गंगा नदी पर बने आधुनिक रेल पुल पर परिचालन शुरू:सिमरिया में 2400 करोड़ से बना डबल ट्रैक ब्रिज; सबसे पहले गुजरी कोसी एक्सप्रेस

गंगा नदी पर बने आधुनिक रेल पुल पर परिचालन शुरू:सिमरिया में 2400 करोड़ से बना डबल ट्रैक ब्रिज; सबसे पहले गुजरी कोसी एक्सप्रेस

बेगूसराय के सिमरिया और पटना के मोकामा के बीच बहुप्रतीक्षित नया डबल ट्रैक रेल पुल बनकर पूरी तरह तैयार है। पूर्वी सर्किल कोलकाता के रेल संरक्षा आयुक्त गुरु प्रकाश ने रविवार को इसका अंतिम निरीक्षण किया था। इसके बाद सोमवार से इस पर परिचालन शुरू हो गया है। सबसे पहले 18625 पूर्णिया-हटिया कोशी एक्सप्रेस नए पुल पर पहुंची और राजेंद्र पुल स्टेशन से 13 मिनट में हाथिदह स्टेशन पहुंच गई। अब जल्द ही इस पुल का औपचारिक उद्घाटन किया जाएगा। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पुल का वीडियो जारी कर कहा है कि पूरे बिहार में अधिक निर्बाध यात्राएं। उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच एक नया लिंक जोड़ने वाले मोकामा में गंगा पर बने नए रेल पुल का परीक्षण पूरा हो गया। नवनिर्मित पुल से परिचालन संभव पूर्व मध्य रेलवे के सीपीआरओ सरस्वती चंद्र ने बताया कि पूर्वी सर्किल कोलकाता के रेल संरक्षा आयुक्त गुरु प्रकाश ने 3 एवं 4 अक्टूबर को माल, यात्री परिवहन के लिए बनाए गए नवनिर्मित पुल (राजेंद्र पुल-हाथीदह ऊपर) और विद्युतीकरण के साथ दोहरीकरण का निरीक्षण किया गया। सीआरएस से प्राधिकार प्राप्त होते ही इस नवनिर्मित पुल से परिचालन संभव हो गया है। गंगा नदी पर नवनिर्मित इस नए रेल पुल के चालू हो जाने से उत्तरी बिहार और दक्षिणी बिहार को रेल मार्ग से जोड़ने में एक अतिरिक्त मार्ग उपलब्ध हो गया, जिससे रेल परिचालन में काफी सुविधा होगी। 2400 करोड़ रुपए की लागत से बने इस नए रेल पुल को वर्तमान राजेन्द्र पुल के समानांतर एवं पटना छोर की तरफ वर्तमान पुल से 50 मीटर की दूरी पर बनाया गया है। इस पुल पर दोहरी रेल लाइन का निर्माण किया गया है। यह प्रोजेक्ट करीब 15.5 किलोमीटर की कुल लंबाई में फैला है, जिसमें 1.9 किलोमीटर का गंगा नदी पर मुख्य पुल शामिल है। इस पुल में गंगा नदी पर 17 स्टील स्पैन है। साथ ही 3.6 किलोमीटर के रेल वायडक्ट शामिल हैं। मुख्य पुल के साथ ही 8 लघु पुल, 2 सड़क उपरि पुल तथा 3 रेल ओवर रेल का निर्माण भी किया गया है। इसे ऐसा बनाया गया है कि वर्तमान पुल के एप्रोच में कम से कम परिवर्तन करना पड़े। नवनिर्मित पुल के दोनों छोर के स्टेशन, वर्तमान पुल के दोनों छोर के स्टेशनों से ही जुड़े होंगे। वर्तमान में उत्तर में स्थित हाथीदह, टाल एवं रामपुर डुमरा स्टेशनों और दक्षिण में स्थित राजेन्द्र पुल, बरौनी स्टेशनों से ही जुड़े हैं। नवनिर्मित डबल लाइन के साथ-साथ वर्तमान में चल रहे पुराने राजेंद्र सेतु से भी रेलवे परिचालन जारी रहेगा। इससे यहां कुल तीन लाइनों का प्रावधान हो गया है।
