प्रयागराज में टीजीटी पीजीटी अभ्यार्थियों द्वारा अपनी मांगों को लेकर कई दिनों से चलाए जा रहे आमरण अनशन में दिल्ली से बुजुर्ग भी अपना समर्थन देने पहुंचे। वह खुद भी पांचों छात्रों के साथ अनशन पर बैठे हैं। 65 वर्षीय राजीव कुमार मिश्र ने पुरानी नियमावली में अचानक नियम बदले जाने का कड़ा विरोध किया है और इसे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया है। 6 तारीख से खुद भी हैं अनशन पर राजीव कुमार मिश्र ने बताया कि वह दिल्ली के रहने वाले हैं। जिनकी उम्र 65 वर्ष है। उन्हें इस आमरण अनशन की जानकारी 6 सितम्बर को मिली थी। इसके बाद 6 तारीख की दोपहर के बाद से ही उन्होंने भोजन त्याग दिया था और 7 तारीख की सुबह 7 बजे अनशन स्थल पर पहुंच गए। वे तब से पूर्ण रूप से आमरण अनशन पर हैं और इसकी विधिवत जानकारी एक शपथ पत्र के माध्यम से स्थानीय प्रशासन को भी दे चुके हैं। 7 लाख छात्र प्रभावित, 3 साल की छूट की मांग राजीव कुमार मिश्र का कहना है कि सरकार द्वारा अचानक नए नियम लागू कर दिए जाने से लगभग 7 लाख प्रतियोगी छात्र प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले जब भी आईएएस या पीसीएस जैसी परीक्षाओं में कोई नया नियम बनता था, तो छात्रों को 3 साल का ग्रेस पीरियड (समय) दिया जाता था ताकि वे नई व्यवस्था के अनुरूप तैयारी कर सकें। उन्होंने मांग की है कि वर्तमान में भी इन नियमों को कम से कम 3 साल बाद लागू किया जाए, जिससे छात्रों को आगामी भर्तियों में हिस्सा लेने का उचित मौका मिल सके। युवाओं की ऊर्जा हो रही बर्बाद अनशन स्थल पर 40 से 55 वर्ष की आयु के कई अभ्यर्थी भी मौजूद हैं। इस पर चिंता जताते हुए मिश्र ने कहा कि इन लोगों के पास नौकरी करने के लिए अब बमुश्किल 10 से 15 साल बचे हैं। सरकार भर्तियां न निकालकर युवाओं की ऊर्जा को बर्बाद कर रही है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर भी प्रहार करते हुए कहा कि एक तरफ सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती नहीं हो रही है, और दूसरी तरफ प्राइवेट स्कूलों की फीस 3 से 4 हजार रुपये प्रति माह हो गई है, जिससे आम बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। कब से चल रहा धरना 31 अगस्त से टीजीटी पीजीटी की पुरानी नियमावली और पुराने पैटर्न से भर्ती परीक्षा कराने को लेकर लगातार धरना प्रदर्शन चल रहा है। वहीं शिक्षक दिवस यानी 5 सितम्बर से 5 अभ्यर्थी आमरण अनशन पर बैठे हैं।

