पत्रिका एक्सपोज: AI बना नया ‘डॉक्टर’! युवा खुद करा रहे टेस्ट और ले रहे दवाएं, डॉक्टरों ने चेताया

पत्रिका एक्सपोज: AI बना नया ‘डॉक्टर’! युवा खुद करा रहे टेस्ट और ले रहे दवाएं, डॉक्टरों ने चेताया

रायपुर@पीलूराम साहू। AI Health Advice: एआई के जमाने में युवा अब लक्षण के अनुसार बिना डॉक्टरी सलाह के ब्लड टेस्ट से लेकर एक्सरे व सीटी स्कैन करवाने लगे हैं। यही नहीं कैंसर के लक्षण की आशंका में कुछ युवा बायोप्सी के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। निजी लैब संचालकों के अनुसार 40 से 50 फीसदी लोग अब बिना डॉक्टरों की पर्ची के लिए ब्लड जांच के लिए पहुंच रहे हैं। इससे उनका अच्छा खासा खर्च भी हो रहा है। इससे लैब को अच्छा खासा मुनाफा भी हो रहा है। यही नहीं बिना डॉक्टरी सलाह एंटीबायोटिक से लेकर पेनकिलर ले रहे हैं। सेहत बिगड़ने पर डॉक्टर के पास इलाज के लिए भी जा रहे हैं।

एआई मानो जेन जी से लेकर अन्य लोगों के लिए स्वास्थ्य सलाहकर बनता जा रहा है। अब घर में ही एआई की सलाह पर बीमारी के लिए जरूरी जांच पूछ रहे हैं। जांच में रिपोर्ट के अनुसार एआई से पूछकर दवा भी खा रहे हैं। बिना डॉक्टरी सलाह के दवा खाने वालों की सेहत बिगड़ने लगी है। ऐसे लोग इलाज के लिए निजी अस्पतालों में पहुंच रहे हैं।

चूंकि बिना पर्ची व डॉक्टरी सलाह के ये जांच सरकारी अस्पतालों में नहीं होती इसलिए ज्यादातर लोग निजी लैब या डायग्नोस्टिक सेंटर पहुंच रहे हैं। इससे लैब व डायग्नोस्टिक सेंटर की अच्छी खासी कमाई भी हो रही है। जब ये रिपोर्ट लेकर डॉक्टरों के पास पहुंचते हैं तो पता चलता है कि उन्हें कोई बीमारी ही नहीं है। सबसे ज्यादा फायदे में लैब व डायग्नोस्टिक सेंटर वाले हैं।

कुछ मामलों में अस्पताल जाने की सलाह

जब लैब या डायग्नोस्टिक सेंटर से रिपोर्ट आती है तो लोग एआई से दवा पूछते हैं। कुछ मामलों में एआई डॉक्टरी सलाह लेने की सलाह देता है, लेकिन कई मामलों में सीधा बीमारी समझकर दवा ही सुझा दिया जाता है। डॉक्टरों के अनुसार ऐसा करना सेहत के लिए खतरनाक है। एक तो लक्षण के अनुसार जांच करवाना व बिना सलाह दवा खाना, ये दोनों ही स्वास्थ्य के लिहाज से खतरनाक है। जब बीमारी ठीक नहीं होती तो लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। मरीजों से बातचीत में एआई से दवा पूछकर खाने का मामला सामने आ रहा है।

सर्वे व रिसर्च में ये चौंकाने वाले तथ्य

  • बॉस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी)के सर्वे में 85 फीसदी भारतीयों ने स्वीकार किया कि वे डॉक्टर के पास जाने के पहले या अपनी सेहत के लिए एआई टूल का उपयोग करते हैं। यह वैश्विक औसत 57 फीसदी से काफी अधिक है। इसमें से 33 फीसदी लोग सीधे एआई चैटबॉट्स से स्वास्थ्य सलाह ले रहे हैं।
  • इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के अनुसार देश में 77 फीसदी वयस्क स्वास्थ्य संबंधी पूछताछ के लिए एआई का सहारा ले रहे हैं।
  • इसी साल सॉफ्टवेयर कर्मचारियों पर आई स्टडी व रिसर्च गेट पर प्रकाशित एक रिसर्च के अनुसार 58.7 फीसदी प्रोफेशनल्स डिजिटल हैल्थ या एआई असिस्टेड प्लेटफार्म के जरिए खुद ही बीमारी का अंदाजा लगा रहे हैं।
  • इनमें से 21.3 फीसदी लोग सीधे तौर पर इन प्लेटफार्म से पूछकर खुद का इलाज या दवा शुरू कर देते हैं।

