पश्चिम बंगाल के पूर्वा बर्धमान स्थित यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी UIT में विश्वकर्मा पूजा की अनुमति मांगने पर उपद्रवियों ने बिहारी छात्रों पर जानलेवा हमला किया। पूजा की अनुमति मांगने गए छात्रों को प्रिंसिपल चेंबर में बंधक बनाकर लोहे की रॉड, कैंची और डंडों से बुरी तरह पीटा गया। हमले में झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश के कई छात्र गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों में शामिल एक छात्र के सिर पर 32 टांके आए हैं और उसके सिर की हड्डी भी डैमेज हुई है। गया के गुरुआ प्रखंड के रहने वाले पीड़ित छात्र सौरभ सिंह ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि बंगाली छात्रों के हमले में मेरे सिर पर 5 टांके लगे हैं। सौरभ इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर फोर्थ सेमेस्टर के स्टूडेंट हैं। घटना शाम बुधवार करीब 6 बजकर 30 मिनट की है। उन्होंने कहा कि बिहार में बड़े पैमाने पर विश्वकर्मा पूजा मनाई जाती है। इसलिए इंस्टीट्यूट में विश्वकर्मा पूजा के आयोजन के लिए हम लोग प्रिंसिपल से अनुमति लेने गए थे। बुधवार को बर्दवान यूनिवर्सिटी के टेक्नोलॉजी इंस्टिट्यूट कैंपस में क्या हुआ था? गया के छात्र सौरभ ने क्या कहानी बताई? आखिर क्यों बंगाली छात्रों ने नॉन बंगाली छात्रों पर हमला किया? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। घटना से जुड़ी तीन तस्वीरें देखिए अब सिलसिलेवार तरीके से जानिए पूरा मामला सौरभ ने बताया कि मैं यूनिवर्सिटी इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग का छात्र हूं। ये इंस्टिट्यूट वर्धमान यूनिवर्सिटी से एफिलेटेड है। सौरभ ने बताया कि कॉलेज में हर साल विश्वकर्मा पूजा होता है। इसके लिए हम लोग प्रिंसिपल से परमिशन लेने के लिए बुधवार शाम साढ़े छह बजे उनके केबिन में गए थे। उन्होंने हम लोगों को परमिशन दे दी। उन्होंने कहा कि इससे कुछ देर पहले कुछ बंगाली छात्र प्रिंसिपल के पास गए थे और एबीवीपी के लैटरपैड पर उनसे पूजा के लिए परमिशन ले ली और कहा कि यहां सिर्फ बंगाली छात्र ही पूजा करेंगे, गैर बंगाली छात्रों को इसकी अनुमति नहीं है। अगर आप लोगों को पूजा करनी है तो फिर कैंपस के बाहर कीजिए। सौरभ ने बताया कि हम लोगों ने भी पूजा के लिए परमिशन मांगी। इसके बाद प्रिंसिपल ने कहा कि चलो मेरे केबिन में बात करेंगे। वहां जाने के बाद प्रिंसिपल ने हमें परमिशन भी दी, लेकिन जब ये बात बंगाली छात्रों को पता चली, तो उन्होंने हम लोगों के परमिशन पर स्टे लगवा दिया। घायल सौरभ ने बताया कि इसके बाद कुछ उपद्रवी आए और हम लोगों के साथ धक्का-मुक्की करने लगे। ये सब कुछ प्रिंसिपल ऑफिस में ही हो रहा था। इसके बाद प्रिंसिपल के सामने दोनों पक्षों के बीच बहस होने लगा। वहां एक सुमन बर्मन नाम का लड़का था, जो बंगाल का ही था। उसने अन्य लड़कों के साथ कॉलेज के एंट्री और एग्जिट गेट को बंद करा दिया। इस दौरान प्रिंसिपल के केबिन में तीन से चार प्रोफेसर भी थे, एक वार्डन मैम थी। हम लोग कुछ समझ पाते, इससे पहले बंगाली छात्रों ने बाहर से कुछ उपद्रवी छात्रों को बुला लिया। उनके साथ कुछ लड़कियां भी थी। उन्होंने लड़कियों को आगे कर दिया और हमारी पिटाई करने लगे। हम लोग इसलिए कुछ नहीं कर पाए क्योंकि हमारे आगे लड़कियां आ जा रही थीं। सौरभ ने बताया कि उपद्रवियों के हाथ में डंडा, रॉड, कैंची