BRICS की वेलकम किट में बिहार का Sattuz:दुनिया के मेहमानों तक पहुंचेगा मधुबनी का स्वाद; 2009 में मार्केटिंग की नौकरी छोड़ लौटे थे घर

BRICS की वेलकम किट में बिहार का Sattuz:दुनिया के मेहमानों तक पहुंचेगा मधुबनी का स्वाद; 2009 में मार्केटिंग की नौकरी छोड़ लौटे थे घर

दिल्ली में होने वाले 18वां BRICS Summit में विदेशी मेहमानों का भारत आना शुरू हो गया है। इस बीच विदेशी महमानों को हमारे बिहार के पारंपरिक जायके से भी रूबरू कराया जा रहा है। सम्मेलन की वेलकम किट में बिहार के दो खास प्रोडक्ट्स- सत्तू और मखाना शामिल किए गए हैं। बिहार के इन दोनों प्रोडक्ट्स को ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर जगह मिलने पर CM सम्राट चौधरी ने खुशी जताई है। उन्होंने इसे बिहार के लिए गौरव का पल बताते हुए कहा, बिहार का स्वाद अब दुनिया के सामने पहुंच रहा है। CM ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा- ‘नए बिहार की नई पहचान, बिहार का स्वाद अब दुनिया के सामने।’ उन्होंने कहा कि BRICS Summit की वेलकम किट में शामिल सत्तू और मखाना बिहार के स्वाद, परंपरा और उद्यमिता की पहचान हैं। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताते हुए कहा, इससे लोकल टू ग्लोबल के संकल्प को मजबूती मिलेगी। बता दें कि ये जो सत्तू विदेशी महमानों को परोसा जा रहा है, इसके फॉउंडर बिहार के मधुबनी जिले के सचिन कुमार हैं। उन्होंने ‘SATTUZ’ नाम से इसकी शुरूआत की है। अब पढ़िए सचिन की पूरी कहानी… मुंबई की नौकरी छोड़ी, बिहार लौटकर शुरू की कारोबार की तलाश सचिन ने 2008 में सेल्स और मार्केटिंग में MBA पूरा किया था। उस समय वे मुंबई में बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर के रूप में काम कर रहे थे। कारोबारियों से लगातार मुलाकात के दौरान उन्हें लगा कि वे भी अपना बिजनेस शुरू कर सकते हैं। उनका लक्ष्य बिहार में कारोबार खड़ा करना था। 2009 में एक वर्कशॉप में ट्रेडिशनल फूड प्रोडेक्ट की बाजार क्षमता के बारे में जानकारी मिलने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और मधुबनी लौट आए। शुरुआत में उन्होंने परिवार के कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बिजनेस से जुड़कर काम किया और साथ ही नए बिजनेस आइडिया पर रिसर्च करते रहे। उनकी पत्नी रिचा ने भी इस फैसले में उनका साथ दिया। मखाना और सत्तू में दिखा मौका, सत्तू को चुना सचिन ने पारंपरिक खाद्य उत्पादों पर रिसर्च के दौरान महसूस किया कि मधुबनी और बिहार की पहचान वाले मखाना और सत्तू में बड़ा बाजार बनने की क्षमता है। उन्हें लगा कि मखाना की पैकेजिंग और मार्केटिंग पहले से काफी विकसित हो चुकी है, लेकिन सत्तू के क्षेत्र में अभी ज्यादा प्रयोग नहीं हुए हैं। उन्होंने इसी अंतर को अपना बिजनेस अवसर बनाया। सत्तू मुख्य रूप से चने या जौ को भूनकर पीसने से तैयार किया जाता है। बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में इसका इस्तेमाल लंबे समय से होता रहा है। सचिन ने इसी पारंपरिक खाद्य पदार्थ को आधुनिक पैकेजिंग और रेडी-टू-मिक्स फॉर्म में बाजार में उतारने की योजना बनाई। सड़क किनारे मिलने वाले सत्तू का बनाया पैकेज्ड विकल्प सचिन के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि सत्तू को ऐसी शक्ल में बाजार में उतारा जाए, जिसे लोग आसानी से कहीं भी तैयार कर सकें। बिहार में सड़क किनारे मिलने