झारखंड आंदोलनकारियों की लंबित मांगों को लेकर झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर बुधवार को चतरा में एक दिवसीय चक्का जाम किया गया। मंगलवार शाम मशाल जुलूस निकालने के बाद बुधवार को आंदोलनकारी सड़क पर उतरे और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर आयोजित चक्का जाम का नेतृत्व मोर्चा के जिलाध्यक्ष कैलाश सिंह, जिला प्रवक्ता राजकिशोर कमल और जिला सचिव सुगन साव ने किया। आंदोलनकारियों ने कहा कि अलग झारखंड राज्य के गठन के लिए उन्होंने संघर्ष किया और कई साथियों ने बलिदान दिया, लेकिन राज्य बनने के बाद भी उन्हें अपेक्षित मान-सम्मान और अधिकार नहीं मिल रहे हैं। मोर्चा नेताओं ने सरकार पर वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाते हुए मांगों के लिए आर-पार की लड़ाई जारी रखने की बात कही। 29 सितंबर को चतरा में मशाल जुलूस और 30 सितंबर को बंद की घोषणा पहले ही की गयी थी। 50 हजार पेंशन और जेल जाने की बाध्यता खत्म करने की मांग मोर्चा के प्रवक्ता राजकिशोर कमल ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर आंदोलनकारियों की मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से लगातार आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन ठोस निर्णय नहीं लिया गया। आंदोलनकारियों ने सभी झारखंड आंदोलनकारियों को 50-50 हजार रुपये मासिक सम्मान पेंशन देने की मांग की। साथ ही आंदोलनकारी की पहचान के लिए जेल जाने की बाध्यता तत्काल समाप्त करने, सभी आंदोलनकारियों को स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराने तथा उनके बच्चों के लिए शिक्षा की गारंटी की मांग रखी। आश्रितों और बच्चों को सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग भी शामिल है। पेंशन, पहचान की प्रक्रिया और आश्रितों के अधिकारों से जुड़ी ऐसी मांगें झारखंड आंदोलनकारी संगठनों की ओर से पहले भी उठायी जाती रही हैं। सड़क से संसद तक आंदोलन की चेतावनी आंदोलनकारियों ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को सड़क से लेकर संसद तक ले जाया जाएगा। राजकिशोर कमल ने कहा कि आंदोलनकारी अपने अधिकारों के लिए पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने जल, जंगल और जमीन के मुद्दे पर भी आंदोलन जारी रखने की बात कही। आंदोलनकारियों ने सरकार से लंबित मांगों पर स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की। चक्का जाम के दौरान आंदोलनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया। राज्य के अन्य हिस्सों में भी मोर्चा की ओर से पेंशन और अन्य मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन की घोषणाएं की गयी हैं। झारखंड आंदोलनकारियों की लंबित मांगों को लेकर झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर बुधवार को चतरा में एक दिवसीय चक्का जाम किया गया। मंगलवार शाम मशाल जुलूस निकालने के बाद बुधवार को आंदोलनकारी सड़क पर उतरे और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर आयोजित चक्का जाम का नेतृत्व मोर्चा के जिलाध्यक्ष कैलाश सिंह, जिला प्रवक्ता राजकिशोर कमल और जिला सचिव सुगन साव ने किया। आंदोलनकारियों ने कहा कि अलग झारखंड राज्य के गठन के लिए उन्होंने संघर्ष किया और कई साथियों ने बलिदान दिया, लेकिन राज्य बनने के बाद भी उन्हें अपेक्षित मान-सम्मान और अधिकार नहीं मिल रहे हैं। मोर्चा नेताओं ने सरकार पर वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाते हुए मांगों के लिए आर-पार की लड़ाई जारी रखने की बात कही। 29 सितंबर को चतरा में मशाल जुलूस और 30 सितंबर को बंद की घोषणा पहले ही की गयी थी। 50 हजार पेंशन और जेल जाने की बाध्यता खत्म करने की मांग मोर्चा के प्रवक्ता राजकिशोर कमल ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर आंदोलनकारियों की मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से लगातार आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन ठोस निर्णय नहीं लिया गया। आंदोलनकारियों ने सभी झारखंड आंदोलनकारियों को 50-50 हजार रुपये मासिक सम्मान पेंशन देने की मांग की। साथ ही आंदोलनकारी की पहचान के लिए जेल जाने की बाध्यता तत्काल समाप्त करने, सभी आंदोलनकारियों को स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराने तथा उनके बच्चों के लिए शिक्षा की गारंटी की मांग रखी। आश्रितों और बच्चों को सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग भी शामिल है। पेंशन, पहचान की प्रक्रिया और आश्रितों के अधिकारों से जुड़ी ऐसी मांगें झारखंड आंदोलनकारी संगठनों की ओर से पहले भी उठायी जाती रही हैं। सड़क से संसद तक आंदोलन की चेतावनी आंदोलनकारियों ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को सड़क से लेकर संसद तक ले जाया जाएगा। राजकिशोर कमल ने कहा कि आंदोलनकारी अपने अधिकारों के लिए पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने जल, जंगल और जमीन के मुद्दे पर भी आंदोलन जारी रखने की बात कही। आंदोलनकारियों ने सरकार से लंबित मांगों पर स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की। चक्का जाम के दौरान आंदोलनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया। राज्य के अन्य हिस्सों में भी मोर्चा की ओर से पेंशन और अन्य मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन की घोषणाएं की गयी हैं।

