बाराबंकी में घाघरा नदी का जलस्तर करीब 14 सेंटीमीटर कम हुआ है, लेकिन रामनगर तहसील के हेतमापुर गांव में कटान का खतरा कम नहीं हुआ। नदी की तेज धार लगातार आबादी की जमीन को काट रही है। देखते ही देखते घरों की नींव दरक रही है और आशियाने घाघरा में समाते जा रहे हैं। जिंदगी भर की कमाई को अपनी आंखों के सामने नदी में बहता देख ग्रामीण दुखी और बेबस हैं। हेतमापुर इस समय घाघरा के कटान से सबसे ज्यादा प्रभावित है। कई परिवार अपने घरों से जरूरी सामान बाहर निकाल चुके हैं। कुछ ग्रामीण मजबूरी में अपने हाथों से ही घर तोड़ रहे हैं, ताकि बचा हुआ सामान सुरक्षित किया जा सके। आंखों के सामने अपना घर टूटता देख कई परिवारों की आंखों से आंसू छलक पड़े। मंदिर-मस्जिद तक पहुंचा कटान का खतरा कटान अब गांव के धार्मिक स्थलों के लिए भी खतरा बन गया है। हेतमापुर का प्रसिद्ध श्री बाबा नारायण दास मंदिर घाघरा की तेज धार के बेहद करीब पहुंच गया है। मंदिर के पास स्थित मस्जिद पर भी कटान का खतरा मंडरा रहा है। धार्मिक स्थलों पर संकट देख ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। सीटी बजाकर लोगों को कटान से दूर कर रही पुलिस नदी की खतरनाक धार को देखते हुए पुलिसकर्मी भी मौके पर तैनात हैं। कटान वाले हिस्से में हादसे की आशंका को देखते हुए पुलिस लगातार सीटी बजाकर ग्रामीणों और मौके पर पहुंचे लोगों को खतरे वाले क्षेत्र से दूर कर रही है। बचाव कार्य में जुटा बाढ़ विभाग जिला प्रशासन ने कटान रोकने के लिए बचाव कार्य तेज कर दिया है। बाढ़ विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर डटे हुए हैं और कटान रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं। एसडीएम आकांक्षा गुप्ता भी मौके पर पहुंचकर स्थिति पर नजर रख रही हैं। आबादी बचाना प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती फिलहाल प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती हेतमापुर की आबादी को घाघरा की धार से बचाना है। इसके साथ मंदिर और मस्जिद को भी सुरक्षित रखना चुनौती बना हुआ है। ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन के बचाव कार्य और घाघरा नदी की अगली चाल पर टिकी है।

