समता पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष और जिला बीस सूत्री के उपाध्यक्ष रहे वरिष्ठ नेता को नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई; दो साल पहले उद्घाटन के बाद भी सुविधा पूरी तरह चालू नहीं होने पर नाराजगी जहानाबाद में समता पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष, जदयू के जिलाध्यक्ष और जिला बीस सूत्री के उपाध्यक्ष रहे वरिष्ठ नेता का निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, समर्थक और शुभचिंतक उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। परिजन रो-रोकर बेहाल रहे। दिवंगत नेता मगध विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य और बुद्ध विचार मंच के संरक्षक भी रहे थे। वे लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय थे। सदर अस्पताल परिसर में जगदेव बाबू की जयंती पर आयोजित होने वाले माल्यार्पण कार्यक्रम में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रहती थी। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं से उनके अच्छे संबंध बताए जाते थे। अंतिम दर्शन के बाद पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए जहानाबाद के शवदाह गृह ले जाया गया। यहां पहुंचने के बाद व्यवस्था को लेकर लोगों में नाराजगी दिखी। स्थानीय लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना था कि शवदाह गृह का उद्घाटन करीब दो साल पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था, लेकिन इसके बाद से यह पूरी तरह आम लोगों के उपयोग में नहीं आ सका। अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने पर वहां सुविधाओं की कमी सामने आई। लोगों का कहना था कि यदि उद्घाटन के बाद ही शवदाह गृह को पूरी तरह चालू कर दिया जाता, तो आज अंतिम संस्कार के दौरान लोगों को परेशानी नहीं होती। मौके पर मौजूद लोगों ने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए सवाल उठाया कि सार्वजनिक सुविधाओं का उद्घाटन होने के बाद उसका इस्तेमाल शुरू कराने में इतनी देरी क्यों? लोगों ने कहा कि किसी योजना का वास्तविक फायदा तभी है, जब वह उद्घाटन के बाद समय पर आम जनता के काम आए। व्यवस्था को लेकर नाराजगी के बीच लोगों ने दिवंगत नेता को नम आंखों से अंतिम विदाई दी। समता पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष और जिला बीस सूत्री के उपाध्यक्ष रहे वरिष्ठ नेता को नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई; दो साल पहले उद्घाटन के बाद भी सुविधा पूरी तरह चालू नहीं होने पर नाराजगी जहानाबाद में समता पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष, जदयू के जिलाध्यक्ष और जिला बीस सूत्री के उपाध्यक्ष रहे वरिष्ठ नेता का निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, समर्थक और शुभचिंतक उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। परिजन रो-रोकर बेहाल रहे। दिवंगत नेता मगध विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य और बुद्ध विचार मंच के संरक्षक भी रहे थे। वे लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय थे। सदर अस्पताल परिसर में जगदेव बाबू की जयंती पर आयोजित होने वाले माल्यार्पण कार्यक्रम में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रहती थी। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं से उनके अच्छे संबंध बताए जाते थे। अंतिम दर्शन के बाद पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए जहानाबाद के शवदाह गृह ले जाया गया। यहां पहुंचने के बाद व्यवस्था को लेकर लोगों में नाराजगी दिखी। स्थानीय लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना था कि शवदाह गृह का उद्घाटन करीब दो साल पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था, लेकिन इसके बाद से यह पूरी तरह आम लोगों के उपयोग में नहीं आ सका। अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने पर वहां सुविधाओं की कमी सामने आई। लोगों का कहना था कि यदि उद्घाटन के बाद ही शवदाह गृह को पूरी तरह चालू कर दिया जाता, तो आज अंतिम संस्कार के दौरान लोगों को परेशानी नहीं होती। मौके पर मौजूद लोगों ने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए सवाल उठाया कि सार्वजनिक सुविधाओं का उद्घाटन होने के बाद उसका इस्तेमाल शुरू कराने में इतनी देरी क्यों? लोगों ने कहा कि किसी योजना का वास्तविक फायदा तभी है, जब वह उद्घाटन के बाद समय पर आम जनता के काम आए। व्यवस्था को लेकर नाराजगी के बीच लोगों ने दिवंगत नेता को नम आंखों से अंतिम विदाई दी।

