सुकमा जिले में बाघ की मौजूदगी की सूचना ने एक बार फिर ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। जिला मुख्यालय के करीब मुरतोंडा और तुंगल बांध के जंगलों में बाघ के पदचिह्न मिलने की जानकारी सामने आई है। इसी इलाके में कुछ जानवरों पर बाघ के हमले की सूचना भी मिली है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने जंगल में बाघ के दहाड़ने की आवाज भी सुनी है। इन सूचनाओं के बाद वन विभाग का अमला बाघ की तलाश और ट्रैकिंग में जुटा हुआ है। 15 कैमरा ट्रैप लगाए, अब तक नहीं मिली तस्वीर वन विभाग ने बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए जंगल में करीब 15 कैमरा ट्रैप लगाए हैं। हालांकि अब तक किसी भी कैमरे में बाघ की तस्वीर कैद नहीं हुई है। फिलहाल वन विभाग पदचिह्नों के आधार पर उसकी संभावित लोकेशन तलाश रहा है। टीम जंगल के अलग-अलग हिस्सों में निगरानी कर रही है और बाघ की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। ग्रामीणों को जंगल नहीं जाने की सलाह बाघ की मौजूदगी की सूचना को देखते हुए वन विभाग ने आसपास के ग्रामीणों से सतर्क रहने और जंगल में अकेले नहीं जाने की अपील की है। विभाग ने कहा है कि बाघ दिखाई देने या उसकी गतिविधि से जुड़ी कोई जानकारी मिलने पर तुरंत वन विभाग को सूचना दें। ग्रामीणों को बाघ के पीछे जाने, उसे देखने के लिए भीड़ लगाने या किसी तरह से परेशान करने से बचने की सलाह दी गई है। 23 सितंबर को कोयाबेकुर में दिखने की सूचना गौरतलब है कि 23 सितंबर को कोयाबेकुर क्षेत्र में भी बाघ दिखाई देने की सूचना मिली थी। इसके बाद से वन विभाग उसकी गतिविधियों पर नजर रख रहा है। अब जिला मुख्यालय के करीब पदचिह्न मिलने की जानकारी के बाद संभावित बाघ विचरण क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है। DFO बोले- पूरी टीम ट्रैकिंग में जुटी DFO अक्षय कुमार भोंसले ने बताया कि क्षेत्र में बाघ के पदचिह्न मिले हैं। इसके बाद वन विभाग की पूरी टीम उसकी ट्रैकिंग में जुटी हुई है। बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए आवश्यक उपाय किए जा रहे हैं। उन्होंने आम लोगों से सावधानी बरतने और वन विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की है।