वाले सत्तू की साफ-सफाई को लेकर लोगों की चिंता और शहरों में कामकाजी लोगों की सुविधा की जरूरत को उन्होंने बिजनेस मॉडल में शामिल किया। रिसर्च के दौरान उन्हें लगा कि अगर सत्तू पहले से मिक्स होकर छोटे पैकेट में उपलब्ध हो, तो इसे सिर्फ पानी मिलाकर कुछ ही मिनट में तैयार किया जा सकता है। इस सोच के आधार पर उन्होंने अपनी मां की रेसिपी को आधार बनाकर प्रोडेक्ट तैयार किया। इसके बाद लैब टेस्ट कराए गए और फूड सेफ्टी और स्टैंडर्ड ऑथोरिटी यानी FSSAI से जरूरी मंजूरी ली गई। शुरुआत में दो पेपर ग्लास, दो सैशे और स्टिरर वाला ट्रैवल पैक तैयार किया गया, जिसकी कीमत 30 रुपए रखी गई थी। मीठा, जलजीरा और चॉकलेट फ्लेवर में आया सत्तू अप्रैल 2018 में Sattuz ने बाजार में कदम रखा। कंपनी ने सत्तू ड्रिंक को तीन फ्लेवर में पेश किया- मीठा, जलजीरा और चॉकलेट। प्रोडेक्ट का मॉडल काफी आसान रखा गया। सैशे में मौजूद सत्तू मिक्स में पानी मिलाकर ड्रिंक तैयार की जा सकती थी। कंपनी ने इसे प्रोटीन, फाइबर और आयरन वाले पारंपरिक खाद्य पदार्थ के रूप में पेश किया। सत्तू की ताजगी बनाए रखने के लिए सैशे पैकेजिंग का इस्तेमाल किया गया। कंपनी के मुताबिक प्रोडेक्ट की शेल्फ लाइफ करीब छह महीने रखी गई। 2019 में मिला निवेश, Shark Tank से भी मिली पहचान Sattuz के कारोबार को 2019 में बड़ा बढ़ावा मिला। अक्टूबर 2019 में कंपनी ने नई दिल्ली स्थित इंडियन एंजल नेटवर्क से फंडिंग हासिल की। IIM कलकत्ता इनोवेशन पार्क और बिहार इंडस्ट्रीज एसोशिएशन भी इसके निवेशकों में शामिल रहे। इसके बाद कंपनी ने अपने उत्पादों की रेंज बढ़ाने पर काम किया। 2021 में सत्तू ड्रिंक को आसानी से तैयार करने के लिए शेकर्स भी लॉन्च किए गए। दिसंबर 2021 में कंपनी ने शार्क टैंक के पहले सीजन में भी हिस्सा लिया। इस अनुभव के बाद कंपनी ने केवल पैकेज्ड सत्तू बेचने के बजाय सत्तू से तैयार दूसरे खाद्य उत्पादों पर भी ध्यान देना शुरू किया। अब सिर्फ सत्तू ड्रिंक नहीं, लिट्टी-पराठे की स्टफिंग भी सचिन की पत्नी रिचा रेसिपी डेवलपमेंट का काम देखती हैं। सत्तू की बहुउपयोगिता को देखते हुए कंपनी ने इसका इस्तेमाल लिट्टी और पराठे में करने के लिए रेडी-टू-कुक स्टफिंग मिक्स भी तैयार किया। यह मिक्स लिट्टी, पराठा और पूरी जैसे खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल किया जा सकता है। कंपनी ने 2022 में Sattuz Café भी ट्रायल के तौर पर शुरू किया था, जहां सत्तू से बने तैयार खाद्य उत्पादों की संभावना को परखा गया। अमेरिका और सिंगापुर से भी आए ऑर्डर Sattuz ने धीरे-धीरे बिहार से बाहर भी बाजार बनाया। कंपनी की बिक्री अपनी वेबसाइट के अलावा अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे ऑनलाइन मार्केटप्लेस के माध्यम से होती है। इसके उत्पाद देश के अलग-अलग हिस्सों के रिटेल स्टोरों में भी उपलब्ध कराए गए। कंपनी को अमेरिका, सिंगापुर और कुछ अन्य देशों से भी ऑर्डर मिले। हालांकि कोरोना महामारी के दौरान कारोबार की रफ्तार प्रभावित हुई। बिक्री घटने के बावजूद कंपनी ने अपने ऑपरेशनल खर्च जारी रखे। लॉकडाउन के बाद लोगों में स्वास्थ्य, पोषण और हाइजीन को लेकर बढ़ी जागरूकता से सत्तू जैसे पारंपरिक हेल्दी फूड की मांग को फायदा मिला। पटना के फतुहा में बन रहा 5 हजार वर्गफुट का प्लांट कारोबार को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए कंपनी ने पटना के बाहरी इलाके