दुर्गा पूजा में इस बार पटना के एतवारपुर का पूजा पंडाल श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण बनने जा रहा है। यहां ओडिशा के पुरी स्थित विश्वप्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ मंदिर की थीम पर भव्य पंडाल तैयार किया गया है। इसकी खासियत सप्तमी से नवमी तक होने वाला 3D मैपिंग लाइट एंड साउंड शो है। इसमें रंग-बिरंगी रोशनी, भक्तिमय संगीत और आधुनिक तकनीक के जरिए पौराणिक प्रसंगों को जीवंत रूप में दिखाया जाएगा। पूजा कमेटी का दावा है कि बिहार में पहली बार किसी दुर्गा पूजा पंडाल में इस स्तर का 3D मैपिंग शो हो रहा रहा है। करीब 60 दिनों की मेहनत और 85 से 90 लाख रुपए की लागत से इस पंडाल को तैयार किया है। 3D मैपिंग तकनीक से पंडाल की दीवारों पर मां दुर्गा और राक्षसों से जुड़े अलग-अलग दृश्य दिखाए जाएंगे, जिससे इमारत जीवंत महसूस होगी। एतवारपुर का पूजा पंडाल, देखिए 3D मैपिंग शो की तस्वीर दो महीने की मेहनत से तैयार हुआ भव्य पंडाल दुर्गा पूजा कमेटी के अध्यक्ष मुनीर यादव ने बताया, इस तरह का 3D मैपिंग लाइट एंड साउंड शो आमतौर पर महानगरों में देखने को मिलता है। बिहार में पहली बार इस स्तर का आयोजन करने का प्रयास किया गया है। उनका उद्देश्य पटना और आसपास के लोगों को अपने ही शहर में आधुनिक तकनीक से सजा एक भव्य धार्मिक आयोजन देखने का अवसर उपलब्ध कराना है। भगवान जगन्नाथ मंदिर की थीम पर बना पंडाल मुनीर यादव ने बताया, पुरी के जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर पंडाल तैयार करने में लगभग दो महीने तक लगातार काम किया गया। पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश से आए 80 से अधिक कारीगरों ने दिन-रात मेहनत कर इस पंडाल को आकर्षक स्वरूप दिया है। कारीगरों ने इसकी बनावट, सजावट और बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया है, ताकि श्रद्धालुओं को मंदिर जैसी भव्यता का अनुभव हो सके। पंडाल निर्माण में पारंपरिक कलाकारी और आधुनिक तकनीक का समन्वय किया गया है। कमेटी का कहना है कि इस बार श्रद्धालुओं को केवल मां दुर्गा के दर्शन ही नहीं, बल्कि एक ऐसी झांकी देखने को मिलेगी, जिसमें धार्मिक आस्था के साथ तकनीकी आकर्षण भी शामिल होगा। दीवारों पर दिखेंगे माता दुर्गा और राक्षसों की सेना पंडाल का सबसे बड़ा आकर्षण सप्तमी से नवमी तक चलने वाला 3D मैपिंग लाइट एंड साउंड शो होगा। इसके लिए मुंबई से तकनीकी विशेषज्ञों को बुलाया गया है। विशेष उपकरणों और प्रोजेक्शन तकनीक की मदद से पंडाल की दीवारों पर अलग-अलग दृश्य दिखाए जाएंगे। शो में माता दुर्गा और राक्षसों से जुड़े पौराणिक प्रसंगों को रोशनी, ध्वनि और दृश्य प्रभावों के साथ प्रस्तुत करने की तैयारी है। इसमें बाघ और शेर की दहाड़, झरने और बाग-बगीचों से जुड़े दृश्य तथा भक्तिमय संगीत का इस्तेमाल किया जाएगा। रंग-बिरंगी रोशनी और ध्वनि के तालमेल से ऐसा माहौल बनाने की कोशिश है, जिससे श्रद्धालुओं को पौराणिक कथा अपनी आंखों के सामने घटित होती हुई महसूस हो। 85 से 90 लाख रुपए खर्च, मुंबई से आए विशेषज्ञ कमेटी अध्यक्ष मुनीर यादव के अनुसार, पंडाल के निर्माण, सजावट और आयोजन पर लगभग 85 से 90 लाख रुपए खर्च किए गए हैं। 