पूर्व भारतीय क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ‘भज्जी’ के जालंधर स्थित आवास के बाहर आंगनवाड़ी वर्करों ने भारी संख्या में एकत्रित होकर ‘जवाब मांग रैली’ के तहत उग्र प्रदर्शन किया। केंद्र सरकार की नीतियों से नाराज महिलाओं ने भाजपा पर वादे पूरे न करने का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की। स्थिति को नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई है।
केद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन यह प्रदर्शन मुख्यत केंद्र सरकार के खिलाफ अपनी लंबित मांगों को लेकर किया जा रहा है। प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि 12 साल पहले जब केंद्र में भाजपा की सरकार बनी थी, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंगनवाड़ी वर्करों के लिए मांग भत्ते में वृद्धि और पेंशन स्कीम लागू करने का वादा किया था। हालांकि, इतने साल बीत जाने के बाद भी भत्ते में कोई सुधार नहीं किया गया है। वर्करों का आरोप है कि केंद्र सरकार की 60:40 की अनुपात योजना के तहत उन्हें मात्र 2700 रुपये दिए जा रहे हैं। इतने कम मानदेय के बावजूद उनसे नशा मुक्ति मुहिम, ‘मावां धीयां सत्कार योजना’ और अन्य कई सरकारी योजनाओं के तहत अतिरिक्त काम करवाया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गलत पेंशन भुगतान का हवाला देकर वर्करों की पेंशन काटने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। इसके अलावा, अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाने पर वर्करों के खिलाफ पुलिस में मामले दर्ज किए जा रहे हैं और उन पर लाठीचार्ज तक किया गया। दुख की बात यह है कि इस संकट की घड़ी में किसी भी सुपरवाइजर या सीडीपीओ (CDPO) ने उनकी कोई मदद नहीं की।
35 सालों से सेवा दे रहे कर्मचारियों को कोई ठोस लाभ नहीं मिला प्रदर्शनकारी वर्करों ने स्पष्ट किया कि 35 सालों से सेवा दे रहे कर्मचारियों को कोई ठोस लाभ नहीं दिया जा रहा है, जबकि सरकारी काम अब एनजीओ (NGOs) को सौंपे जा रहे हैं। केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब में सत्ता में आने का सपना देखने वाली भाजपा यह भूल जाए कि उसे यहां सफलता मिलेगी। अपनी मांगों की अनदेखी के विरोध में 1 और 2 दिसंबर को बड़े स्तर पर प्रदर्शन का आह्वान किया गया है और मांगें न माने जाने पर आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी गई है।

