मुजफ्फरपुर पुलिस ने फर्जी पेमेंट रसीद दिखाकर ठगी करने वाले एक अंतरजिला साइबर अपराधी गिरोह का खुलासा किया है। गिरोह के मास्टरमाइंड समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार ने इसकी पुष्टि की है।
आरोपियों की पहचान मास्टमाइंड मनीष कुमार, सहयोगी रिमझिम कुमार और मोबाइल दुकान संचालत मो. परवेज आलम के तौर पर हुई है। आरोपियों के पास से 5 मोबाइल और 188 पीस ठगी की गई मोबाइल फोल्डर मिले, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 1.10 लाख रुपए हैं। फर्जी ट्रांजेक्शन की रसीद दिखाई साइबर डीएसपी ने बताया कि यह मामला 19 सितंबर 2026 का है। साइबर थाने में ‘क्राउन फोल्डर’ दुकान के मालिक भाग्य भूषण ने शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि कुछ अनजान लोगों ने उनके व्हाट्सएप नंबर पर संपर्क करके मोबाइल फोल्डर का ऑर्डर दिया था। आरोपियों ने 15 सितंबर 2026 को 43,000 रुपए और 16 सितंबर 2026 को 77,314 रुपए की फर्जी ट्रांजेक्शन रसीद दिखाई। कुल 1,20,314 रुपए की यह रकम फर्जी थी। उन्होंने रैपिडो डिलीवरी कूरियर के जरिए कांटी छिन्नमस्तिका मंदिर के पास से कुल 210 मोबाइल फोल्डर मंगवा लिए। जब बैंक स्टेटमेंट चेक किया, तब उन्हें इस ठगी का पता चला। शिकायत के आधार पर साइबर थाने में केस नंबर 147/26 दर्ज किया गया। एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा के निर्देश पर, पुलिस अधीक्षक (नगर) की देखरेख में और साइबर डीएसपी के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई। टीम ने जांच और सबूत इकट्ठा करके सिर्फ 8 घंटे में मुख्य आरोपी मनीष कुमार को पकड़ लिया। उसके पास से ठगी में इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल फोन भी मिले हैं। मास्टरमाइंड की निशानदेही पर दो और सहयोगी गिरफ्तार जांच में सामने आया कि मुख्य अभियुक्त मनीष कुमार दिव्यांग है। पूछताछ और उसकी निशानदेही पर पुलिस ने रैपिडो के माध्यम से डिलीवरी प्राप्त करने वाले सहयोगी रिमझिम कुमार (थाना-मोतीपुर, जिला-मुजफ्फरपुर) को घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल और मोबाइल के साथ गिरफ्तार किया। इसके बाद दोनों की निशानदेही पर ठगी का सामान खरीदने वाले मोबाइल दुकान संचालक मो. परवेज आलम (थाना-राजेपुर ओपी, जिला-मुजफ्फरपुर) को गिरफ्तार किया गया। जाली ऐप और डिजिटल टूल्स से बनाते थे रसीद अनुसंधान में यह तथ्य सामने आया कि मास्टरमाइंड मनीष कुमार पूर्व में मोबाइल रिपेयरिंग का काम करता था। मोबाइल पार्ट्स और तकनीकी जानकारी होने के कारण वह व्यवसायियों को अपना सॉफ्ट टारगेट बनाता था। वह डिजिटल टूल्स एवं जाली ऐप्स का उपयोग कर हूबहू असली दिखने वाली फर्जी पेमेंट रसीद व स्क्रीनशॉट तैयार करता था। सामान मंगवाने के बाद उसे कम कीमत पर बेचकर अवैध आर्थिक लाभ कमाता था। मुजफ्फरपुर पुलिस ने फर्जी पेमेंट रसीद दिखाकर ठगी करने वाले एक अंतरजिला साइबर अपराधी गिरोह का खुलासा किया है। गिरोह के मास्टरमाइंड समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार ने इसकी पुष्टि की है।
आरोपियों की पहचान मास्टमाइंड मनीष कुमार, सहयोगी रिमझिम कुमार और मोबाइल दुकान संचालत मो. परवेज आलम के तौर पर हुई है। आरोपियों के पास से 5 मोबाइल और 188 पीस ठगी की गई मोबाइल फोल्डर मिले, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 1.10 लाख रुपए हैं। फर्जी ट्रांजेक्शन की रसीद दिखाई साइबर डीएसपी ने बताया कि यह मामला 19 सितंबर 2026 का है। साइबर थाने में ‘क्राउन फोल्डर’ दुकान के मालिक भाग्य भूषण ने शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि कुछ अनजान लोगों ने उनके व्हाट्सएप नंबर पर संपर्क करके मोबाइल फोल्डर का ऑर्डर दिया था। आरोपियों ने 15 सितंबर 2026 को 43,000 रुपए और 16 सितंबर 2026 को 77,314 रुपए की फर्जी ट्रांजेक्शन रसीद दिखाई। कुल 1,20,314 रुपए की यह रकम फर्जी थी। उन्होंने रैपिडो डिलीवरी कूरियर के जरिए कांटी छिन्नमस्तिका मंदिर के पास से कुल 210 मोबाइल फोल्डर मंगवा लिए। जब बैंक स्टेटमेंट चेक किया, तब उन्हें इस ठगी का पता चला। शिकायत के आधार पर साइबर थाने में केस नंबर 147/26 दर्ज किया गया। एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा के निर्देश पर, पुलिस अधीक्षक (नगर) की देखरेख में और साइबर डीएसपी के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई। टीम ने जांच और सबूत इकट्ठा करके सिर्फ 8 घंटे में मुख्य आरोपी मनीष कुमार को पकड़ लिया। उसके पास से ठगी में इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल फोन भी मिले हैं। मास्टरमाइंड की निशानदेही पर दो और सहयोगी गिरफ्तार जांच में सामने आया कि मुख्य अभियुक्त मनीष कुमार दिव्यांग है। पूछताछ और उसकी निशानदेही पर पुलिस ने रैपिडो के माध्यम से डिलीवरी प्राप्त करने वाले सहयोगी रिमझिम कुमार (थाना-मोतीपुर, जिला-मुजफ्फरपुर) को घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल और मोबाइल के साथ गिरफ्तार किया। इसके बाद दोनों की निशानदेही पर ठगी का सामान खरीदने वाले मोबाइल दुकान संचालक मो. परवेज आलम (थाना-राजेपुर ओपी, जिला-मुजफ्फरपुर) को गिरफ्तार किया गया। जाली ऐप और डिजिटल टूल्स से बनाते थे रसीद अनुसंधान में यह तथ्य सामने आया कि मास्टरमाइंड मनीष कुमार पूर्व में मोबाइल रिपेयरिंग का काम करता था। मोबाइल पार्ट्स और तकनीकी जानकारी होने के कारण वह व्यवसायियों को अपना सॉफ्ट टारगेट बनाता था। वह डिजिटल टूल्स एवं जाली ऐप्स का उपयोग कर हूबहू असली दिखने वाली फर्जी पेमेंट रसीद व स्क्रीनशॉट तैयार करता था। सामान मंगवाने के बाद उसे कम कीमत पर बेचकर अवैध आर्थिक लाभ कमाता था।

