पूजा पंडाल में दो निकास द्वार और 5 मीटर चौड़ा गेट जरूरी

पूजा पंडाल में दो निकास द्वार और 5 मीटर चौड़ा गेट जरूरी

भास्कर न्यूज | किशनगंज दुर्गापूजा सहित अन्य आयोजनों के लिए बनाए जाने वाले पंडाल और अस्थायी ढांचों को लेकर अग्निशमन विभाग ने सुरक्षा मानक जारी किए हैं। बिहार अग्निशमन सेवा अधिनियम और बिहार अग्निशमन सेवा नियमावली, 2021 के नियम 18(क) के तहत जारी निर्देशों में पंडाल की ऊंचाई, निकास द्वार, बिजली व्यवस्था, पानी और अग्निशामक यंत्रों को लेकर सावधानी बरतने को कहा गया है। जिला अग्निशमन पदाधिकारी के निर्देश के अनुसार पंडाल की ऊंचाई कम से कम तीन मीटर होनी चाहिए। निर्माण में सिंथेटिक कपड़े या रस्सी का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। पंडाल के चारों तरफ 4 से 5 मीटर खुली जगह रखना जरूरी होगा। इसे बिजली की लाइन के नीचे नहीं बनाया जाएगा। रेलवे लाइन, बिजली सब-स्टेशन, चिमनी या भट्ठी से कम से कम 15 मीटर की दूरी रखना अनिवार्य होगा। पंडाल में कम से कम दो निकास रास्ते होने चाहिए। संभव हो तो दोनों विपरीत दिशा में हों। निकास गेट की चौड़ाई कम से कम पांच मीटर रखनी होगी। पंडाल के किसी भी हिस्से से बाहर निकलने के लिए 15 मीटर से अधिक दूरी तय नहीं करनी पड़े, इसका भी ध्यान रखना होगा। कुर्सियां दोनों किनारों से 1.2 मीटर जगह छोड़कर लगाई जाएंगी। 12 कुर्सियों के बाद 1.5 मीटर का रास्ता और 10 कतारों के बाद 1.5 मीटर का गैंगवे रखना होगा। कुर्सियों को कम से कम चार-चार के समूह में स्थिर करने का निर्देश दिया गया है, ताकि आपात स्थिति में निकास मार्ग बाधित न हो। पंडाल में बिजली के तारों के जोड़ खुले नहीं रहने चाहिए। आपातकालीन रोशनी की व्यवस्था अनिवार्य होगी। विद्युत सर्किट, बल्ब और ट्यूब लाइट को पंडाल के कपड़े से कम से कम 15 सेंटीमीटर दूर रखना होगा। पंडाल के अंदर हैलोजन लाइट और भट्ठी का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। कुर्सियों की व्यवस्था भी सुरक्षित हो भास्कर न्यूज | किशनगंज दुर्गापूजा सहित अन्य आयोजनों के लिए बनाए जाने वाले पंडाल और अस्थायी ढांचों को लेकर अग्निशमन विभाग ने सुरक्षा मानक जारी किए हैं। बिहार अग्निशमन सेवा अधिनियम और बिहार अग्निशमन सेवा नियमावली, 2021 के नियम 18(क) के तहत जारी निर्देशों में पंडाल की ऊंचाई, निकास द्वार, बिजली व्यवस्था, पानी और अग्निशामक यंत्रों को लेकर सावधानी बरतने को कहा गया है। जिला अग्निशमन पदाधिकारी के निर्देश के अनुसार पंडाल की ऊंचाई कम से कम तीन मीटर होनी चाहिए। निर्माण में सिंथेटिक कपड़े या रस्सी का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। पंडाल के चारों तरफ 4 से 5 मीटर खुली जगह रखना जरूरी होगा। इसे बिजली की लाइन के नीचे नहीं बनाया जाएगा। रेलवे लाइन, बिजली सब-स्टेशन, चिमनी या भट्ठी से कम से कम 15 मीटर की दूरी रखना अनिवार्य होगा। पंडाल में कम से कम दो निकास रास्ते होने चाहिए। संभव हो तो दोनों विपरीत दिशा में हों। निकास गेट की चौड़ाई कम से कम पांच मीटर रखनी होगी। पंडाल के किसी भी हिस्से से बाहर निकलने के लिए 15 मीटर से अधिक दूरी तय नहीं करनी पड़े, इसका भी ध्यान रखना होगा। कुर्सियां दोनों किनारों से 1.2 मीटर जगह छोड़कर लगाई जाएंगी। 12 कुर्सियों के बाद 1.5 मीटर का रास्ता और 10 कतारों के बाद 1.5 मीटर का गैंगवे रखना होगा। कुर्सियों को कम से कम चार-चार के समूह में स्थिर करने का निर्देश दिया गया है, ताकि आपात स्थिति में निकास मार्ग बाधित न हो। पंडाल में बिजली के तारों के जोड़ खुले नहीं रहने चाहिए। आपातकालीन रोशनी की व्यवस्था अनिवार्य होगी। विद्युत सर्किट, बल्ब और ट्यूब लाइट को पंडाल के कपड़े से कम से कम 15 सेंटीमीटर दूर रखना होगा। पंडाल के अंदर हैलोजन लाइट और भट्ठी का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। कुर्सियों की व्यवस्था भी सुरक्षित हो  

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