उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग शुक्रवार को एटा पहुंचा। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह की अध्यक्षता में बैठक हुई। शाम 4 बजे शुरू हुई बैठक करीब 5:30 बजे तक चली। बैठक में जिलेभर के जनप्रतिनिधियों से अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति की जानकारी ली गई। आयोग स्थानीय और ग्रामीण निकायों में ओबीसी के प्रतिनिधित्व और आरक्षण की वास्तविक स्थिति का अध्ययन कर रहा है। जनप्रतिनिधियों से किए सवाल-जवाब बैठक में निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष/प्रशासक, जिला पंचायत सदस्य, ब्लॉक प्रमुख/प्रशासक, क्षेत्र पंचायत सदस्य और ग्राम प्रधान/प्रशासक समेत विभिन्न जनप्रतिनिधियों ने अपने सुझाव और तथ्य आयोग के सामने रखे। आयोग ने विकासखंडों से आए जनप्रतिनिधियों से सवाल-जवाब कर शिक्षा, रोजगार, राजनीतिक भागीदारी और स्थानीय निकायों में ओबीसी के प्रतिनिधित्व से जुड़ी जानकारी जुटाई। जनप्रतिनिधियों ने पिछड़ा वर्ग की संख्या के अनुपात में आरक्षण देने, ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर सुधारने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया।
प्रमाणिक आंकड़ों के आधार पर तैयार होगी रिपोर्ट आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आयोग प्रदेश के अलग-अलग जिलों का दौरा कर रहा है। इसका उद्देश्य ओबीसी के सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक और राजनीतिक पिछड़ेपन की वास्तविक स्थिति का आकलन करना है। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों में ओबीसी के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आरक्षण से जुड़े आंकड़ों का भी गहराई से अध्ययन किया जा रहा है। जनप्रतिनिधियों और नागरिकों से मिलने वाले सुझाव, आपत्तियां और प्रमाणिक जानकारी आयोग के अध्ययन का महत्वपूर्ण आधार होंगे। उन्होंने कहा कि सभी तथ्यों को जुटाने और उनकी जांच के बाद सरकार को सिफारिशें भेजी जाएंगी। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और नागरिकों से निष्पक्ष एवं प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराने की अपील की। एटा में 569 ग्राम पंचायत और 30 जिला पंचायत वार्ड मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र प्रसाद मिश्र ने आयोग को जिले की भौगोलिक और प्रशासनिक स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एटा का क्षेत्रफल 2,456 वर्ग किलोमीटर है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जिले की आबादी 17,74,480 है। जिले में तीन तहसील, आठ विकासखंड, 569 ग्राम पंचायत, आठ क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के 30 वार्ड हैं। आयोग के सामने जिला पंचायत स्तर पर ओबीसी प्रतिनिधित्व से जुड़े आंकड़े भी रखे गए। तथ्यों के आधार पर तैयार होगी विस्तृत रिपोर्ट न्यायमूर्ति राम औतार सिंह ने कहा कि पिछड़ेपन का सही आकलन प्रमाणिक आंकड़ों और जनसहभागिता के आधार पर ही संभव है। एटा से प्राप्त तथ्यों और सुझावों का अध्ययन कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी और शासन को प्रस्तुत की जाएगी। बैठक में आयोग के सदस्य बृजेश कुमार, संतोष कुमार विश्वकर्मा, डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया और एसपी सिंह, एडीएम प्रशासन संगम लाल, सीडीओ राजेंद्र प्रसाद मिश्र, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार समेत संबंधित अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