जैसा औजार थे। करीब 100 से अधिक लोग थे। उन सभी ने हम लोगों के साथ मारपीट शुरू कर दी। इस दौरान प्रिंसिपल के चैंबर की लाइट भी बंद कर दी गई। उपद्रवी जहां चाहे, वहां वार कर रहे थे। इसी दौरान किसी ने पुलिस को कॉल किया, लेकिन जब तक पुलिस आती, यानी 10 से 15 मिनट में हम लोगों के साथ बुरी तरीके से मारपीट की गई। एक लड़के के सिर पर 31 टांके आए हैं, एक का उंगली पूरा कट गया है। मेरे सिर पर भी पांच टांके लगे हैं, पीठ पर हमला किया गया है। प्रिंसिपल की भी पिटाई की लेकिन गार्ड उन्हें निकालकर ले गए सौरभ ने बताया कि मारपीट के दौरान कुछ उपद्रवियों ने प्रिंसिपल को भी निशाना बनाया। हालांकि, उसी समय कॉलेज के कुछ गार्ड पहुंचे और उन्हें वहां से निकालकर अपने साथ ले गए। घायल सौरभ ने बताया कि उपद्रवी हम लोगों को टीएमसी सपोर्टर बता कर टारगेट कर रहे थे,लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। दरअसल, हम लोग अभी फोर्थ ईयर में हैं। जब फर्स्ट ईयर में थे, तो कॉलेज के प्रोफेसर सिर्फ बंगाली में ही पढ़ाते थे, हम लोगों का कहना था कि हिंदी नहीं तो कम से कम अंग्रेजी में पढ़ा दीजिए, ताकि हम लोगों को भी समझ आए। लेकिन उनका कहना होता था कि यहां बंगाली छात्रों की संख्या ज्यादा है, इसलिए बंगाली में ही पढ़ाया जाएगा। इसी दौरान से कुछ लड़कों ने हम लोगों को टार्गेट पर लिया था। ‘हम लोग समस्या को लेकर तृणमूल छात्र परिषद के पास गए थे’ सौरभ ने बताया कि कॉलेज में तृणमूल छात्र परिषद था। हम लोग अपनी समस्या को लेकर उनके पास गए थे। उनसे मदद मांगते थे, कई बार उनकी वजह से हमारा काम भी पूरा हुआ। इसी वजह से आरोपियों को लगा कि हम लोग टीएमसी सपोर्टर हैं। सौरभ ने बताया कि ये बिलकुल गलतफहमी थी। मैं गयाजी के गुरुआ प्रखंड का रहने वाला हूं। घायल छात्र ने कहा कि कॉलेज एडमिनिस्ट्रेशन की ओर से तीन छात्रों पर एफआइआर दर्ज कराई गई है। प्रत्यक्षदर्शी दिपेंदु सरकार ने कहा- पहले हॉस्टल, फिर प्रिंसिपल के केबिन में हंगामा देखा घटना के प्रत्यक्षदर्शी छात्र दिपेंदु सरकार ने बताया कि वे शाम के समय मैदान में थे। अचानक उन्होंने छात्रावास की ओर हंगामा शुरू होते देखा। पहले तो छात्रावास के छात्रों के बीच कहासुनी हुई। बाद में स्थिति तेजी से बदल गई और बाहर से भी लोग आने लगे। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए छात्रों और वहां मौजूद अन्य लोगों को निकालने के प्रयास किए गए। उन्होंने बताया कि एक समय सुरक्षा कारणों से प्रधानाचार्य कार्यालय का शटर भी बंद कर दिया गया था। लेकिन बाद में उसे जबरदस्ती खोलने का प्रयास किया गया और कुछ लोग अंदर घुस गए। आरोप है कि प्रधानाचार्य के कमरे का दरवाजा तोड़कर उसमें तोड़फोड़ की गई और फिर अंदर मौजूद लोगों की पिटाई की गई। दीपेंदु का दावा है कि इस घटना में 4-5 लोग घायल हुए, जिनमें से दो को सिर में गंभीर चोटें आईं। उन्होंने यह भी कहा कि इतने सारे लोगों को संभालना केवल 3-4 सुरक्षा गार्डों के लिए संभव नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस के आने से पहले ही कई लोग बाइक पर सवार होकर इलाके से निकलने लगे थे। छात्र माधव गुप्ता ने आरोप लगाया कि इस घटना के पीछे न केवल पूजा को लेकर असहमति थी, बल्कि यूआईटी में बंगाली और गैर-बंगाली छात्रों के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव भी था। उन्होंने दावा किया कि गैर-बंगाली छात्रों को बार-बार