2018 में एफकॉन एजेंसी को सौंपा इससे उत्तर और दक्षिण बिहार के साथ ही देश के उत्तर-पूर्व इलाकों के बीच रेल कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। पैसेंजर और मालगाड़ियों के परिचालन में सुधार होगा। अनुमान है कि रेलवे ट्रैफिक में 2.5 गुणा वृद्धि होगी। इससे माल ढुलाई के समय और लागत में कमी आएगी। जिससे व्यापार और जरूरी चीजों की आवाजाही को फायदा होगा। यह गंगा ब्रिज एक मजबूत, बेहतर कनेक्टिविटी, कॉमर्स और ग्रोथ के लिए नई संभावनाएं देगा‌। गंगा नदी पर राजेंद्र पुल के समानांतर बने डबल ट्रैक रेल पुल का निर्माण कार्य 2018 में इरकॉन की ओर से एफकॉन एजेंसी को सौंपा गया था। 2020 से पुल निर्माण की रफ्तार पकड़ने के बाद 26 जनवरी 2026 में पुल बनकर तैयार हो गया। करीब 1700 करोड़ की लागत से 1.86 किलोमीटर लंबा डबल ट्रैक रेल पुल का निर्माण कर एफकॉन एजेंसी ने जून में हैंड ओवर कर दिया था। आमतौर पर देखा जाता है कि अधिकतर पुल में ट्रेन को प्रवेश करने के साथ ही उसकी स्पीड कम हो जाती है। लेकिन इस पुल में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे पुल में ट्रेन के प्रवेश करने पर स्पीड कम नहीं होगी। वेल फाउंडेशन तकनीक का उपयोग कर इसके पिलरों को गहराई तक धंसाया गया है, जिससे भीषण भूकंप और बाढ़ को झेल सके। पुल का पाया जमीन से 65-70 मीटर गहराई पर है। इसमें 17 स्पेन हैं, जिसमें 32 मीटर का दो, 123 मीटर का 13 एवं 110 मीटर का एक स्पेन है। वहीं, 123 मीटर का स्पेन एक हजार 450 मैट्रिक टन क्षमता है। नए रेल पुल के निर्माण को मंजूरी उल्लेखनीय है कि 1959 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने सिमरिया और मोकामा के बीच देश के सबसे पहले रेल-सह-सड़क पुल का उद्घाटन किया था। छह दशकों तक राजेंद्र सेतु ने बिहार की जीवनरेखा के रूप में कार्य किया। लेकिन समय बीतने के साथ पुल पुराना हो गया और भारी मालगाड़ियों का बोझ सहने की उसकी क्षमता कम होने लगी। पुराना पुल सिंगल रेल लाइन था, जिससे ट्रेनों को घंटों क्रॉसिंग के लिए रुकना पड़ता था। इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय ने राजेंद्र सेतु के समानांतर एक नए रेल पुल के निर्माण को मंजूरी दी। यह नया पुल अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग कर बनाया गया है, जो अगले 100 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रख कर बनाया गया है। जो भारी मालगाड़ियों और हाई-स्पीड वंदे भारत जैसी ट्रेनों के अनुकूल है। इस पुल के शुरू होने से आम जनता और यात्रियों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव आने वाले हैं। अब तक ट्रेनों को पुल पार करने के लिए बाहरी स्टेशनों पर घंटों इंतजार करना पड़ता था। डबल ट्रैक होने से अब ट्रेनें बिना रुके और तेज गति से गंगा पार कर सकेंगी। दिल्ली, कोलकाता और गुवाहाटी की ओर जाने वाली ट्रेनों के समय में 30 से 45 मिनट की कमी आएगी। बरौनी रिफाइनरी (IOCL), खाद कारखाना (HURL) और थर्मल पावर स्टेशन (NTPC) के लिए यह पुल एक गेम चेंजर साबित होगा। कोयला, पेट्रोलियम औiर उर्वरक की ढुलाई अब बिना किसी रुकावट के हो सकेगी। इससे लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी। बेहतर कनेक्टिविटी हमेशा नए उद्योगों और निवेश को आकर्षित करती है, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। ट्रैक की क्षमता बढ़ने से रेल मंत्रालय इस रूट पर नई एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनें शुरू कर पाएगा। राजेंद्र सेतु के समानांतर निर्माणाधीन हाथीदह-सिमरिया दो लेन रेल पुल देश की सुरक्षा को लेकर भी मिल का पत्थर साबित होगा। अधिकारियों ने बताया कि चीन समेत देश के अन्य सीमा पर जरूरत पड़ने पर तोप समेत अन्य लड़ाकू सामग्री सड़क परिवहन से तेज गति में नहीं पहुंच पाता है। डबल ट्रैक रेल पुल निर्माण हो