पश्चिम चंपारण के चनपटिया में दिलशाद अंसारी की पुलिस हिरासत में मौत का मामला अब राजनीतिक चर्चा में है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने पीड़ित परिवार से वीडियो कॉल पर बात की और घटना की जानकारी ली। परिजनों के अनुसार, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने उनसे करीब 3 मिनट तक बातचीत की, जिसमें उन्होंने जल्दी ही न्याय दिलाने का भरोसा दिया। दरअसल, 12 अक्टूबर को दिलशाद को रात दो बजे पुलिस गिरफ्तार करके ले गई, इसके कुछ देर बाद उसकी मौत की जानकारी मिली। परिवार ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मौत के मामले में हत्या की आशंका जताई है। पूरा मामला सिलसिलेवार पढ़िए,, पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया स्थित औरैया गांव निवासी अकबर मियां के बेटे दिलशाद अंसारी को गिरफ्तार करने के लिए 12 अक्टूबर की रात करीब 2 बजे पुलिस उसके घर पहुंची थी। पुलिस सुभद्रा थाना क्षेत्र के एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में दिलशाद को गिरफ्तार करने गई थी। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद दिलशाद को अपने साथ ले जाया जा रहा था। इसी दौरान उसने गाड़ी से कूदकर भागने की कोशिश की, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे आनन-फानन में अनुमंडलीय अस्पताल नरकटियागंज में भर्ती कराया गया। हालत नाजुक होने पर डॉक्टरों ने उसे जीएमसीएच बेतिया रेफर कर दिया। वहां इलाज के दौरान दिलशाद की मौत हो गई। पिता का दावा- बातचीत के बहाने घर पहुंची थी पुलिस दिलशाद के पिता अकबर अंसारी ने बताया कि आधी रात को दो थानों की पुलिस उनके घर पहुंची थी। पुलिस ने कहा कि दिलशाद से थोड़ी बातचीत करनी है, उसे बुला दीजिए। इस पर परिजनों ने घर का मुख्य दरवाजा खोल दिया। अकबर अंसारी के मुताबिक, मुख्य दरवाजा खुलने के बाद पुलिस घर के अंदर का छोटा दरवाजा तोड़ने लगी। आवाज सुनकर दिलशाद की नींद खुली। इसके बाद पुलिस ने उससे कहा कि कपड़े पहनकर थाने चलना है, पूछताछ करनी है। पिता के अनुसार, कपड़े पहनने के बाद पुलिस दिलशाद को गाड़ी में बैठाकर अपने साथ ले गई। उस समय पुलिस ने गिरफ्तारी का कारण नहीं बताया। अकबर अंसारी पूछते रह गए कि आखिर मामला क्या है। पिता बोले- दोनों तरफ पुलिस बैठी थी, फिर बेटा कैसे कूद गया? दिलशाद की मौत के बाद उसके पिता ने पुलिस के दावे पर सवाल उठाए हैं। अकबर अंसारी ने कहा कि उनके बेटे के दोनों तरफ पुलिसकर्मी बैठे थे। ऐसे में बीच में बैठा व्यक्ति दरवाजा खोलकर गाड़ी से कैसे कूद सकता है? उन्होंने कहा, “सर, आप ही बताइए कि बीच में बैठा हुआ आदमी दरवाजा खोलकर कैसे कूद सकता है? अगर दिलशाद कूदा होता तो बगल में बैठे पुलिसकर्मियों को भी साथ लेकर कूदता। यह सरासर गलत है। वे लोग अपने हाथों से दिलशाद को मार दिए हैं।” परिजनों ने दिलशाद की मौत के लिए पुलिस को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, मौत की परिस्थितियों को लेकर पुलिस और परिजनों के दावों में अंतर है। तेजस्वी यादव ने परिवार से वीडियो कॉल पर की बात, न्याय का भरोसा दिया दिलशाद की मौत की जानकारी मिलने के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पीड़ित परिवार से वीडियो कॉल पर बात की। उन्होंने परिवार को सांत्वना देते हुए कहा, “मुझ पर भरोसा रखिए, हम न्याय दिलाएंगे।” बातचीत के दौरान तेजस्वी यादव ने परिवार से घटना के बारे में जानकारी ली। दिलशाद के पिता ने उन्हें बताया कि आधी रात को पुलिस घर पहुंची थी और पूछताछ के नाम पर उनके बेटे को अपने साथ ले गई थी। तेजस्वी ने बेतिया एसपी से बात कर न्यायिक जांच की मांग की घटना की जानकारी मिलने के बाद तेजस्वी यादव ने बेतिया के पुलिस अधीक्षक कुमार गौतम को फोन कर मामले की जानकारी ली। एसपी ने उन्हें बताया कि दिलशाद जीप से कूद गया था और चोट लगने के कारण इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस पर तेजस्वी यादव ने घटना की न्यायिक जांच कराने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर यह घटना कैसे हुई और इसकी जांच होनी चाहिए। एसपी ने थाना अध्यक्ष समेत छह पुलिसकर्मियों को किया सस्पेंड दिलशाद की पुलिस हिरासत में मौत के मामले में बेतिया के पुलिस अधीक्षक कुमार गौतम ने कार्रवाई की है। सहोदरा थाना अध्यक्ष समेत छह पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामले में एक ओर पुलिस का कहना है कि दिलशाद गाड़ी से कूदकर घायल हुआ था, जबकि परिजन पुलिस पर पिटाई कर हत्या करने का आरोप लगा रहे हैं। घटना की परिस्थितियों और मौत के कारणों की निष्पक्ष जांच से ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पश्चिम