गोविंददेवजी मंदिर से दीया कुमारी ने रवाना की लोकमंथन यात्रा:हवामहल, बड़ी-चौपड़ होते हुए महारानी कॉलेज पहुंची यात्रा, रास्तों को रंगोली से सजाया

गोविंददेवजी मंदिर से दीया कुमारी ने रवाना की लोकमंथन यात्रा:हवामहल, बड़ी-चौपड़ होते हुए महारानी कॉलेज पहुंची यात्रा, रास्तों को रंगोली से सजाया

लोक संस्कृति, लोक परंपरा और भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध रंगों को आमजन तक पहुंचाने के उद्देश्य से सोमवार को जयपुर में ‘लोकमंथन यात्रा-जयपुर महानगर’ निकाली गई। गोविंद देवजी मंदिर में दर्शन के बाद जलेबी चौक से यात्रा का शुभारंभ हुआ। उपमुख्यमंत्री एवं लोकमंथन-2026 आयोजन समिति की अध्यक्ष दीया कुमारी ने यात्रा रथ को रवाना किया। यात्रा में बड़ी संख्या में शहरवासी, प्रबुद्धजन, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, विद्यार्थी और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग शामिल हुए। यात्रा हवामहल, बड़ी चौपड़ और अल्बर्ट हॉल होते हुए महारानी कॉलेज पहुंची। यात्रा मार्ग को रंगोलियों से सजाया गया था। विभिन्न स्थानों पर व्यापार मंडलों और समाजजनों की ओर से पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया गया। लोक परंपरा के ध्वज, लोक वाद्य, पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने यात्रा को लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर किया।
खेलों के प्रदर्शन ने भी खींचा ध्यान यात्रा में क्रीड़ा भारती के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों ने भी सहभागिता की। खिलाड़ियों ने साइकिलिंग, स्केटिंग, फुटबॉल, कबड्डी और सतोलिया सहित पारंपरिक एवं आधुनिक खेल गतिविधियों का प्रदर्शन किया। पारंपरिक खेलों और लोक संस्कृति को एक साथ प्रस्तुत करने का उद्देश्य युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना भी रहा। ‘लोक से जुड़ाव ही लोककल्याण का आधार’ दीया कुमारी ने कहा कि 4 से 6 दिसंबर तक होने वाला लोकमंथन-2026 इस यात्रा के जरिए समाज जागरण और समाज को जोड़ने की दिशा में एक पहल है। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा मूल रूप से लोक आधारित रही है और लोक जीवन के मूल्य प्रकृति एवं पर्यावरण के साथ सामंजस्य तथा सतत जीवनशैली को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा कि लोक से जुड़ाव ही लोककल्याण का आधार है और लोकमंथन से लोकमंगल का मार्ग प्रशस्त होगा। महारानी कॉलेज में लोक संस्कृति के कई रंग यात्रा के महारानी कॉलेज पहुंचने के बाद यहां लोक साहित्य, लोक संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम शुरू हुए। कॉलेज परिसर में पारंपरिक वेशभूषा और भारतीय रीति-रिवाजों के साथ यात्रा का स्वागत किया गया। छात्राओं ने तिलक, कच्छी घोड़ी नृत्य, शहनाई वादन और ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया। मुख्य सभागार में वैदिक मंगलाचरण, लोक नृत्य, मांड़ गायन, भवई, चरी और कालबेलिया नृत्य, कच्छी घोड़ी, कठपुतली नृत्य, लोकगीत तथा लोक साहित्य और संस्कृति पर व्याख्यान आयोजित किए जा रहे हैं। ‘लोक में भारत’ और ‘लोक साहित्य और संस्कृति’ जैसे विषयों पर संवाद भी होंगे। लोकदेवताओं और लोकनायकों की झांकियां भी आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहेंगी। बाबा रामदेवजी, वीर तेजाजी और संत रविदासजी से जुड़ी झांकियों के माध्यम से लोक आस्था, सामाजिक समरसता और लोक चेतना के विभिन्न पक्षों को सामने रखा जा रहा है। महारानी कॉलेज में मुख्य सभागार के अलावा सेमिनार हॉल और खुले मंच पर भी अलग-अलग कार्यक्रम हो रहे हैं। सेमिनार हॉल में जयपुर की लोक कला एवं संस्कृति पर प्रश्नोत्तरी, ‘लोक परंपराएं’ विषय पर लोक संवाद और ‘हम भारत के लोग—हमारी भाषा, हमारी पहचान’ विषय पर गोष्ठी की जा रही है। खुले मंच पर संस्कृत संभाषण, जादू, लोक रंग, लोक कथा, लोक कविता और लोक स्मृतियों से जुड़े कार्यक्रम हो रहे हैं। परिसर के विभिन्न उद्यानों में लोक कला, लोक विज्ञान, भारतीय संविधान, गुरुकुल एवं भारतीय शिक्षा परंपरा, राजस्थान की वीर-वीरांगनाओं और औषधीय पौधों से संबंधित प्रदर्शनियां भी लगाई गई है। साहित्य केंद्र और लोक संस्कृति से जुड़े स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र है। खेल मैदान में कबड्डी, रस्साकशी और तीरंदाजी सहित पारंपरिक खेलों की गतिविधियां भी आयोजित की जा रही है। अब दिसंबर में होगा लोकमंथन का मुख्य आयोजन जयपुर में निकली यात्रा को दिसंबर में होने वाले लोकमंथन-2026 के मुख्य आयोजन की पूर्व गतिविधि के तौर पर देखा जा रहा है। मुख्य आयोजन 4 से 6 दिसंबर 2026 तक जयपुर के जवाहर कला केंद्र में प्रस्तावित है। इस बार इसका केंद्रीय विषय ‘हम भारत के लोग’ है। आयोजन का व्यापक उद्देश्य भारतीय लोकचेतना, संस्कृति, ज्ञान परंपरा और समकालीन विषयों पर संवाद को मंच देना है। आयोजन में देश के विभिन्न हिस्सों से विचारकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, कलाकारों और लोक साधकों के शामिल होने की योजना है। लोक कला और संस्कृति के साथ विचार-विमर्श को जोड़ना इस आयोजन का प्रमुख पक्ष रहेगा।

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