जाने से जरूरत पड़ने पर रेल मार्ग से तेज गति में देश के सीमा पर सुरक्षा का सभी उपकरण पहुंच जाएगा। बेगूसराय के सिमरिया और पटना के मोकामा के बीच बहुप्रतीक्षित नया डबल ट्रैक रेल पुल बनकर पूरी तरह तैयार है। पूर्वी सर्किल कोलकाता के रेल संरक्षा आयुक्त गुरु प्रकाश ने रविवार को इसका अंतिम निरीक्षण किया था। इसके बाद सोमवार से इस पर परिचालन शुरू हो गया है। सबसे पहले 18625 पूर्णिया-हटिया कोशी एक्सप्रेस नए पुल पर पहुंची और राजेंद्र पुल स्टेशन से 13 मिनट में हाथिदह स्टेशन पहुंच गई। अब जल्द ही इस पुल का औपचारिक उद्घाटन किया जाएगा। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पुल का वीडियो जारी कर कहा है कि पूरे बिहार में अधिक निर्बाध यात्राएं। उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच एक नया लिंक जोड़ने वाले मोकामा में गंगा पर बने नए रेल पुल का परीक्षण पूरा हो गया। नवनिर्मित पुल से परिचालन संभव पूर्व मध्य रेलवे के सीपीआरओ सरस्वती चंद्र ने बताया कि पूर्वी सर्किल कोलकाता के रेल संरक्षा आयुक्त गुरु प्रकाश ने 3 एवं 4 अक्टूबर को माल, यात्री परिवहन के लिए बनाए गए नवनिर्मित पुल (राजेंद्र पुल-हाथीदह ऊपर) और विद्युतीकरण के साथ दोहरीकरण का निरीक्षण किया गया। सीआरएस से प्राधिकार प्राप्त होते ही इस नवनिर्मित पुल से परिचालन संभव हो गया है। गंगा नदी पर नवनिर्मित इस नए रेल पुल के चालू हो जाने से उत्तरी बिहार और दक्षिणी बिहार को रेल मार्ग से जोड़ने में एक अतिरिक्त मार्ग उपलब्ध हो गया, जिससे रेल परिचालन में काफी सुविधा होगी। 2400 करोड़ रुपए की लागत से बने इस नए रेल पुल को वर्तमान राजेन्द्र पुल के समानांतर एवं पटना छोर की तरफ वर्तमान पुल से 50 मीटर की दूरी पर बनाया गया है। इस पुल पर दोहरी रेल लाइन का निर्माण किया गया है। यह प्रोजेक्ट करीब 15.5 किलोमीटर की कुल लंबाई में फैला है, जिसमें 1.9 किलोमीटर का गंगा नदी पर मुख्य पुल शामिल है। इस पुल में गंगा नदी पर 17 स्टील स्पैन है। साथ ही 3.6 किलोमीटर के रेल वायडक्ट शामिल हैं। मुख्य पुल के साथ ही 8 लघु पुल, 2 सड़क उपरि पुल तथा 3 रेल ओवर रेल का निर्माण भी किया गया है। इसे ऐसा बनाया गया है कि वर्तमान पुल के एप्रोच में कम से कम परिवर्तन करना पड़े। नवनिर्मित पुल के दोनों छोर के स्टेशन, वर्तमान पुल के दोनों छोर के स्टेशनों से ही जुड़े होंगे। वर्तमान में उत्तर में स्थित हाथीदह, टाल एवं रामपुर डुमरा स्टेशनों और दक्षिण में स्थित राजेन्द्र पुल, बरौनी स्टेशनों से ही जुड़े हैं। नवनिर्मित डबल लाइन के साथ-साथ वर्तमान में चल रहे पुराने राजेंद्र सेतु से भी रेलवे परिचालन जारी रहेगा। इससे यहां कुल तीन लाइनों का प्रावधान हो गया है।
2018 में एफकॉन एजेंसी को सौंपा इससे उत्तर और दक्षिण बिहार के साथ ही देश के उत्तर-पूर्व इलाकों के बीच रेल कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। पैसेंजर और मालगाड़ियों के परिचालन में सुधार होगा। अनुमान है कि रेलवे ट्रैफिक में 2.5 गुणा वृद्धि होगी। इससे माल ढुलाई के समय और लागत में कमी आएगी। जिससे व्यापार और जरूरी चीजों की आवाजाही को फायदा होगा। यह गंगा ब्रिज एक मजबूत, बेहतर कनेक्टिविटी, कॉमर्स और ग्रोथ के लिए नई संभावनाएं देगा‌। गंगा नदी पर राजेंद्र पुल के समानांतर बने डबल ट्रैक रेल पुल का निर्माण कार्य 2018 में इरकॉन की ओर से एफकॉन एजेंसी को सौंपा गया था। 