मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लेकर जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के बयान पर बिहार में राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से एनडीए समर्थित प्रत्याशी अभिषेक झा ने प्रशांत किशोर के बयान पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने इसे आपत्तिजनक और अमर्यादित बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना लोकतांत्रिक मर्यादा के विपरीत है। अभिषेक झा ने कहा कि सम्राट चौधरी बिहार में एनडीए का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में राज्य में विकास कार्य आगे बढ़ रहे हैं और सरकार जनता की सेवा के लिए काम कर रही है। ऐसे जनसेवक के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन विरोध के नाम पर भाषा की मर्यादा नहीं भूलनी चाहिए। अभिषेक झा ने प्रशांत किशोर पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के खिलाफ इस तरह के बयान उनकी हताशा और निराशा को दर्शाते हैं। उन्होंने दावा किया कि तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में जन सुराज समर्थित प्रत्याशी की हार तय है। उनके मुताबिक, हार की आशंका से निराश होकर प्रशांत किशोर इस तरह के बयान दे रहे हैं। 10 अक्टूबर को सीतामढ़ी में दिया था बयान दरअसल, प्रशांत किशोर ने 10 अक्टूबर को सीतामढ़ी के एक निजी होटल के सभागार में तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जन सुराज के प्रत्याशी बी. मोहन के समर्थन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। प्रशांत किशोर ने बिहार में जाति देखकर एनकाउंटर किए जाने का आरोप लगाया था। इसी क्रम में उन्होंने कहा था कि यदि अपराधियों का एनकाउंटर करना ही है, तो बिहार के सबसे बड़े अपराधी सम्राट चौधरी हैं और उन्हें गोली मार देनी चाहिए। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई है। अब एनडीए समर्थित प्रत्याशी अभिषेक झा ने इस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताया है। ‘राजनीतिक विरोध हो, लेकिन भाषा की मर्यादा जरूरी’ अभिषेक झा ने कहा कि लोकतंत्र में सभी राजनीतिक दलों और नेताओं को सरकार की नीतियों की आलोचना करने और विरोध जताने का अधिकार है। हालांकि, आलोचना करते समय भाषा की मर्यादा बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव में जनता विकास, जनसेवा और काम के आधार पर अपना फैसला करती है। राजनीतिक बयानबाजी से जनता का भरोसा नहीं जीता जा सकता। अभिषेक झा ने दावा किया कि तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता जन सुराज समर्थित प्रत्याशी को स्वीकार नहीं करेंगे और एनडीए के पक्ष में फैसला देंगे। प्रशांत किशोर की टिप्पणी को लेकर उठे विवाद के बीच अब निगाहें इस बात पर हैं कि जन सुराज और एनडीए की ओर से आगे क्या राजनीतिक प्रतिक्रिया आती है। फिलहाल, इस बयान ने तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनावी माहौल में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लेकर जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के बयान पर बिहार में राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से एनडीए समर्थित प्रत्याशी अभिषेक झा ने प्रशांत किशोर के बयान पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने इसे आपत्तिजनक और अमर्यादित बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना लोकतांत्रिक मर्यादा के विपरीत है। अभिषेक झा ने कहा कि सम्राट चौधरी बिहार में एनडीए का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में राज्य में विकास कार्य आगे बढ़ रहे हैं और सरकार जनता की सेवा के लिए काम कर रही है। ऐसे जनसेवक के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन विरोध के नाम पर भाषा की मर्यादा नहीं भूलनी चाहिए। अभिषेक झा ने प्रशांत किशोर पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के खिलाफ इस तरह के बयान उनकी हताशा और निराशा को दर्शाते हैं। उन्होंने दावा किया कि तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में जन सुराज समर्थित प्रत्याशी की हार तय है। उनके मुताबिक, हार की आशंका से निराश होकर प्रशांत किशोर इस तरह के बयान दे रहे हैं। 10 अक्टूबर को सीतामढ़ी में दिया था बयान दरअसल, प्रशांत किशोर ने 10 अक्टूबर को सीतामढ़ी के एक निजी होटल के सभागार में तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जन सुराज के प्रत्याशी बी. मोहन के समर्थन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। प्रशांत किशोर ने बिहार में जाति देखकर एनकाउंटर किए जाने का आरोप लगाया था। इसी क्रम में उन्होंने कहा था कि यदि अपराधियों का एनकाउंटर करना ही है, तो बिहार के सबसे बड़े अपराधी सम्राट चौधरी हैं और उन्हें गोली मार देनी चाहिए। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई है। अब एनडीए समर्थित प्रत्याशी अभिषेक झा ने इस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताया है। ‘राजनीतिक विरोध हो, लेकिन भाषा की मर्यादा जरूरी’ अभिषेक झा ने कहा कि लोकतंत्र में सभी राजनीतिक दलों और नेताओं को सरकार की नीतियों की आलोचना करने और विरोध जताने का अधिकार है। हालांकि, आलोचना करते समय भाषा की मर्यादा बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव में जनता विकास, जनसेवा और काम के आधार पर अपना फैसला करती है। राजनीतिक बयानबाजी से जनता का भरोसा नहीं जीता जा सकता। अभिषेक झा ने दावा किया कि तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता जन सुराज समर्थित प्रत्याशी को स्वीकार नहीं करेंगे और एनडीए के पक्ष में फैसला देंगे। प्रशांत किशोर की टिप्पणी को लेकर उठे विवाद के बीच अब निगाहें इस बात पर हैं कि जन सुराज और एनडीए की ओर से आगे क्या राजनीतिक प्रतिक्रिया आती है। फिलहाल, इस बयान ने तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनावी माहौल में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर दिया है।

