किताबों और परीक्षाओं के तनाव से बाहर निकल कर अब बिहार के स्कूली बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का बड़ा मंच मिलने जा रहा है। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद ने ‘कला उत्सव 2026’ के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य दूर-दराज के इलाकों और स्कूलों में छिपी प्रतिभाओं को सामने लाना है। इस आयोजन में कक्षा 9वीं से 12वीं तक के सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों के विद्यार्थी हिस्सा ले सकेंगे। यह आयोजन राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत कला-एकीकृत शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इसे समग्र शिक्षा की बजट योजना (2026-27) और एनसीईआरटी के दिशा-निर्देशों के तहत तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित न रखकर बच्चों में आत्मविश्वास, मौलिक सोच, रचनात्मकता और सहयोग की भावना का विकास करना है। प्रत्येक प्रस्तुति के लिए गूगल ड्राइव के जरिए 4 से 5 मिनट का वीडियो क्लिप, पासपोर्ट साइज फोटो सहित कम से कम 4 तस्वीरें और 100 शब्दों का सारांश अपलोड करना होगा। किताबों और परीक्षाओं के तनाव से बाहर निकल कर अब बिहार के स्कूली बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का बड़ा मंच मिलने जा रहा है। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद ने ‘कला उत्सव 2026’ के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य दूर-दराज के इलाकों और स्कूलों में छिपी प्रतिभाओं को सामने लाना है। इस आयोजन में कक्षा 9वीं से 12वीं तक के सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों के विद्यार्थी हिस्सा ले सकेंगे। यह आयोजन राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत कला-एकीकृत शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इसे समग्र शिक्षा की बजट योजना (2026-27) और एनसीईआरटी के दिशा-निर्देशों के तहत तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित न रखकर बच्चों में आत्मविश्वास, मौलिक सोच, रचनात्मकता और सहयोग की भावना का विकास करना है। प्रत्येक प्रस्तुति के लिए गूगल ड्राइव के जरिए 4 से 5 मिनट का वीडियो क्लिप, पासपोर्ट साइज फोटो सहित कम से कम 4 तस्वीरें और 100 शब्दों का सारांश अपलोड करना होगा।