चंपारण के चनपटिया में दिलशाद अंसारी की पुलिस हिरासत में मौत का मामला अब राजनीतिक चर्चा में है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने पीड़ित परिवार से वीडियो कॉल पर बात की और घटना की जानकारी ली। परिजनों के अनुसार, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने उनसे करीब 3 मिनट तक बातचीत की, जिसमें उन्होंने जल्दी ही न्याय दिलाने का भरोसा दिया। दरअसल, 12 अक्टूबर को दिलशाद को रात दो बजे पुलिस गिरफ्तार करके ले गई, इसके कुछ देर बाद उसकी मौत की जानकारी मिली। परिवार ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मौत के मामले में हत्या की आशंका जताई है। पूरा मामला सिलसिलेवार पढ़िए,, पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया स्थित औरैया गांव निवासी अकबर मियां के बेटे दिलशाद अंसारी को गिरफ्तार करने के लिए 12 अक्टूबर की रात करीब 2 बजे पुलिस उसके घर पहुंची थी। पुलिस सुभद्रा थाना क्षेत्र के एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में दिलशाद को गिरफ्तार करने गई थी। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद दिलशाद को अपने साथ ले जाया जा रहा था। इसी दौरान उसने गाड़ी से कूदकर भागने की कोशिश की, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे आनन-फानन में अनुमंडलीय अस्पताल नरकटियागंज में भर्ती कराया गया। हालत नाजुक होने पर डॉक्टरों ने उसे जीएमसीएच बेतिया रेफर कर दिया। वहां इलाज के दौरान दिलशाद की मौत हो गई। पिता का दावा- बातचीत के बहाने घर पहुंची थी पुलिस दिलशाद के पिता अकबर अंसारी ने बताया कि आधी रात को दो थानों की पुलिस उनके घर पहुंची थी। पुलिस ने कहा कि दिलशाद से थोड़ी बातचीत करनी है, उसे बुला दीजिए। इस पर परिजनों ने घर का मुख्य दरवाजा खोल दिया। अकबर अंसारी के मुताबिक, मुख्य दरवाजा खुलने के बाद पुलिस घर के अंदर का छोटा दरवाजा तोड़ने लगी। आवाज सुनकर दिलशाद की नींद खुली। इसके बाद पुलिस ने उससे कहा कि कपड़े पहनकर थाने चलना है, पूछताछ करनी है। पिता के अनुसार, कपड़े पहनने के बाद पुलिस दिलशाद को गाड़ी में बैठाकर अपने साथ ले गई। उस समय पुलिस ने गिरफ्तारी का कारण नहीं बताया। अकबर अंसारी पूछते रह गए कि आखिर मामला क्या है। पिता बोले- दोनों तरफ पुलिस बैठी थी, फिर बेटा कैसे कूद गया? दिलशाद की मौत के बाद उसके पिता ने पुलिस के दावे पर सवाल उठाए हैं। अकबर अंसारी ने कहा कि उनके बेटे के दोनों तरफ पुलिसकर्मी बैठे थे। ऐसे में बीच में बैठा व्यक्ति दरवाजा खोलकर गाड़ी से कैसे कूद सकता है? उन्होंने कहा, “सर, आप ही बताइए कि बीच में बैठा हुआ आदमी दरवाजा खोलकर कैसे कूद सकता है? अगर दिलशाद कूदा होता तो बगल में बैठे पुलिसकर्मियों को भी साथ लेकर कूदता। यह सरासर गलत है। वे लोग अपने हाथों से दिलशाद को मार दिए हैं।” परिजनों ने दिलशाद की मौत के लिए पुलिस को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, मौत की परिस्थितियों को लेकर पुलिस और परिजनों के दावों में अंतर है। तेजस्वी यादव ने परिवार से वीडियो कॉल पर की बात, न्याय का भरोसा दिया दिलशाद की मौत की जानकारी मिलने के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पीड़ित परिवार से वीडियो कॉल पर बात की। उन्होंने परिवार को सांत्वना देते हुए कहा, “मुझ पर भरोसा रखिए, हम न्याय दिलाएंगे।” बातचीत के दौरान तेजस्वी यादव ने परिवार से घटना के बारे में जानकारी ली। दिलशाद के पिता ने उन्हें बताया कि आधी रात को पुलिस घर पहुंची थी और पूछताछ के नाम पर उनके बेटे को अपने साथ ले गई थी। तेजस्वी ने बेतिया एसपी से बात कर न्यायिक जांच की मांग की घटना की जानकारी मिलने के बाद तेजस्वी यादव ने बेतिया के पुलिस अधीक्षक कुमार गौतम को फोन कर मामले की जानकारी ली। एसपी ने उन्हें बताया कि दिलशाद जीप से कूद गया था और चोट लगने के कारण इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस पर तेजस्वी यादव ने घटना की न्यायिक जांच कराने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर यह घटना कैसे हुई और इसकी जांच होनी चाहिए। एसपी ने थाना अध्यक्ष समेत छह पुलिसकर्मियों को किया सस्पेंड दिलशाद की पुलिस हिरासत में मौत के मामले में बेतिया के पुलिस अधीक्षक कुमार गौतम ने कार्रवाई की है। सहोदरा थाना अध्यक्ष समेत छह पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामले में एक ओर पुलिस का कहना है कि दिलशाद गाड़ी से कूदकर घायल हुआ था, जबकि परिजन पुलिस पर पिटाई कर हत्या करने का आरोप लगा रहे हैं। घटना की परिस्थितियों और मौत के कारणों की निष्पक्ष जांच से ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

