पॉक्सो अधिनियम पर की चर्चा:पीड़िता बच्चों को न्याय, पुनर्वास और कानूनी सहायता समय से दिलाने पर जोर

पॉक्सो अधिनियम पर की चर्चा:पीड़िता बच्चों को न्याय, पुनर्वास और कानूनी सहायता समय से दिलाने पर जोर

कुशीनगर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में सोमवार को एडीआर भवन में बाल यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो), 2012 एवं पॉक्सो नियमावली, 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर त्रैमासिक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव भुवन ने की। इसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों और संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य पॉक्सो मामलों में पीड़ित बच्चों को न्याय, पुनर्वास, चिकित्सकीय, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और कानूनी सहायता समय से उपलब्ध कराने के लिए संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना रहा। इस दौरान जांच और न्यायिक प्रक्रिया में सपोर्ट पर्सन की भूमिका तथा उसकी सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की भी समीक्षा की गई। जिला प्रोबेशन अधिकारी शैलेन्द्र कुमार गौतम ने पीड़ित बच्चों को चिकित्सकीय खर्च एवं अन्य राहत के लिए समय से अंतरिम मुआवजा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया की जानकारी दी। विशेष अभियोजन अधिकारी एसपी यादव ने पॉक्सो मामलों में न्यायालय में होने वाली विचारण प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया। अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरडी कुशवाहा ने पीड़ित बच्चों को तत्काल चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराने और मानसिक आघात से उबारने के लिए नियमित काउंसलिंग की आवश्यकता पर जोर दिया। पुलिस विभाग की ओर से उप निरीक्षक प्रगति जायसवाल एवं राजेश कुमार ने पॉक्सो मामलों की विवेचना और पुलिस स्तर पर की जाने वाली कार्रवाई के संबंध में जानकारी दी। बैठक में डीआईओएस श्रवण कुमार गुप्ता, बीएसए अनिल कुमार सिंह, सपोर्ट पर्सन धनंजय मणि त्रिपाठी व संदीप कुमार पाण्डेय, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के अनिरुद्ध कुशवाहा, वन स्टॉप सेंटर की मैनेजर रीता यादव, डिस्ट्रिक्ट मिशन कोऑर्डिनेशन से नलिन सिंह, चाइल्ड हेल्पलाइन से अभिषेक कुमार सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने पॉक्सो मामलों में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं पर भी चर्चा की। विशेष रूप से डीएनए सैंपल के संरक्षण और पर्याप्त फॉरेंसिक लैब की उपलब्धता का मुद्दा उठाया गया। अंत में सचिव भुवन ने संबंधित अधिकारियों को अधिनियम के प्रावधानों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने और पीड़ित बच्चों को समयबद्ध सहायता व विधिक संरक्षण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

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