फतुहा में फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की योजना बनाई। करीब 5 हजार वर्गफुट में तैयार होने वाली इस यूनिट में सत्तू ड्रिंक के सैशे, बड़े पैक और स्टफिंग मिक्स तैयार किए जाने की योजना थी। आगे चलकर यहां रेडी-टू-ईट लिट्टी और सत्तू पराठा भी तैयार करने की योजना बताई गई थी। इस यूनिट से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होने की उम्मीद जताई गई थी। सरकारी योजनाओं और बिहार के स्टार्टअप इकोसिस्टम से मिला सहारा सचिन ने अपने कारोबार को आगे बढ़ाने में बिहार के स्टार्टअप इकोसिस्टम की भूमिका को भी अहम बताया। उनके मुताबिक बिहार उद्योग विभाग, स्टार्टअप सेल, बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण यानी BIADA और यूनियन बैंक से उन्हें मदद मिली। कंपनी को केंद्र सरकार की PMFME योजना से भी सहायता मिली। यूनियन बैंक ने इस योजना के तहत Sattuz को 77 लाख रुपए का वित्तपोषण किया था, जिसका इस्तेमाल कारोबार के विस्तार में किया जा रहा था। बिहार के पारंपरिक सत्तू को ग्लोबल बाजार तक ले जाने की कोशिश सचिन की कहानी इस बात का उदाहरण है कि स्थानीय और पारंपरिक खाद्य उत्पादों को आधुनिक पैकेजिंग, सुविधा और ब्रांडिंग के साथ बड़े बाजार तक पहुंचाया जा सकता है। जिस सत्तू को बिहार में सदियों से घरेलू और स्थानीय स्तर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है, Sattuz ने उसे रेडी-टू-मिक्स ड्रिंक और रेडी-टू-कुक फूड के रूप में पेश करने की कोशिश की। मकसद सिर्फ सत्तू बेचने का नहीं, बल्कि बिहार के इस पारंपरिक खाद्य उत्पाद को आधुनिक हेल्दी फूड की कैटेगरी में स्थापित करने का है। कंपनी की आगे की योजना उत्पादों की रेंज बढ़ाने और देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहुंच मजबूत करने की रही है। दिल्ली में होने वाले 18वां BRICS Summit में विदेशी मेहमानों का भारत आना शुरू हो गया है। इस बीच विदेशी महमानों को हमारे बिहार के पारंपरिक जायके से भी रूबरू कराया जा रहा है। सम्मेलन की वेलकम किट में बिहार के दो खास प्रोडक्ट्स- सत्तू और मखाना शामिल किए गए हैं। बिहार के इन दोनों प्रोडक्ट्स को ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर जगह मिलने पर CM सम्राट चौधरी ने खुशी जताई है। उन्होंने इसे बिहार के लिए गौरव का पल बताते हुए कहा, बिहार का स्वाद अब दुनिया के सामने पहुंच रहा है। CM ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा- ‘नए बिहार की नई पहचान, बिहार का स्वाद अब दुनिया के सामने।’ उन्होंने कहा कि BRICS Summit की वेलकम किट में शामिल सत्तू और मखाना बिहार के स्वाद, परंपरा और उद्यमिता की पहचान हैं। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताते हुए कहा, इससे लोकल टू ग्लोबल के संकल्प को मजबूती मिलेगी। बता दें कि ये जो सत्तू विदेशी महमानों को परोसा जा रहा है, इसके फॉउंडर बिहार के मधुबनी जिले के सचिन कुमार हैं। उन्होंने ‘SATTUZ’ नाम से इसकी शुरूआत की है। अब पढ़िए सचिन की पूरी कहानी… मुंबई की नौकरी छोड़ी, बिहार लौटकर शुरू की कारोबार की तलाश सचिन ने 2008 में सेल्स और मार्केटिंग में MBA पूरा किया था। उस समय वे मुंबई में बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर के रूप में काम कर रहे थे। कारोबारियों से लगातार मुलाकात के दौरान उन्हें लगा कि वे भी अपना बिजनेस शुरू कर सकते हैं। उनका लक्ष्य बिहार में कारोबार खड़ा करना था। 