पहले चरण में 12 करोड़ का निवेश होगा, 25 हजार वर्ग फीट में बनेगी पैकेजिंग यूनिट बिहार अब पैकेजिंग सामग्री के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता खत्म करने जा रहा है। पटना के फतुहा में 25 हजार वर्ग फीट में आधुनिक मल्टीलेयर पैकेजिंग यूनिट स्थापित होगी। पहले चरण में 12 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस संयंत्र से 500 कुशल व अर्ध-कुशल युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। इससे गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, नोएडा, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल पर निर्भरता घटेगी। साथ ही पैकेजिंग 8 से 15 रुपए/किग्रा सस्ती होगी। यूनिट में दूध, बिस्किट, चिप्स, नमकीन, चायपत्ती, रेडी-टू-ईट व फ्रोजन फूड की हाई-क्वालिटी पैकिंग होगी। इसमें 3, 5 व 7-लेयर ब्लोन फिल्म लाइनों की तकनीक लगेगी। 3-लेयर पैकेजिंग में पॉलिथीन, पॉलीप्रोपाइलीन, ईवीओएच और नायलॉन की परतें इस्तेमाल होंगी। बाहरी परत खरोंच से बचाएगी, मध्य परत नमी व हवा रोकेगी और आंतरिक फूड-ग्रेड परत सामान को सड़ने से बचाएगी। इससे मखाना, मसाले व नमकीन का असली स्वाद सुरक्षित रहेगा। उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार ने कहा कि खाद्य पदार्थों की पैकिंग के लिए फतुहा में मल्टीलेयर पैकेजिंग यूनिट लग रही है। इससे खाद्य सामग्री सुरक्षित रहेगी और रोजगार मिलेगा। वो सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है
सवाल: लोगों को क्या फायदा होगा?
जवाब: पैकेजिंग सस्ती होने से खाने-पीने की चीजें सस्ती होंगी। 3-लेयर सुरक्षा से दूध, चिप्स व नमकीन बासी नहीं होंगे और स्वाद बना रहेगा।
सवाल: कितना निवेश और रोजगार मिलेगा?
जवाब: 25 हजार वर्ग फीट की यूनिट पर 12 करोड़ रुपए खर्च होंगे और 500 युवाओं को सीधा रोजगार मिलेगा।
सवाल: दूसरे राज्यों पर निर्भरता कैसे कम होगी?
जवाब:पहले सामग्री गुजरात, महाराष्ट्र व दिल्ली से आती थी। बिहार में निर्माण से आयात खर्च व ट्रांसपोर्ट वेस्टेज खत्म होगा।
सवाल: किसानों को इससे क्या मदद मिलेगी?
जवाब: मखाना, लीची व आम जैसे कृषि उत्पादों की ब्रांडिंग होगी। किसान अपने उत्पाद सीधे बड़े बाजारों में ऊंचे दामों पर बेच पाएंगे। उपभोक्ता से उत्पादक राज्य बनने की ओर बिहार
बिहार लंबे समय से एक उपभोक्ता राज्य रहा है, जहां तैयार सामान बाहर से आता था। फतुहा में पैकेजिंग यूनिट लगने से यह स्थिति बदलेगी। स्थानीय स्तर पर बेहतर पैकेजिंग मिलने से राज्य का एग्री-प्रोसेसिंग सेक्टर मजबूत होगा। परिवहन लागत घटने से पैकेजिंग 8 से 15 रुपए/किग्रा सस्ती होगी और वेस्टेज खत्म होगा। 500 प्रत्यक्ष रोजगार सृजन के साथ यह यूनिट बिहार को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। पहले चरण में 12 करोड़ का निवेश होगा, 25 हजार वर्ग फीट में बनेगी पैकेजिंग यूनिट बिहार अब पैकेजिंग सामग्री के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता खत्म करने जा रहा है। पटना के फतुहा में 25 हजार वर्ग फीट में आधुनिक मल्टीलेयर पैकेजिंग यूनिट स्थापित होगी। पहले चरण में 12 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस संयंत्र से 500 कुशल व अर्ध-कुशल युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। इससे गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, नोएडा, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल पर निर्भरता घटेगी। साथ ही पैकेजिंग 8 से 15 रुपए/किग्रा सस्ती होगी। यूनिट में दूध, बिस्किट, चिप्स, नमकीन, चायपत्ती, रेडी-टू-ईट व फ्रोजन फूड की हाई-क्वालिटी पैकिंग होगी। इसमें 3, 5 व 7-लेयर ब्लोन फिल्म लाइनों की तकनीक लगेगी। 3-लेयर पैकेजिंग में पॉलिथीन, पॉलीप्रोपाइलीन, ईवीओएच और नायलॉन की परतें इस्तेमाल होंगी। बाहरी परत खरोंच से बचाएगी, मध्य परत नमी व हवा रोकेगी और आंतरिक फूड-ग्रेड परत सामान को सड़ने से बचाएगी। इससे मखाना, मसाले व नमकीन का असली स्वाद सुरक्षित रहेगा। उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार ने कहा कि खाद्य पदार्थों की पैकिंग के लिए फतुहा में मल्टीलेयर पैकेजिंग यूनिट लग रही है। इससे खाद्य सामग्री सुरक्षित रहेगी और रोजगार मिलेगा। वो सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है
सवाल: लोगों को क्या फायदा होगा?
जवाब: पैकेजिंग सस्ती होने से खाने-पीने की चीजें सस्ती होंगी। 3-लेयर सुरक्षा से दूध, चिप्स व नमकीन बासी नहीं होंगे और स्वाद बना रहेगा।
सवाल: कितना निवेश और रोजगार मिलेगा?
जवाब: 25 हजार वर्ग फीट की यूनिट पर 12 करोड़ रुपए खर्च होंगे और 500 युवाओं को सीधा रोजगार मिलेगा।
सवाल: दूसरे राज्यों पर निर्भरता कैसे कम होगी?
जवाब:पहले सामग्री गुजरात, महाराष्ट्र व दिल्ली से आती थी। बिहार में निर्माण से आयात खर्च व ट्रांसपोर्ट वेस्टेज खत्म होगा।
सवाल: किसानों को इससे क्या मदद मिलेगी?
जवाब: मखाना, लीची व आम जैसे कृषि उत्पादों की ब्रांडिंग होगी। किसान अपने उत्पाद सीधे बड़े बाजारों में ऊंचे दामों पर बेच पाएंगे। उपभोक्ता से उत्पादक राज्य बनने की ओर बिहार
बिहार लंबे समय से एक उपभोक्ता राज्य रहा है, जहां तैयार सामान बाहर से आता था। फतुहा में पैकेजिंग यूनिट लगने से यह स्थिति बदलेगी। स्थानीय स्तर पर बेहतर पैकेजिंग मिलने से राज्य का एग्री-प्रोसेसिंग सेक्टर मजबूत होगा। परिवहन लागत घटने से पैकेजिंग 8 से 15 रुपए/किग्रा सस्ती होगी और वेस्टेज खत्म होगा। 500 प्रत्यक्ष रोजगार सृजन के साथ यह यूनिट बिहार को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

