भागलपुर- रेणु देवी हत्याकांड में दोषी को उम्रकैद:दो साल बाद आया अदालत का फैसला; शरीर पर छह जख्म और गायब सिर मिला था

भागलपुर- रेणु देवी हत्याकांड में दोषी को उम्रकैद:दो साल बाद आया अदालत का फैसला; शरीर पर छह जख्म और गायब सिर मिला था

दो साल पुराने रेणु देवी हत्याकांड में अदालत ने फैसला सुनाया है। दोषी को उम्रकैद की सजा और 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। रेणु देवी का सिर कटा शव मिला था, जिस पर धारदार हथियार से छह जख्म थे। साल 2023 में मिले शव की पहचान करना पुलिस के लिए चुनौती थी। करीब आठ दिन बाद सिर बरामद हुआ। इसके बाद मृतका की मां के डीएनए नमूने से मिलान कर पहचान की पुष्टि हुई। रेणु देवी तीन बच्चों की मां थीं और उनकी दूसरी शादी अरविंद पासवान से हुई थी। घटना के समय वह मायके गई थीं। पति, जेठ और ससुराल वालों ने उन्हें मेला देखने के लिए ससुराल बुलाया था। मृतका के जेठ ने स्वीकार किया था अपना जुर्म घटना वाले दिन रेणु घर से निकलीं, लेकिन शाम होते-होते उनका मोबाइल फोन बंद हो गया। परिजनों को जब उनसे संपर्क नहीं हो सका तो चिंता बढ़ने लगी। अगले दिन जब घरवालों को लाश के बारे में जानकारी मिली। कपड़ों से शव की पहचान हुई थी, जबकि रेणु का सिर नहीं मिला था। रेणु के शरीर पर धारदार हथियार से कई वार किए जाने के निशान थे। मामले में सामने आए विवरण के मुताबिक, रेणु देवी के शरीर पर छह से सात जगह गंभीर चोटों के निशान पाए गए थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी धारदार हथियार से किए गए वार और गला काटकर हत्या किए जाने की बात सामने आई थी। पुलिस को यह पता लगाना था कि महिला की हत्या किसने की, वारदात किन परिस्थितियों में हुई और मृतका का सिर कहां छिपाया गया। इस दौरान जांच की दिशा में जुटाए गए साक्ष्यों और आरोपियों से पूछताछ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मामले में गिरफ्तार किए गए मृतका के जेठ ने अपराध स्वीकार किया था। हालांकि, दोषसिद्धि का आधार अदालत में प्रस्तुत साक्ष्य और न्यायिक निष्कर्ष होते हैं। आठ दिन बाद मिला सिर, मां के डीएनए से खुला पहचान का राज इस हत्याकांड की जांच में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब करीब आठ दिन बाद रेणु देवी का सिर बरामद किया गया। सिर मिलने के बाद भी उसकी पहचान की वैज्ञानिक पुष्टि करना जरूरी था। इसके लिए मृतका की मां का डीएनए नमूना लिया गया और बरामद नरमुंड से प्राप्त नमूने का मिलान कराया गया। डीएनए जांच में संबंध की पुष्टि हुई। इससे बरामद सिर और मृतका की पहचान के बीच संबंध स्थापित करने में मदद मिली। इस तरह एक ओर पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हत्या की प्रकृति को समझने में सहायता मिली, तो दूसरी ओर डीएनए जांच ने मृतका की पहचान की पुष्टि की। गंभीर आपराधिक मामलों में वैज्ञानिक साक्ष्य किस तरह जांच की दिशा को मजबूत करते हैं, यह मामला इसका उदाहरण बना। यह फैसला द्वितीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह विशेष न्यायाधीश, निगरानी दीपक कुमार की अदालत से संबंधित है। अदालत ने दोषी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या के अपराध में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अतिरिक्त 10 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया गया। जुर्माना जमा नहीं करने की स्थिति में दो महीने की अतिरिक्त सजा भुगतने का प्रावधान बताया गया है। अदालत के इस फैसले से मामले में दोषी के खिलाफ न्यायिक कार्रवाई का महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ है। हालांकि, मामले में अन्य नामजद व्यक्तियों की भूमिका और उनके संबंध में अंतिम न्यायिक स्थिति को अलग-अलग देखना जरूरी है। पांच लोगों के नाम आए सामने, पीड़ित परिवार ने मांगा इंसाफ इस मामले में उमेश पासवान, अरविंद पासवान, बिच्छू पासवान, कोयलो देवी और मुन्नी देवी के नाम सामने आने की जानकारी दी गई है। हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम आरोपियों की सूची में होना अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। प्रत्येक आरोपी के संबंध में अदालत के निष्कर्ष और न्यायिक स्थिति अलग-अलग हो सकती है। मृतका की मां सीता मौसमाता ने भी मामले में न्याय की मांग की थी। पीड़ित पक्ष की ओर से सभी दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग किए जाने की बात सामने आई है। तीन बच्चों की मां की इस तरह हत्या किए जाने से परिवार को गहरा आघात पहुंचा था। दो साल बाद आया फैसला, वैज्ञानिक जांच की अहमियत फिर सामने रेणु देवी हत्याकांड में सिर की बरामदगी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डीएनए मिलान ने जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मृतका की पहचान की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाना जरूरी था, क्योंकि शव