निशाना बनाया जाता था और बाहर दिखने पर उन्हें पीटने की धमकी दी जाती थी। उन्होंने दावा किया कि घटना के समय बाहर से 15-20 लोग, छात्रावास से 15-20 छात्र और पीजी से 10-15 छात्र मौजूद थे। यानी, उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर लगभग 50-60 लोग जमा हुए थे। छात्र संगठन एबीवीपी के महासचिव बोले- ये कॉलेज का इंटरनल मैटर है एबीवीपी के महासचिव सुशोवन चौधरी ने कहा कि यह कॉलेज का आंतरिक मामला है। एबीवीपी इस घटना में किसी भी तरह से शामिल नहीं है। कॉलेज में एबीवीपी की कोई इकाई नहीं है। अगर कोई संगठन के नाम का इस्तेमाल करके किसी झड़प में शामिल होता है तो एबीवीपी इसकी जिम्मेदारी नहीं लेगी। हालांकि, एबीवीपी ने इस बात की जांच की मांग की है कि बाहरी लोगों को कॉलेज में किसने प्रवेश दिया। एबीवीपी के बर्दवान महानगर सचिव सुशोवन चौधरी ने कहा कि यूआईटी में एबीवीपी की कोई संगठनात्मक इकाई नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इस्तेमाल किए जा रहे पैड से संगठन का कोई संबंध नहीं है। उनके शब्दों में, “कोई भी पैड बना सकता है।” उन्होंने यह भी मांग की कि इस बात की जांच की जाए कि क्या पैड को एबीवीपी द्वारा अनुमोदित किया गया है या नहीं। फिलहाल, बर्दवान स्थित यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (यूआईटी) में विश्वकर्मा पूजा के आयोजन को लेकर छात्रों के दो गुटों के बीच झड़प के बाद अशांत माहौल बना हुआ है। कार्यवाहक प्रधानाचार्य सुनील करफॉर्मर ने गुरुवार से कॉलेज में सभी कक्षाएं अनिश्चितकाल के लिए बंद करने का आदेश दिया है। उन्होंने कॉलेज परिसर में स्थित दो छात्रावासों को खाली करने का भी आदेश दिया है। पश्चिम बंगाल के पूर्वा बर्धमान स्थित यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी UIT में विश्वकर्मा पूजा की अनुमति मांगने पर उपद्रवियों ने बिहारी छात्रों पर जानलेवा हमला किया। पूजा की अनुमति मांगने गए छात्रों को प्रिंसिपल चेंबर में बंधक बनाकर लोहे की रॉड, कैंची और डंडों से बुरी तरह पीटा गया। हमले में झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश के कई छात्र गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों में शामिल एक छात्र के सिर पर 32 टांके आए हैं और उसके सिर की हड्डी भी डैमेज हुई है। गया के गुरुआ प्रखंड के रहने वाले पीड़ित छात्र सौरभ सिंह ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि बंगाली छात्रों के हमले में मेरे सिर पर 5 टांके लगे हैं। सौरभ इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर फोर्थ सेमेस्टर के स्टूडेंट हैं। घटना शाम बुधवार करीब 6 बजकर 30 मिनट की है। उन्होंने कहा कि बिहार में बड़े पैमाने पर विश्वकर्मा पूजा मनाई जाती है। इसलिए इंस्टीट्यूट में विश्वकर्मा पूजा के आयोजन के लिए हम लोग प्रिंसिपल से अनुमति लेने गए थे। बुधवार को बर्दवान यूनिवर्सिटी के टेक्नोलॉजी इंस्टिट्यूट कैंपस में क्या हुआ था? गया के छात्र सौरभ ने क्या कहानी बताई? आखिर क्यों बंगाली छात्रों ने नॉन बंगाली छात्रों पर हमला किया? