Share Market Today: भारतीय शेयर बाजार आज भारी बढ़त के साथ बंद हुआ है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स आज 1.54 फीसदी या 1109 अंक की बढ़त के साथ 73,033 पर बंद हुआ है। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक निफ्टी आज 1.60 फीसदी या 358 अंक की बढ़त के साथ 22,721 पर बंद हुआ है शेयर बाजार में आज की तेजी के पीछे कई कारण रहे। आईटी शेयरों में खरीदारी बढ़ी, रुपये ने डॉलर के मुकाबले मजबूती दिखाई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई। साथ ही, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी से भी शेयर बाजार पर दबाव कुछ कम हुआ। हालांकि, बाजार की यह तेजी कितनी टिकाऊ होगी, इस पर नजर रखना जरूरी है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली, महंगाई और ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता अभी खत्म नहीं हुई है। आइए जानते हैं कि बाजार में आज आई तेजी के प्रमुख कारण कौन-से हैं।
- आईटी शेयरों में जोरदार खरीदारी
शेयर बाजार को सबसे ज्यादा सहारा बड़ी आईटी कंपनियों के शेयरों में आई तेजी से मिला। दिलचस्प बात यह है कि दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट के बीच भारतीय आईटी कंपनियों को लेकर निवेशकों का रुख बेहतर हुआ है। एआई तकनीक में जरूरत से ज्यादा निवेश और कंपनियों की ऊंची वैल्यूएशन को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। इसका असर एशियाई बाजारों में भी दिखाई दिया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 6% से ज्यादा गिर गया, जबकि जापान का निक्केई 2% से अधिक नीचे रहा।
सैमसंग जैसी बड़ी टेक कंपनियों के शेयरों में भी भारी गिरावट देखने को मिली। बाजार में आशंका है कि एआई को लेकर बना उत्साह कहीं निवेश का बुलबुला न बन जाए। ऐसे माहौल में भारतीय आईटी कंपनियों को कुछ निवेशक एआई से जुड़े जोखिमों के मुकाबले अलग विकल्प के तौर पर देख रहे हैं। इससे घरेलू बाजार में आईटी शेयरों को खरीदारी का सहारा मिला।
- डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत, बाजार को राहत
रुपये में मजबूती ने भी शेयर बाजार का माहौल बेहतर किया। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय मुद्रा 82 पैसे मजबूत होकर डॉलर के मुकाबले 94.96 के स्तर पर पहुंच गई। इससे पहले रुपये में लगातार गिरावट को रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने कई कदम उठाए थे। केंद्रीय बैंक ने विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी पर लगाम लगाने और डॉलर की मांग घटाने के लिए नियम सख्त किए हैं।
RBI ने रुपये में होने वाले नॉन-डिलिवरेबल डेरिवेटिव सौदों के नियम भी कड़े किए हैं। अब विदेशी ग्राहकों को इन सौदों का इस्तेमाल केवल वास्तविक विदेशी मुद्रा जोखिम से बचाव यानी हेजिंग के लिए करने की अनुमति है। इसके अलावा, बैंकों के अपने रुपये वाले करेंसी हेज सौदों पर भी 20% नकदी रिजर्व की शर्त लागू की गई है। इससे पहले आरबीआई ने सरकारी तेल कंपनियों को सीधे डॉलर उपलब्ध कराने, विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों पर सख्ती करने और बैंकों के नकदी रिजर्व नियमों को कड़ा करने जैसे कदम उठाए थे।
- अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई नरमी ने भी शेयर बाजार को राहत दी। हाल में कई साल के ऊंचे स्तर पर पहुंचने के बाद अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड में कुछ गिरावट दर्ज की गई। 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड 5.2% से नीचे आई, जबकि 30 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड घटकर 5.56% पर आ गई। दो साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड भी 4.8% से नीचे फिसल गई।
बॉन्ड यील्ड में तेजी आने पर निवेशकों के लिए सुरक्षित माने जाने वाले कर्ज से जुड़े निवेश ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं। ऐसे में वे उभरते बाजारों के शेयरों से पैसा निकालकर बॉन्ड में निवेश कर सकते हैं। इससे भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ता है। इसके उलट, यील्ड में नरमी आने से शेयर बाजार को कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड अभी भी ऊंचे स्तर पर है, इसलिए विदेशी निवेशकों की बिकवाली का जोखिम बना हुआ है।
- कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी शेयर बाजार के लिए राहत की खबर है। मंगलवार को ब्रेंट क्रूड का वायदा भाव 1% से ज्यादा गिरकर करीब 105 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड का भाव भी 1% से अधिक गिरकर 93 डॉलर प्रति बैरल से नीचे ट्रेड करता दिखा। निवेशक रूस से तेल और डीजल की सप्लाई बढ़ने की संभावनाओं पर नजर रख रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी डीजल की सप्लाई पर लगी पाबंदियों में कुछ समय के लिए ढील देने के फैसले का बचाव किया है।
आगे कैसी रहेगी बाजार की चाल?
शेयर बाजार में तेजी के बावजूद निवेशकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) खरीदारी कर रहे हैं। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के मुताबिक, फिलहाल ऐसे ठोस संकेत नहीं हैं जिनसे विदेशी निवेशकों की बिकवाली का मौजूदा रुख पूरी तरह बदलने की उम्मीद की जा सके। आरबीआई के कदमों से रुपये को राहत मिली है। इसके साथ ही विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी कुछ कम हुई। विजयकुमार के अनुसार, पिछले कारोबारी सत्र में विदेशी निवेशकों ने कैश मार्केट में 1,708 करोड़ रुपये की बिकवाली की। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 5.2% से ऊपर रहने पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रह सकती है। इससे बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