का सिर गायब था। ऐसे में मां के डीएनए से जैविक संबंध की पुष्टि ने जांच को अहम आधार दिया। दो साल पुराने रेणु देवी हत्याकांड में अदालत ने फैसला सुनाया है। दोषी को उम्रकैद की सजा और 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। रेणु देवी का सिर कटा शव मिला था, जिस पर धारदार हथियार से छह जख्म थे। साल 2023 में मिले शव की पहचान करना पुलिस के लिए चुनौती थी। करीब आठ दिन बाद सिर बरामद हुआ। इसके बाद मृतका की मां के डीएनए नमूने से मिलान कर पहचान की पुष्टि हुई। रेणु देवी तीन बच्चों की मां थीं और उनकी दूसरी शादी अरविंद पासवान से हुई थी। घटना के समय वह मायके गई थीं। पति, जेठ और ससुराल वालों ने उन्हें मेला देखने के लिए ससुराल बुलाया था। मृतका के जेठ ने स्वीकार किया था अपना जुर्म घटना वाले दिन रेणु घर से निकलीं, लेकिन शाम होते-होते उनका मोबाइल फोन बंद हो गया। परिजनों को जब उनसे संपर्क नहीं हो सका तो चिंता बढ़ने लगी। अगले दिन जब घरवालों को लाश के बारे में जानकारी मिली। कपड़ों से शव की पहचान हुई थी, जबकि रेणु का सिर नहीं मिला था। रेणु के शरीर पर धारदार हथियार से कई वार किए जाने के निशान थे। मामले में सामने आए विवरण के मुताबिक, रेणु देवी के शरीर पर छह से सात जगह गंभीर चोटों के निशान पाए गए थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी धारदार हथियार से किए गए वार और गला काटकर हत्या किए जाने की बात सामने आई थी। पुलिस को यह पता लगाना था कि महिला की हत्या किसने की, वारदात किन परिस्थितियों में हुई और मृतका का सिर कहां छिपाया गया। इस दौरान जांच की दिशा में जुटाए गए साक्ष्यों और आरोपियों से पूछताछ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मामले में गिरफ्तार किए गए मृतका के जेठ ने अपराध स्वीकार किया था। हालांकि, दोषसिद्धि का आधार अदालत में प्रस्तुत साक्ष्य और न्यायिक निष्कर्ष होते हैं। आठ दिन बाद मिला सिर, मां के डीएनए से खुला पहचान का राज इस हत्याकांड की जांच में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब करीब आठ दिन बाद रेणु देवी का सिर बरामद किया गया। सिर मिलने के बाद भी उसकी पहचान की वैज्ञानिक पुष्टि करना जरूरी था। इसके लिए मृतका की मां का डीएनए नमूना लिया गया और बरामद नरमुंड से प्राप्त नमूने का मिलान कराया गया। डीएनए जांच में संबंध की पुष्टि हुई। इससे बरामद सिर और मृतका की पहचान के बीच संबंध स्थापित करने में मदद मिली। इस तरह एक ओर पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हत्या की प्रकृति को समझने में सहायता मिली, तो दूसरी ओर डीएनए जांच ने मृतका की पहचान की पुष्टि की। गंभीर आपराधिक मामलों में वैज्ञानिक साक्ष्य किस तरह जांच की दिशा को मजबूत करते हैं, यह मामला इसका उदाहरण बना। यह फैसला द्वितीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह विशेष न्यायाधीश, निगरानी दीपक कुमार की अदालत से संबंधित है। अदालत ने दोषी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या के अपराध में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अतिरिक्त 10 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया गया। जुर्माना जमा नहीं करने की स्थिति में दो महीने की अतिरिक्त सजा भुगतने का प्रावधान बताया गया है। अदालत के इस फैसले से मामले में दोषी के खिलाफ न्यायिक कार्रवाई का महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ है। हालांकि, मामले में अन्य नामजद व्यक्तियों की भूमिका और उनके संबंध में अंतिम न्यायिक स्थिति को अलग-अलग देखना जरूरी है। पांच लोगों के नाम आए सामने, पीड़ित परिवार ने मांगा इंसाफ इस मामले में उमेश पासवान, अरविंद पासवान, बिच्छू पासवान, कोयलो देवी और मुन्नी देवी के नाम सामने आने की जानकारी दी गई है। हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम आरोपियों की सूची में होना अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। प्रत्येक आरोपी के संबंध में अदालत के निष्कर्ष और न्यायिक स्थिति अलग-अलग हो सकती है। मृतका की मां सीता मौसमाता ने भी मामले में न्याय की मांग की थी। पीड़ित पक्ष की ओर से सभी दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग किए जाने की बात सामने आई है। तीन बच्चों की मां की इस तरह हत्या किए जाने से परिवार को गहरा आघात पहुंचा था। दो साल बाद आया फैसला, वैज्ञानिक जांच की अहमियत फिर सामने रेणु देवी हत्याकांड में सिर की बरामदगी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डीएनए मिलान ने जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मृतका की पहचान की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाना जरूरी था, क्योंकि शव का सिर गायब था। ऐसे में मां के डीएनए से जैविक संबंध की पुष्टि ने जांच को अहम आधार दिया।  

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