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। घटना से जुड़ी तीन तस्वीरें देखिए अब सिलसिलेवार तरीके से जानिए पूरा मामला सौरभ ने बताया कि मैं यूनिवर्सिटी इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग का छात्र हूं। ये इंस्टिट्यूट वर्धमान यूनिवर्सिटी से एफिलेटेड है। सौरभ ने बताया कि कॉलेज में हर साल विश्वकर्मा पूजा होता है। इसके लिए हम लोग प्रिंसिपल से परमिशन लेने के लिए बुधवार शाम साढ़े छह बजे उनके केबिन में गए थे। उन्होंने हम लोगों को परमिशन दे दी। उन्होंने कहा कि इससे कुछ देर पहले कुछ बंगाली छात्र प्रिंसिपल के पास गए थे और एबीवीपी के लैटरपैड पर उनसे पूजा के लिए परमिशन ले ली और कहा कि यहां सिर्फ बंगाली छात्र ही पूजा करेंगे, गैर बंगाली छात्रों को इसकी अनुमति नहीं है। अगर आप लोगों को पूजा करनी है तो फिर कैंपस के बाहर कीजिए। सौरभ ने बताया कि हम लोगों ने भी पूजा के लिए परमिशन मांगी। इसके बाद प्रिंसिपल ने कहा कि चलो मेरे केबिन में बात करेंगे। वहां जाने के बाद प्रिंसिपल ने हमें परमिशन भी दी, लेकिन जब ये बात बंगाली छात्रों को पता चली, तो उन्होंने हम लोगों के परमिशन पर स्टे लगवा दिया। घायल सौरभ ने बताया कि इसके बाद कुछ उपद्रवी आए और हम लोगों के साथ धक्का-मुक्की करने लगे। ये सब कुछ प्रिंसिपल ऑफिस में ही हो रहा था। इसके बाद प्रिंसिपल के सामने दोनों पक्षों के बीच बहस होने लगा। वहां एक सुमन बर्मन नाम का लड़का था, जो बंगाल का ही था। उसने अन्य लड़कों के साथ कॉलेज के एंट्री और एग्जिट गेट को बंद करा दिया। इस दौरान प्रिंसिपल के केबिन में तीन से चार प्रोफेसर भी थे, एक वार्डन मैम थी। हम लोग कुछ समझ पाते, इससे पहले बंगाली छात्रों ने बाहर से कुछ उपद्रवी छात्रों को बुला लिया। उनके साथ कुछ लड़कियां भी थी। उन्होंने लड़कियों को आगे कर दिया और हमारी पिटाई करने लगे। हम लोग इसलिए कुछ नहीं कर पाए क्योंकि हमारे आगे लड़कियां आ जा रही थीं। सौरभ ने बताया कि उपद्रवियों के हाथ में डंडा, रॉड, कैंची जैसा औजार थे। करीब 100 से अधिक लोग थे। उन सभी ने हम लोगों के साथ मारपीट शुरू कर दी। इस दौरान प्रिंसिपल के चैंबर की लाइट भी बंद कर दी गई। उपद्रवी जहां चाहे, वहां वार कर रहे थे। इसी दौरान किसी ने पुलिस को कॉल किया, लेकिन जब तक पुलिस आती, यानी 10 से 15 मिनट में हम लोगों के साथ बुरी तरीके से मारपीट की गई। एक लड़के के सिर पर 31 टांके आए हैं, एक का उंगली पूरा कट गया है। मेरे सिर पर भी पांच टांके लगे हैं, पीठ पर हमला किया गया है। प्रिंसिपल की भी पिटाई की लेकिन गार्ड उन्हें निकालकर ले गए सौरभ ने बताया कि मारपीट के दौरान कुछ उपद्रवियों ने प्रिंसिपल को भी निशाना बनाया। हालांकि, उसी समय कॉलेज के कुछ गार्ड पहुंचे और उन्हें वहां से निकालकर अपने साथ ले गए। घायल सौरभ ने बताया कि उपद्रवी हम लोगों को टीएमसी सपोर्टर बता कर टारगेट कर रहे थे,लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। दरअसल, हम लोग अभी फोर्थ ईयर में हैं। जब फर्स्ट ईयर में थे, तो कॉलेज के प्रोफेसर सिर्फ बंगाली में ही पढ़ाते थे, हम लोगों का कहना था कि हिंदी नहीं तो कम से कम अंग्रेजी में पढ़ा दीजिए, ताकि हम लोगों को भी समझ आए। लेकिन उनका कहना होता था कि यहां बंगाली छात्रों की संख्या ज्यादा है, इसलिए बंगाली में ही पढ़ाया जाएगा। इसी दौरान से कुछ लड़कों ने हम लोगों को टार्गेट पर लिया था। ‘हम लोग समस्या को लेकर तृणमूल छात्र परिषद के पास गए थे’ सौरभ ने बताया कि कॉलेज में तृणमूल छात्र परिषद था। हम लोग अपनी समस्या को लेकर उनके पास गए थे। उनसे मदद मांगते थे, कई बार उनकी वजह से हमारा काम भी पूरा हुआ। इसी वजह से आरोपियों को लगा कि हम लोग टीएमसी सपोर्टर हैं। सौरभ ने