2009 में एक वर्कशॉप में ट्रेडिशनल फूड प्रोडेक्ट की बाजार क्षमता के बारे में जानकारी मिलने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और मधुबनी लौट आए। शुरुआत में उन्होंने परिवार के कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बिजनेस से जुड़कर काम किया और साथ ही नए बिजनेस आइडिया पर रिसर्च करते रहे। उनकी पत्नी रिचा ने भी इस फैसले में उनका साथ दिया। मखाना और सत्तू में दिखा मौका, सत्तू को चुना सचिन ने पारंपरिक खाद्य उत्पादों पर रिसर्च के दौरान महसूस किया कि मधुबनी और बिहार की पहचान वाले मखाना और सत्तू में बड़ा बाजार बनने की क्षमता है। उन्हें लगा कि मखाना की पैकेजिंग और मार्केटिंग पहले से काफी विकसित हो चुकी है, लेकिन सत्तू के क्षेत्र में अभी ज्यादा प्रयोग नहीं हुए हैं। उन्होंने इसी अंतर को अपना बिजनेस अवसर बनाया। सत्तू मुख्य रूप से चने या जौ को भूनकर पीसने से तैयार किया जाता है। बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में इसका इस्तेमाल लंबे समय से होता रहा है। सचिन ने इसी पारंपरिक खाद्य पदार्थ को आधुनिक पैकेजिंग और रेडी-टू-मिक्स फॉर्म में बाजार में उतारने की योजना बनाई। सड़क किनारे मिलने वाले सत्तू का बनाया पैकेज्ड विकल्प सचिन के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि सत्तू को ऐसी शक्ल में बाजार में उतारा जाए, जिसे लोग आसानी से कहीं भी तैयार कर सकें। बिहार में सड़क किनारे मिलने वाले सत्तू की साफ-सफाई को लेकर लोगों की चिंता और शहरों में कामकाजी लोगों की सुविधा की जरूरत को उन्होंने बिजनेस मॉडल में शामिल किया। रिसर्च के दौरान उन्हें लगा कि अगर सत्तू पहले से मिक्स होकर छोटे पैकेट में उपलब्ध हो, तो इसे सिर्फ पानी मिलाकर कुछ ही मिनट में तैयार किया जा सकता है। इस सोच के आधार पर उन्होंने अपनी मां की रेसिपी को आधार बनाकर प्रोडेक्ट तैयार किया। इसके बाद लैब टेस्ट कराए गए और फूड सेफ्टी और स्टैंडर्ड ऑथोरिटी यानी FSSAI से जरूरी मंजूरी ली गई। शुरुआत में दो पेपर ग्लास, दो सैशे और स्टिरर वाला ट्रैवल पैक तैयार किया गया, जिसकी कीमत 30 रुपए रखी गई थी। मीठा, जलजीरा और चॉकलेट फ्लेवर में आया सत्तू अप्रैल 2018 में Sattuz ने बाजार में कदम रखा। कंपनी ने सत्तू ड्रिंक को तीन फ्लेवर में पेश किया- मीठा, जलजीरा और चॉकलेट। प्रोडेक्ट का मॉडल काफी आसान रखा गया। सैशे में मौजूद सत्तू मिक्स में पानी मिलाकर ड्रिंक तैयार की जा सकती थी। कंपनी ने इसे प्रोटीन, फाइबर और आयरन वाले पारंपरिक खाद्य पदार्थ के रूप में पेश किया। सत्तू की ताजगी बनाए रखने के लिए सैशे पैकेजिंग का इस्तेमाल किया गया। कंपनी के मुताबिक प्रोडेक्ट की शेल्फ लाइफ करीब छह महीने रखी गई। 2019 में मिला निवेश, Shark Tank से भी मिली पहचान Sattuz के कारोबार को 2019 में बड़ा बढ़ावा मिला। अक्टूबर 2019 में कंपनी ने नई दिल्ली स्थित इंडियन एंजल नेटवर्क से फंडिंग हासिल की। IIM कलकत्ता इनोवेशन पार्क और बिहार इंडस्ट्रीज एसोशिएशन भी इसके निवेशकों में शामिल रहे। इसके बाद कंपनी ने अपने उत्पादों की रेंज बढ़ाने पर काम किया। 