जहानाबाद मंडल कारा में बंदियों को बताए कानूनी अधिकार:अनुच्छेद 21, लीगल एड क्लीनिक से जमानत-अपील में सहायता की जानकारी

जहानाबाद मंडल कारा में बंदियों को बताए कानूनी अधिकार:अनुच्छेद 21, लीगल एड क्लीनिक से जमानत-अपील में सहायता की जानकारी

जहानाबाद मंडल कारा में विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों और मुफ्त विधिक सहायता की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में सहायक जेल उपाधीक्षक सुधीर कुमार सिंह और डिप्टी लीगल एड डिफेंस काउंसिल राजीव कुमार ने बंदियों को जेल विधिक सहायता क्लीनिक, 2022 के प्रावधानों से अवगत कराया। जेल में रहने पर भी खत्म नहीं होते मानवाधिकार डिप्टी लीगल एड डिफेंस काउंसिल राजीव कुमार ने कहा कि जेल में रहने के बावजूद व्यक्ति के मानवाधिकार समाप्त नहीं होते। संविधान का अनुच्छेद 21 प्रत्येक व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार का उद्देश्य प्रत्येक जरूरतमंद बंदी तक न्याय और मुफ्त कानूनी सहायता पहुंचाना है। आर्थिक स्थिति न्याय में बाधा नहीं उन्होंने कहा कि आर्थिक या किसी अन्य कारण से कोई नागरिक न्याय से वंचित नहीं रहना चाहिए। जेल में नए बंदी के प्रवेश के बाद उसकी कानूनी स्थिति की समीक्षा की जाती है। जरूरत पड़ने पर उसे तत्काल मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाती है। जमानत और अपील में भी मिलेगी मदद बंदियों को बताया गया कि जेल के लीगल एड क्लीनिक के माध्यम से जमानत याचिका और अपील तैयार करने में कानूनी सहायता दी जाती है। कानूनी समस्या होने पर बंदी क्लीनिक से संपर्क कर मुफ्त सहायता प्राप्त कर सकते हैं। अधिकारों का पूरा उपयोग करने की अपील सहायक जेल उपाधीक्षक सुधीर कुमार सिंह ने बंदियों से अपने कानूनी अधिकारों का पूरा उपयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी कानूनी समस्या के समाधान के लिए जेल में संचालित लीगल एड क्लीनिक की मदद ली जा सकती है। जहानाबाद मंडल कारा में विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों और मुफ्त विधिक सहायता की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में सहायक जेल उपाधीक्षक सुधीर कुमार सिंह और डिप्टी लीगल एड डिफेंस काउंसिल राजीव कुमार ने बंदियों को जेल विधिक सहायता क्लीनिक, 2022 के प्रावधानों से अवगत कराया। जेल में रहने पर भी खत्म नहीं होते मानवाधिकार डिप्टी लीगल एड डिफेंस काउंसिल राजीव कुमार ने कहा कि जेल में रहने के बावजूद व्यक्ति के मानवाधिकार समाप्त नहीं होते। संविधान का अनुच्छेद 21 प्रत्येक व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार का उद्देश्य प्रत्येक जरूरतमंद बंदी तक न्याय और मुफ्त कानूनी सहायता पहुंचाना है। आर्थिक स्थिति न्याय में बाधा नहीं उन्होंने कहा कि आर्थिक या किसी अन्य कारण से कोई नागरिक न्याय से वंचित नहीं रहना चाहिए। जेल में नए बंदी के प्रवेश के बाद उसकी कानूनी स्थिति की समीक्षा की जाती है। जरूरत पड़ने पर उसे तत्काल मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाती है। जमानत और अपील में भी मिलेगी मदद बंदियों को बताया गया कि जेल के लीगल एड क्लीनिक के माध्यम से जमानत याचिका और अपील तैयार करने में कानूनी सहायता दी जाती है। कानूनी समस्या होने पर बंदी क्लीनिक से संपर्क कर मुफ्त सहायता प्राप्त कर सकते हैं। अधिकारों का पूरा उपयोग करने की अपील सहायक जेल उपाधीक्षक सुधीर कुमार सिंह ने बंदियों से अपने कानूनी अधिकारों का पूरा उपयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी कानूनी समस्या के समाधान के लिए जेल में संचालित लीगल एड क्लीनिक की मदद ली जा सकती है।  

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