बताया कि ये बिलकुल गलतफहमी थी। मैं गयाजी के गुरुआ प्रखंड का रहने वाला हूं। घायल छात्र ने कहा कि कॉलेज एडमिनिस्ट्रेशन की ओर से तीन छात्रों पर एफआइआर दर्ज कराई गई है। प्रत्यक्षदर्शी दिपेंदु सरकार ने कहा- पहले हॉस्टल, फिर प्रिंसिपल के केबिन में हंगामा देखा घटना के प्रत्यक्षदर्शी छात्र दिपेंदु सरकार ने बताया कि वे शाम के समय मैदान में थे। अचानक उन्होंने छात्रावास की ओर हंगामा शुरू होते देखा। पहले तो छात्रावास के छात्रों के बीच कहासुनी हुई। बाद में स्थिति तेजी से बदल गई और बाहर से भी लोग आने लगे। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए छात्रों और वहां मौजूद अन्य लोगों को निकालने के प्रयास किए गए। उन्होंने बताया कि एक समय सुरक्षा कारणों से प्रधानाचार्य कार्यालय का शटर भी बंद कर दिया गया था। लेकिन बाद में उसे जबरदस्ती खोलने का प्रयास किया गया और कुछ लोग अंदर घुस गए। आरोप है कि प्रधानाचार्य के कमरे का दरवाजा तोड़कर उसमें तोड़फोड़ की गई और फिर अंदर मौजूद लोगों की पिटाई की गई। दीपेंदु का दावा है कि इस घटना में 4-5 लोग घायल हुए, जिनमें से दो को सिर में गंभीर चोटें आईं। उन्होंने यह भी कहा कि इतने सारे लोगों को संभालना केवल 3-4 सुरक्षा गार्डों के लिए संभव नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस के आने से पहले ही कई लोग बाइक पर सवार होकर इलाके से निकलने लगे थे। छात्र माधव गुप्ता ने आरोप लगाया कि इस घटना के पीछे न केवल पूजा को लेकर असहमति थी, बल्कि यूआईटी में बंगाली और गैर-बंगाली छात्रों के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव भी था। उन्होंने दावा किया कि गैर-बंगाली छात्रों को बार-बार निशाना बनाया जाता था और बाहर दिखने पर उन्हें पीटने की धमकी दी जाती थी। उन्होंने दावा किया कि घटना के समय बाहर से 15-20 लोग, छात्रावास से 15-20 छात्र और पीजी से 10-15 छात्र मौजूद थे। यानी, उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर लगभग 50-60 लोग जमा हुए थे। छात्र संगठन एबीवीपी के महासचिव बोले- ये कॉलेज का इंटरनल मैटर है एबीवीपी के महासचिव सुशोवन चौधरी ने कहा कि यह कॉलेज का आंतरिक मामला है। एबीवीपी इस घटना में किसी भी तरह से शामिल नहीं है। कॉलेज में एबीवीपी की कोई इकाई नहीं है। अगर कोई संगठन के नाम का इस्तेमाल करके किसी झड़प में शामिल होता है तो एबीवीपी इसकी जिम्मेदारी नहीं लेगी। हालांकि, एबीवीपी ने इस बात की जांच की मांग की है कि बाहरी लोगों को कॉलेज में किसने प्रवेश दिया। एबीवीपी के बर्दवान महानगर सचिव सुशोवन चौधरी ने कहा कि यूआईटी में एबीवीपी की कोई संगठनात्मक इकाई नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इस्तेमाल किए जा रहे पैड से संगठन का कोई संबंध नहीं है। उनके शब्दों में, “कोई भी पैड बना सकता है।” उन्होंने यह भी मांग की कि इस बात की जांच की जाए कि क्या पैड को एबीवीपी द्वारा अनुमोदित किया गया है या नहीं। फिलहाल, बर्दवान स्थित यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (यूआईटी) में विश्वकर्मा पूजा के आयोजन को लेकर छात्रों के दो गुटों के बीच झड़प के बाद अशांत माहौल बना हुआ है। कार्यवाहक प्रधानाचार्य सुनील करफॉर्मर ने गुरुवार से कॉलेज में सभी कक्षाएं अनिश्चितकाल के लिए बंद करने का आदेश दिया है। उन्होंने कॉलेज परिसर में स्थित दो छात्रावासों को खाली करने का भी आदेश दिया है।