3D मैपिंग शो को आकर्षक बनाने के लिए मुंबई के विशेषज्ञ तकनीकी तैयारियों में जुटे हैं। पंडाल की बनावट के अनुरूप दृश्यों को प्रदर्शित करने के लिए विशेष प्रकाश व्यवस्था और उपकरण लगाए जा रहे हैं। आयोजकों की कोशिश है कि शो के दौरान रोशनी, आवाज और दृश्य एक साथ तालमेल के साथ प्रस्तुत हों। बनारस की गंगा आरती की तर्ज पर होगी संध्याकालीन आरती एतवारपुर के इस पूजा पंडाल में आधुनिक तकनीक के साथ पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों का भी विशेष ध्यान रखा गया है। यहां बनारस की गंगा आरती की तर्ज पर संध्याकालीन आरती आयोजित की जा रही है। इसके लिए वाराणसी से पांच पंडितों की टीम बुलाई गई है। आयोजकों के मुताबिक, प्रतिपदा से नवमी तक सुबह और शाम आरती की व्यवस्था की गई है। मंत्रोच्चार और दीपों की रोशनी के बीच होने वाली आरती श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है। भीड़ को देखते हुए पुलिस की विशेष व्यवस्था पंडाल में श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा के इंतजाम किए हैं। परसा बाजार थाना प्रभारी मेनका रानी ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। उन्होंने बताया कि भीड़ नियंत्रण और किसी भी अप्रिय घटना से बचाव के लिए पुलिस लगातार निगरानी कर रही है। महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। भीड़ बढ़ने की स्थिति को देखते हुए यातायात और सुरक्षा व्यवस्था पर भी नजर रखी जा रही है। आस्था और आधुनिक तकनीक का संगम पुरी के जगन्नाथ मंदिर की थीम पर बना भव्य पंडाल, बनारस की तर्ज पर संध्याकालीन आरती और 3D मैपिंग लाइट एंड साउंड शो इस बार एतवारपुर की दुर्गापूजा को खास बना रहे हैं। आयोजन समिति को उम्मीद है कि सप्तमी से नवमी के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचेंगे। आधुनिक तकनीक के जरिए धार्मिक प्रसंगों को प्रस्तुत करने की यह पहल बच्चों, युवाओं और परिवारों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती है। दुर्गा पूजा में इस बार पटना के एतवारपुर का पूजा पंडाल श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण बनने जा रहा है। यहां ओडिशा के पुरी स्थित विश्वप्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ मंदिर की थीम पर भव्य पंडाल तैयार किया गया है। इसकी खासियत सप्तमी से नवमी तक होने वाला 3D मैपिंग लाइट एंड साउंड शो है। इसमें रंग-बिरंगी रोशनी, भक्तिमय संगीत और आधुनिक तकनीक के जरिए पौराणिक प्रसंगों को जीवंत रूप में दिखाया जाएगा। पूजा कमेटी का दावा है कि बिहार में पहली बार किसी दुर्गा पूजा पंडाल में इस स्तर का 3D मैपिंग शो हो रहा रहा है। करीब 60 दिनों की मेहनत और 85 से 90 लाख रुपए की लागत से इस पंडाल को तैयार किया है। 3D मैपिंग तकनीक से पंडाल की दीवारों पर मां दुर्गा और राक्षसों से जुड़े अलग-अलग दृश्य दिखाए जाएंगे, जिससे इमारत जीवंत महसूस होगी। एतवारपुर का पूजा पंडाल, देखिए 3D मैपिंग शो की तस्वीर दो महीने की मेहनत से तैयार हुआ भव्य पंडाल दुर्गा पूजा कमेटी के अध्यक्ष मुनीर यादव ने बताया, इस तरह का 3D मैपिंग लाइट एंड साउंड शो आमतौर पर महानगरों में देखने को मिलता है। बिहार में पहली बार इस स्तर का आयोजन करने का प्रयास किया गया है। उनका उद्देश्य पटना और आसपास के लोगों को अपने ही शहर में आधुनिक तकनीक से सजा एक भव्य धार्मिक आयोजन देखने का अवसर उपलब्ध कराना है। भगवान जगन्नाथ मंदिर की थीम पर बना पंडाल मुनीर यादव ने बताया, पुरी के जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर पंडाल तैयार करने में लगभग दो महीने तक लगातार काम किया गया। पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश से आए 80 से अधिक कारीगरों ने दिन-रात मेहनत कर इस