आयोग अधिनियम 1952 के तहत किसी सेवानिवृत्त जज को नियुक्त कर सकती है।
जांच की निगरानी नहीं करेगा हाई कोर्ट
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि वह इस जांच की न्यायिक निगरानी नहीं करेगा। डिवीजन बेंच ने कहा कि कमीशन ऑफ इंक्वायरी एक्ट के प्रावधानों को देखते हुए हाई कोर्ट पूरी प्रक्रिया की निगरानी नहीं करेगा। एक बार जांच पूरी हो जाने और आयोग द्वारा राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दिए जाने के बाद, आगे क्या कदम उठाए जाएं, यह तय करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी होगी। हालांकि, कोर्ट ने जनहित याचिका (PIL) को खारिज नहीं किया है। बल्कि, मामले को लंबित रखा है, ताकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर संबंधित पक्ष फिर से कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकें।
याचिकाकर्ता ने क्या कहा
सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता तापस कुमार डे की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने अदालत को बताया कि कई कारणों से वहां अफरा-तफरी की स्थिति पैदा हो गई थी। उन्होंने कहा कि पूजा पंडालों में प्रवेश के लिए संकरे रास्तों का इस्तेमाल, बिना प्रशिक्षण वाली समितियों को जिम्मेदारियां सौंपना, वेंटिलेशन की खराब व्यवस्था और अपर्याप्त रोशनी के कारण वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इसके अलावा, अचानक हुई भारी बारिश ने स्थिति को और भी बेकाबू कर दिया। साथ ही, पुलिसकर्मियों की कमी और उचित प्रबंधन के अभाव ने हालात को और बिगाड़ दिया, जिससे भगदड़ मच गई।

