प्रयागराज में शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन बुधवार को अलोपीबाग स्थित प्रसिद्ध मां आलोप शंकरी मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। दिन चढ़ने के साथ दर्शन करने वालों की संख्या बढ़ती गई। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की चहल-पहल के बीच माता के जयकारे गूंजते रहे। भक्तों ने मां को नारियल, चुनरी, फूल और प्रसाद अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। नवरात्रि के अवसर पर मंदिर परिसर में प्रसाद और पूजा सामग्री की दुकानें भी सजी हुई हैं। इन दुकानों पर श्रद्धालु नारियल, चुनरी, फूल-माला, अगरबत्ती और अन्य पूजन सामग्री खरीदते नजर आए। दर्शन करने पहुंच रहे भक्त पहले पूजा सामग्री लेते हैं और फिर मां के दरबार में हाजिरी लगाकर आशीर्वाद मांगते हैं। मंदिर परिसर में दर्शनार्थियों की भीड़ और दुकानों पर लोगों की आवाजाही से पूरे क्षेत्र में धार्मिक माहौल बना हुआ है।
पालने के नीचे स्थित कुंड का विशेष महत्व मां आलोप शंकरी मंदिर की सबसे खास विशेषता यह है कि यहां देवी की पारंपरिक प्रतिमा के बजाय पालने की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मंदिर में मां के पालने के दर्शन का विशेष महत्व है। पालने के नीचे स्थित कुंड भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। भक्त कुंड के दर्शन कर मां का स्मरण करते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना करते हैं। जलपा माता की मान्यता और कुंड के जल के प्रति आस्था मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं में जलपा माता का भी उल्लेख किया जाता है। श्रद्धालु माता को शक्ति और कल्याण का प्रतीक मानकर पूजा-अर्चना करते हैं। वहीं, कुंड के जल को लेकर भी भक्तों में गहरी आस्था है। स्थानीय मान्यताओं में इस जल को औषधीय गुणों वाला बताया जाता है, हालांकि इसके औषधीय प्रभावों की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं है। नवरात्रि के पांचवें दिन मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं ने पालने और कुंड के दर्शन किए। भक्तों ने प्रसाद चढ़ाकर मां से सुख-शांति और खुशहाली की कामना की। मंदिर परिसर में दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही।