पंडाल को आकर्षक स्वरूप दिया है। कारीगरों ने इसकी बनावट, सजावट और बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया है, ताकि श्रद्धालुओं को मंदिर जैसी भव्यता का अनुभव हो सके। पंडाल निर्माण में पारंपरिक कलाकारी और आधुनिक तकनीक का समन्वय किया गया है। कमेटी का कहना है कि इस बार श्रद्धालुओं को केवल मां दुर्गा के दर्शन ही नहीं, बल्कि एक ऐसी झांकी देखने को मिलेगी, जिसमें धार्मिक आस्था के साथ तकनीकी आकर्षण भी शामिल होगा। दीवारों पर दिखेंगे माता दुर्गा और राक्षसों की सेना पंडाल का सबसे बड़ा आकर्षण सप्तमी से नवमी तक चलने वाला 3D मैपिंग लाइट एंड साउंड शो होगा। इसके लिए मुंबई से तकनीकी विशेषज्ञों को बुलाया गया है। विशेष उपकरणों और प्रोजेक्शन तकनीक की मदद से पंडाल की दीवारों पर अलग-अलग दृश्य दिखाए जाएंगे। शो में माता दुर्गा और राक्षसों से जुड़े पौराणिक प्रसंगों को रोशनी, ध्वनि और दृश्य प्रभावों के साथ प्रस्तुत करने की तैयारी है। इसमें बाघ और शेर की दहाड़, झरने और बाग-बगीचों से जुड़े दृश्य तथा भक्तिमय संगीत का इस्तेमाल किया जाएगा। रंग-बिरंगी रोशनी और ध्वनि के तालमेल से ऐसा माहौल बनाने की कोशिश है, जिससे श्रद्धालुओं को पौराणिक कथा अपनी आंखों के सामने घटित होती हुई महसूस हो। 85 से 90 लाख रुपए खर्च, मुंबई से आए विशेषज्ञ कमेटी अध्यक्ष मुनीर यादव के अनुसार, पंडाल के निर्माण, सजावट और आयोजन पर लगभग 85 से 90 लाख रुपए खर्च किए गए हैं। 3D मैपिंग शो को आकर्षक बनाने के लिए मुंबई के विशेषज्ञ तकनीकी तैयारियों में जुटे हैं। पंडाल की बनावट के अनुरूप दृश्यों को प्रदर्शित करने के लिए विशेष प्रकाश व्यवस्था और उपकरण लगाए जा रहे हैं। आयोजकों की कोशिश है कि शो के दौरान रोशनी, आवाज और दृश्य एक साथ तालमेल के साथ प्रस्तुत हों। बनारस की गंगा आरती की तर्ज पर होगी संध्याकालीन आरती एतवारपुर के इस पूजा पंडाल में आधुनिक तकनीक के साथ पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों का भी विशेष ध्यान रखा गया है। यहां बनारस की गंगा आरती की तर्ज पर संध्याकालीन आरती आयोजित की जा रही है। इसके लिए वाराणसी से पांच पंडितों की टीम बुलाई गई है। आयोजकों के मुताबिक, प्रतिपदा से नवमी तक सुबह और शाम आरती की व्यवस्था की गई है। मंत्रोच्चार और दीपों की रोशनी के बीच होने वाली आरती श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है। भीड़ को देखते हुए पुलिस की विशेष व्यवस्था पंडाल में श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा के इंतजाम किए हैं। परसा बाजार थाना प्रभारी मेनका रानी ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। उन्होंने बताया कि भीड़ नियंत्रण और किसी भी अप्रिय घटना से बचाव के लिए पुलिस लगातार निगरानी कर रही है। महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। भीड़ बढ़ने की स्थिति को देखते हुए यातायात और सुरक्षा व्यवस्था पर भी नजर रखी जा रही है। आस्था और आधुनिक तकनीक का संगम पुरी के जगन्नाथ मंदिर की थीम पर बना भव्य पंडाल, बनारस की तर्ज पर संध्याकालीन आरती और 3D मैपिंग लाइट एंड साउंड शो इस बार एतवारपुर की दुर्गापूजा को खास बना रहे हैं। आयोजन समिति को उम्मीद है कि सप्तमी से नवमी के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचेंगे। आधुनिक तकनीक के जरिए धार्मिक प्रसंगों को प्रस्तुत करने की यह पहल बच्चों, युवाओं और परिवारों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती है।