बिना डॉक्टरी सलाह दवा खाने के ये नुकसान

  • गलत इलाज व बीमारी बढ़ने की आशंका। असली बीमारी छिप जाती है और समस्या बढ़ सकती है।
  • एलर्जी व रिएक्शन की संभावना। गंभीर स्किन एलर्जी या जानलेवा स्थिति बन सकती है।
  • पेनकिलर दवाएं लेने से लिवर व किडनी को भारी नुकसान पहुंचता है।
  • एंटीबायोटिक दवाओं का असर खत्म हो रहा है। शरीर में ड्रग रजिस्टेंस से ठीक नहीं हो रही बीमारी।
  • पहले से काेई बीमारी है तो दवाओं का खतरनाक रिएक्शन (ड्रग इंटरैक्शन) का खतरा।
  • दर्द निवारक, नींद व खांसी की कुछ खास सिरप का लेने से आदत या लत (डिपेंडेंस) लग सकती है।

केस-1: 30 वर्षीय युवक के पैर, हाथ व कमर के आसपास गांठ है। दबाने से दर्द का अहसास नहीं होता, लेकिन उसे लगा कि यह कोई बीमारी हो सकती है। उसने एआई से लक्षण के अनुसार ब्लड जांच की सलाह मांगी। कैंसर की आशंका जताते हुए एआई ने बायोप्सी कराने की सलाह दे डाली। युवक निजी अस्पताल पहुंच गया। वहां डॉक्टरों ने जरूरी जांच की और कहा कि बायोप्सी की जरूरत नहीं है। ये गांठ सामान्य है।

केस-2: 19 वर्षीय छात्र सिर में दर्द होने पर एआई से पूछकर लगातार पेनकिलर लेने लगा। साथ एंटीबायोटिक दवा भी खाने लगा। एक दिन वह घर में चक्कर खाकर गिर पड़ा। डॉक्टरों के पास इलाज के लिए ले जाने पर पता चला कि पेनकिलर व एंटीबायोटिक दवाओं का साइड इफेक्ट हुआ है। छात्र को बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी दवा का सेवन नहीं करने को कहा गया। साथ ही पैरेंट्स को नजर रखने की सलाह भी दी गई।

टॉपिक एक्सपर्ट

डॉ. युसूफ मेमन, डायरेक्टर संजीवनी कैंसर अस्पताल के मुताबिक, शरीर की हर गांठ कैंसर वाली गांठ नहीं होती। कुछ सादी गांठ भी होती है। एआई की सलाह पर बायोप्सी कराना या दवा लेना सेहत के लिए खतरनाक है। बिना सलाह पेट स्कैन जांच भी कराना उचित नहीं है। डॉक्टर लक्षण के अनुसार जांच तो करवाता है, लेकिन इसमें एआई की सलाह को सर्वोपरि मानना गलत है। कैंसर रोग विशेषज्ञ ही सही जांच व दवा खाने की सलाह दे सकता है।

डॉ. आरके पंडा, एचओडी रेस्पिरेटरी मेडिसिन आंबेडकर अस्पताल के मुताबिक, सांस में तकलीफ होने, चेस्ट इंफेक्शन या अस्थमा वाले कई मरीज एआई की सलाह से दवा ले लेते हैं। इसमें स्टेरायड से लेकर एंटीबायोटिक दवाएं शामिल हैं। सेहत बिगड़ने पर अस्पताल आते हैं तो एआई से पूछकर दवा खाने की जानकारी सामने आती है। एआई किसी भी बीमारी के बारे में सही दवा की सलाह नहीं दे सकता। विशेषज्ञ डॉक्टर ही सही दवा व इलाज बताएगा।

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