स्कूल में बुक-पेन की जगह बच्चों के हाथों में झाड़ू:पश्चिम चंपारण के सरकारी स्कूलों में सफाई एजेंसी पर रोक से बिगड़ी व्यवस्था

स्कूल में बुक-पेन की जगह बच्चों के हाथों में झाड़ू:पश्चिम चंपारण के सरकारी स्कूलों में सफाई एजेंसी पर रोक से बिगड़ी व्यवस्था

पश्चिम चंपारण जिले के सरकारी स्कूलों में सफाई व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में यह समस्या सामने आई है। दरअसल, स्कूलों की साफ-सफाई का जिम्मा जिस एजेंसी को दिया गया था, उस पर अभी रोक लगा दी गई है। बच्चों का समय पढ़ाई की जगह सफाई में इस रोक के बाद कई स्कूलों में सफाई व्यवस्था बिगड़ गई है। स्कूल परिसर, क्लासरूम और शौचालयों की नियमित सफाई नहीं हो पा रही है। सफाई व्यवस्था ठप होने के कारण अब कई स्कूलों में शिक्षक और छात्र खुद ही सफाई करते दिख रहे हैं। कहीं छात्र स्कूल परिसर में झाड़ू लगा रहे हैं, तो कहीं शिक्षक शौचालय और दूसरी जगहों की सफाई कर रहे हैं। इससे स्कूलों में पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों से सफाई का काम कराने पर भी सवाल उठ रहे हैं। यह चिंता का विषय है कि बच्चों का समय पढ़ाई की जगह सफाई में लग रहा है। सफाई के लिए तुरंत कोई दूसरा इंतजाम करने की मांग स्कूलों में साफ-सुथरा माहौल बनाए रखना बहुत जरूरी है। गंदगी से बच्चों और शिक्षकों को परेशानी हो सकती है, साथ ही बीमारियों का खतरा भी बना रहता है। लेकिन जब सफाई की तय व्यवस्था बंद हो जाती है और इसकी जिम्मेदारी शिक्षकों और छात्रों पर आ जाती है, तो इसका सीधा असर पढ़ाई पर पड़ता है। शिक्षकों का मुख्य काम बच्चों को अच्छी शिक्षा देना है, और बच्चों का काम पढ़ाई करना है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों में सफाई के लिए तुरंत कोई दूसरा इंतजाम किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि सफाई जरूरी है, लेकिन बच्चों को नियमित रूप से इस काम में लगाना ठीक नहीं है। अभिभावकों ने मांग की है कि पढ़ाई पर असर न पड़े, इसके लिए संबंधित विभाग को जल्द से जल्द सफाई व्यवस्था को ठीक करना चाहिए। पश्चिम चंपारण जिले के सरकारी स्कूलों में सफाई व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में यह समस्या सामने आई है। दरअसल, स्कूलों की साफ-सफाई का जिम्मा जिस एजेंसी को दिया गया था, उस पर अभी रोक लगा दी गई है। बच्चों का समय पढ़ाई की जगह सफाई में इस रोक के बाद कई स्कूलों में सफाई व्यवस्था बिगड़ गई है। स्कूल परिसर, क्लासरूम और शौचालयों की नियमित सफाई नहीं हो पा रही है। सफाई व्यवस्था ठप होने के कारण अब कई स्कूलों में शिक्षक और छात्र खुद ही सफाई करते दिख रहे हैं। कहीं छात्र स्कूल परिसर में झाड़ू लगा रहे हैं, तो कहीं शिक्षक शौचालय और दूसरी जगहों की सफाई कर रहे हैं। इससे स्कूलों में पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों से सफाई का काम कराने पर भी सवाल उठ रहे हैं। यह चिंता का विषय है कि बच्चों का समय पढ़ाई की जगह सफाई में लग रहा है। सफाई के लिए तुरंत कोई दूसरा इंतजाम करने की मांग स्कूलों में साफ-सुथरा माहौल बनाए रखना बहुत जरूरी है। गंदगी से बच्चों और शिक्षकों को परेशानी हो सकती है, साथ ही बीमारियों का खतरा भी बना रहता है। लेकिन जब सफाई की तय व्यवस्था बंद हो जाती है और इसकी जिम्मेदारी शिक्षकों और छात्रों पर आ जाती है, तो इसका सीधा असर पढ़ाई पर पड़ता है। शिक्षकों का मुख्य काम बच्चों को अच्छी शिक्षा देना है, और बच्चों का काम पढ़ाई करना है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों में सफाई के लिए तुरंत कोई दूसरा इंतजाम किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि सफाई जरूरी है, लेकिन बच्चों को नियमित रूप से इस काम में लगाना ठीक नहीं है। अभिभावकों ने मांग की है कि पढ़ाई पर असर न पड़े, इसके लिए संबंधित विभाग को जल्द से जल्द सफाई व्यवस्था को ठीक करना चाहिए।  

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