यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना की स्टीवर्ड ऑब्जर्वेटरी में असिस्टेंट रिसर्च प्रोफेसर, डॉ. राम्या आंचे को नासा के पफिन्स मिशन का प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर चुना गया है। पफिन्स का पूरा नाम पोलारिमेट्री इन द अल्ट्रावायलेट टू फाइंड फीचर्स इन इंटरस्टेलर डस्ट है। मिशन की लागत 168 करोड़ नासा ने अपने एस्ट्रोफिजिक्स पायनियर्स कार्यक्रम के तहत राम्या को इस मिशन का प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर अनाउंस किया। पफिन्स मिशन की लागत 168 करोड़ आंकी गई है। तारों और ग्रहों के निर्माण में मदद इस मिशन को 2030 में लॉन्च करने का लक्ष्य है। इसके केंद्र में एक ‘स्मॉलसैट’ (छोटा उपग्रह) होगा, जिसमें लगभग 10 इंच व्यास वाला टेलीस्कोप लगा होगा। यह लगभग 70 तारों से आने वाली अल्ट्रावायलेट रोशनी का अध्ययन करेगा, ताकि तारों के बीच मौजूद धूल के बहुत छोटे कणों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके। इनसे यह समझने में मदद मिलेगी कि ब्रह्मांड में तारों और ग्रहों का निर्माण कैसे होता है। इतने छोटे कण साधारण दूरबीन से नहीं दिखते उन्होंने इन कणों को लगभग सामान्य सर्दी-जुकाम वाले वायरस के आकार का बताया। हालांकि ये साधारण दूरबीन से दिखाई नहीं देते, लेकिन ये इस बात पर असर डालते हैं कि तारों का प्रकाश आकाशगंगा में किस तरह से यात्रा करता है। ये उन प्रक्रियाओं से जुड़े होते हैं जिनसे तारे और ग्रह बनते हैं। भारतीय मूल की मशहूर एस्ट्रोनॉमर डॉ. राम्या मंजूनाथ आंचे भारतीय मूल की मशहूर एस्ट्रोनॉमर और रिसर्चर हैं। फिलहाल वे अमेरिका के एरिजोना विश्वविद्यालय के स्टीवर्ड ऑब्जर्वेटरी में असिस्टेंट रिसर्च प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। इस मिशन के लिए राम्या का चयन नासा की कॉम्पिटिटिव ROSES के माध्यम से हुआ। राम्या ने पफिन्स का प्रस्ताव तब जमा किया था, जब वह पोस्टडॉक्टरल रिसर्चर थीं। ——————————————————
बेंगलुरू की राम्या आंचे बनीं NASA मिशन की प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर:168 करोड़ के मिशन को लीड करेंगी, जानें कंप्लीट प्रोफाइल

