बांदा में करीब तीन करोड़ रुपए की कोडीनयुक्त कफ सिरप की खेप पकड़े जाने के बाद फरार हुआ रवींद्र गुप्ता 22 दिन तक पुलिस से बचता रहा। पुलिस के मुताबिक, उसने मोबाइल बंद कर दिया था और लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। इस दौरान उसने ट्रेन और बस से करीब एक हजार किलोमीटर का सफर किया। पुलिस ने रवींद्र के संपर्क में रहने वाले एक दर्जन से ज्यादा मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगाए थे। इन नंबरों से मिली जानकारियों के आधार पर पुलिस उसकी गतिविधियों की कड़ियां जोड़ती रही। हमीरपुर से फतेहपुर, फिर कानपुर पहुंचा 3 सितंबर को कोडीनयुक्त कफ सिरप की खेप पकड़े जाने के बाद रवींद्र हमीरपुर के आसपास छिपा रहा। 9 सितंबर को उसकी आखिरी मोबाइल लोकेशन हमीरपुर में मिली। इसके बाद उसने मोबाइल बंद कर दिया। पुलिस की दबिश बढ़ने पर करीब 10 सितंबर को वह फतेहपुर के बिंदकी क्षेत्र के देवमई गांव पहुंचा। यहां करीब दो दिन रुकने के बाद कानपुर चला गया। कानपुर में वह अपनी दूसरी बहन के यहां कुड़नी दरबार में करीब दो दिन रुका। ट्रेन से घाटमपुर होते हुए बांदा आया इसके बाद रवींद्र ट्रेन से घाटमपुर होते हुए 19 सितंबर को बांदा पहुंचा। 20 सितंबर को वह दिनभर बांदा रेलवे स्टेशन के आसपास रहा। अगले दिन 21 सितंबर को बांदा से प्रयागराज पहुंच गया। 22 सितंबर को प्रयागराज से ट्रेन के जरिए मध्य प्रदेश के सतना जिले के मझगवां पहुंचा। यहां वह एक रिश्तेदार के घर करीब तीन दिन रुका। पुलिस की दबिश से पहले मिल जाती थी सूचना पुलिस के अनुसार, रवींद्र के संपर्क में रहने वाले लोगों के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगाए गए थे। पुलिस जिस ठिकाने पर दबिश देती, उससे पहले ही रवींद्र को इसकी भनक लग जाती थी। इसके बाद वह वहां से निकलकर दूसरा ठिकाना बदल लेता था। रवींद्र की तलाश में पुलिस ने हमीरपुर, महोबा, फतेहपुर, कानपुर और आगरा समेत करीब 25 ठिकानों पर दबिश दी। मझगवां से लौटते समय बदौसा में घेराबंदी मझगवां में करीब तीन दिन रुकने के बाद शुक्रवार सुबह रवींद्र बांदा लौट रहा था। पुलिस को उसके बदौसा पहुंचने की सूचना मिली। इसके बाद विवेचक गौरव मिश्रा और सिपाही जितेंद्र कुमार ने रेलवे स्टेशन तिराहे के पास घेराबंदी की। रवींद्र के वहां पहुंचते ही पुलिस टीम ने उसे पकड़ लिया। पुलिस अब उससे कोडीनयुक्त कफ सिरप की खेप और उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में पूछताछ कर रही है।