2021 में सत्तू ड्रिंक को आसानी से तैयार करने के लिए शेकर्स भी लॉन्च किए गए। दिसंबर 2021 में कंपनी ने शार्क टैंक के पहले सीजन में भी हिस्सा लिया। इस अनुभव के बाद कंपनी ने केवल पैकेज्ड सत्तू बेचने के बजाय सत्तू से तैयार दूसरे खाद्य उत्पादों पर भी ध्यान देना शुरू किया। अब सिर्फ सत्तू ड्रिंक नहीं, लिट्टी-पराठे की स्टफिंग भी सचिन की पत्नी रिचा रेसिपी डेवलपमेंट का काम देखती हैं। सत्तू की बहुउपयोगिता को देखते हुए कंपनी ने इसका इस्तेमाल लिट्टी और पराठे में करने के लिए रेडी-टू-कुक स्टफिंग मिक्स भी तैयार किया। यह मिक्स लिट्टी, पराठा और पूरी जैसे खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल किया जा सकता है। कंपनी ने 2022 में Sattuz Café भी ट्रायल के तौर पर शुरू किया था, जहां सत्तू से बने तैयार खाद्य उत्पादों की संभावना को परखा गया। अमेरिका और सिंगापुर से भी आए ऑर्डर Sattuz ने धीरे-धीरे बिहार से बाहर भी बाजार बनाया। कंपनी की बिक्री अपनी वेबसाइट के अलावा अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे ऑनलाइन मार्केटप्लेस के माध्यम से होती है। इसके उत्पाद देश के अलग-अलग हिस्सों के रिटेल स्टोरों में भी उपलब्ध कराए गए। कंपनी को अमेरिका, सिंगापुर और कुछ अन्य देशों से भी ऑर्डर मिले। हालांकि कोरोना महामारी के दौरान कारोबार की रफ्तार प्रभावित हुई। बिक्री घटने के बावजूद कंपनी ने अपने ऑपरेशनल खर्च जारी रखे। लॉकडाउन के बाद लोगों में स्वास्थ्य, पोषण और हाइजीन को लेकर बढ़ी जागरूकता से सत्तू जैसे पारंपरिक हेल्दी फूड की मांग को फायदा मिला। पटना के फतुहा में बन रहा 5 हजार वर्गफुट का प्लांट कारोबार को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए कंपनी ने पटना के बाहरी इलाके फतुहा में फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की योजना बनाई। करीब 5 हजार वर्गफुट में तैयार होने वाली इस यूनिट में सत्तू ड्रिंक के सैशे, बड़े पैक और स्टफिंग मिक्स तैयार किए जाने की योजना थी। आगे चलकर यहां रेडी-टू-ईट लिट्टी और सत्तू पराठा भी तैयार करने की योजना बताई गई थी। इस यूनिट से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होने की उम्मीद जताई गई थी। सरकारी योजनाओं और बिहार के स्टार्टअप इकोसिस्टम से मिला सहारा सचिन ने अपने कारोबार को आगे बढ़ाने में बिहार के स्टार्टअप इकोसिस्टम की भूमिका को भी अहम बताया। उनके मुताबिक बिहार उद्योग विभाग, स्टार्टअप सेल, बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण यानी BIADA और यूनियन बैंक से उन्हें मदद मिली। कंपनी को केंद्र सरकार की PMFME योजना से भी सहायता मिली। यूनियन बैंक ने इस योजना के तहत Sattuz को 77 लाख रुपए का वित्तपोषण किया था, जिसका इस्तेमाल कारोबार के विस्तार में किया जा रहा था। बिहार के पारंपरिक सत्तू को ग्लोबल बाजार तक ले जाने की कोशिश सचिन की कहानी इस बात का उदाहरण है कि स्थानीय और पारंपरिक खाद्य उत्पादों को आधुनिक पैकेजिंग, सुविधा और ब्रांडिंग के साथ बड़े बाजार तक पहुंचाया जा सकता है। जिस सत्तू को बिहार में सदियों से घरेलू और स्थानीय स्तर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है, Sattuz ने उसे रेडी-टू-मिक्स ड्रिंक और रेडी-टू-कुक फूड के रूप में पेश करने की कोशिश की। मकसद सिर्फ सत्तू बेचने का नहीं, बल्कि बिहार के इस पारंपरिक खाद्य उत्पाद को आधुनिक हेल्दी फूड की कैटेगरी में स्थापित करने का है। कंपनी की आगे की योजना उत्पादों की रेंज बढ़ाने और देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहुंच मजबूत करने की रही है।  

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