2020 से पुल निर्माण की रफ्तार पकड़ने के बाद 26 जनवरी 2026 में पुल बनकर तैयार हो गया। करीब 1700 करोड़ की लागत से 1.86 किलोमीटर लंबा डबल ट्रैक रेल पुल का निर्माण कर एफकॉन एजेंसी ने जून में हैंड ओवर कर दिया था। आमतौर पर देखा जाता है कि अधिकतर पुल में ट्रेन को प्रवेश करने के साथ ही उसकी स्पीड कम हो जाती है। लेकिन इस पुल में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे पुल में ट्रेन के प्रवेश करने पर स्पीड कम नहीं होगी। वेल फाउंडेशन तकनीक का उपयोग कर इसके पिलरों को गहराई तक धंसाया गया है, जिससे भीषण भूकंप और बाढ़ को झेल सके। पुल का पाया जमीन से 65-70 मीटर गहराई पर है। इसमें 17 स्पेन हैं, जिसमें 32 मीटर का दो, 123 मीटर का 13 एवं 110 मीटर का एक स्पेन है। वहीं, 123 मीटर का स्पेन एक हजार 450 मैट्रिक टन क्षमता है। नए रेल पुल के निर्माण को मंजूरी उल्लेखनीय है कि 1959 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने सिमरिया और मोकामा के बीच देश के सबसे पहले रेल-सह-सड़क पुल का उद्घाटन किया था। छह दशकों तक राजेंद्र सेतु ने बिहार की जीवनरेखा के रूप में कार्य किया। लेकिन समय बीतने के साथ पुल पुराना हो गया और भारी मालगाड़ियों का बोझ सहने की उसकी क्षमता कम होने लगी। पुराना पुल सिंगल रेल लाइन था, जिससे ट्रेनों को घंटों क्रॉसिंग के लिए रुकना पड़ता था। इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय ने राजेंद्र सेतु के समानांतर एक नए रेल पुल के निर्माण को मंजूरी दी। यह नया पुल अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग कर बनाया गया है, जो अगले 100 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रख कर बनाया गया है। जो भारी मालगाड़ियों और हाई-स्पीड वंदे भारत जैसी ट्रेनों के अनुकूल है। इस पुल के शुरू होने से आम जनता और यात्रियों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव आने वाले हैं। अब तक ट्रेनों को पुल पार करने के लिए बाहरी स्टेशनों पर घंटों इंतजार करना पड़ता था। डबल ट्रैक होने से अब ट्रेनें बिना रुके और तेज गति से गंगा पार कर सकेंगी। दिल्ली, कोलकाता और गुवाहाटी की ओर जाने वाली ट्रेनों के समय में 30 से 45 मिनट की कमी आएगी। बरौनी रिफाइनरी (IOCL), खाद कारखाना (HURL) और थर्मल पावर स्टेशन (NTPC) के लिए यह पुल एक गेम चेंजर साबित होगा। कोयला, पेट्रोलियम औiर उर्वरक की ढुलाई अब बिना किसी रुकावट के हो सकेगी। इससे लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी। बेहतर कनेक्टिविटी हमेशा नए उद्योगों और निवेश को आकर्षित करती है, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। ट्रैक की क्षमता बढ़ने से रेल मंत्रालय इस रूट पर नई एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनें शुरू कर पाएगा। राजेंद्र सेतु के समानांतर निर्माणाधीन हाथीदह-सिमरिया दो लेन रेल पुल देश की सुरक्षा को लेकर भी मिल का पत्थर साबित होगा। अधिकारियों ने बताया कि चीन समेत देश के अन्य सीमा पर जरूरत पड़ने पर तोप समेत अन्य लड़ाकू सामग्री सड़क परिवहन से तेज गति में नहीं पहुंच पाता है। डबल ट्रैक रेल पुल निर्माण हो जाने से जरूरत पड़ने पर रेल मार्ग से तेज गति में देश के सीमा पर सुरक्षा का सभी उपकरण पहुंच जाएगा।  

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